Azabe Qabar Barhaq He

عذاب القبر حق

अज़ाबें क़ब्र हक़ है मसला 57. अज़ाबे क़ब्र हक़ है। .

عن عائشة رضى الله عنها أن يهودية خنث عليها فكرث عذاب القبر فقال الله من عذاب القبر قالت عائشة رضي الله عنها : ول الله و عن لها : أعاذ عذاب القبر ؟ فقال : (( نعم ، عذاب القبر حق ) قالت عائشة: فما رأي رشول الله * بعد صلى صلاة إلا تعود من عذاب القبر . رواه البخاری (1)

हज़रत आइशा (रज़ि०) से रिवायत है कि एक यहूदी औरत उनके पास आई और अज़ाबे क़ब्र का ज़िक्र किया और हज़रत आइशा (रज़ि०) से कहने लगी “अल्लाह तुझे अज़ाबे क़ब्र से बचाए।” हज़रत आइशा (रज़ि०) कहती हैं मैंने रसूले अकरम (सल्ल०) से अज़ाबे क़ब्र के बारे में सवाल किया तो आप (सल्ल०) ने इरशाद फ़रमाया, हां “आज़ाबे क़ब्र हक़ है”। हज़रत आइशा (रज़ि०) कहती हैं उसके बाद मैंने नबी अकरम (सल्ल०) को कोई ऐसी नमाज़ पढ़ते नहीं देखा जिसमें आप (सल्ल.) ने अज़ाबे क़ब्र से पनाह न मांगी हो।” इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।’

मसला 58. रसूले अकरम (सल्ल.) को अल्लाह तआला ने वह्य द्वारा अज़ाबे क़ब्र के बारे में सूचित किया।

وعندي امرأة من عن عائشة رضي الله عنها قالت : دخل على رشون الله اليهود وهى تقول : إنكم تفتون في الفور ، فازنا ع شول الله ، وقال : (( إنما تفتن يهود)  تشييد من عذاب القبر . رواه النسائي وقالث عائشة رضي الله عنها : قلنا ليالى ، ثم قال ترشول * (رائة اوجي إلى بعد آنگم تفتون في القزر » قالت عائشة رضي الله عنها قسمغ رول الله

. 1. बुख़ारी, किताबुल जनाइज़।

हज़रत आइशा (रजि०) कहती हैं कि रसूले अकरम (सल्ल०) मेरे यहां तशरीफ़ लाए उस समय मेरे पास एक यहूदी औरत बैठी हुई थी और कह रही थी “तुम लोग क़ब्रों में आज़माए जाओगे।” (अर्थात अज़ाब दिए जाओगे) रसूले अकरम (सल्ल०) (ने यह बात सुनी और) घबरा गए फ़रमाया “बेशक यहूदी अज़ाब दिए जाएंगे।” हज़रत आइशा (रज़ि०) कहती हैं उसके बाद हमने कई रातें (वय का) इंतिज़ार किया फिर (एक दिन) रसूले अकरम (सल्ल०) ने फ़रमाया “मेरी तरफ़ वह्य की गई है कि तुम लोग क़ब्रों में आज़माए जाओगे।” हज़रत आइशा (रज़ि०) कहती हैं “उसके बाद मैंने आप (सल्ल.) को हमेशा अज़ाबे क़ब्र से पनाह मांगते सुना है।” इसे नसाई ने रिवायत किया है।’

स्पष्टीकरण : उपरोक्त हदीस मतलू वह्य (अर्थात कुरआन मजीद) के अलावा गैर मतलू वह्य की स्पष्ट मिसाल है। __ मसला 59. काफ़िरों को क़ब्र में अज़ाब दिया जाता है और उनके चीखने चिल्लाने की आवाज़ (इंसानों और जिन्नों के अलावा) सारे जानवर सुनते हैं।

عن ابن مسعود رضي الله عنه عن النبي و قال (إن المؤتي يقيون في قبورهم ٹی ائ البهائم تسمع أصواتهم )) رواه الطبرانی (2)

हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ि०) से रिवायत है कि नबी अकरम (सल्ल०) ने फ़रमाया “मुर्दे (काफ़िर या मुश्कि ) अपनी क़ब्रों में अज़ाब दिए जाते हैं और उन (के चीखने चिल्लाने) की आवाजें सारे चौपाए सुनते हैं।” इसे तबरानी ने रिवायत किया है।’

  1. किताबुल जनाइज़, बाब तऊज़ मिन अज़ाबिल क़ब्र। 2. अत्तीब वत्तींब, जिल्द 4, हदीस।

हज़रत अय्यूब (रजि०) से रिवायत है कि नबी अकरम (सल्ल०) सूरज अस्त होने के बाद (घर से निकले तो (क़ब्रिस्तान में) एक आवाज़ सुनी आप (सल्ल0) ने इरशाद फ़रमाया “यहूदियों को उनकी क़ब्रों में अज़ाब हो रहा है।” इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।’ ____ मसला 60. नबवी काल में अज़ाबे क़ब्र की एक शिक्षाप्रद घटना जिसे मदीना मुनव्वरा के सब लोगों ने देखा।

عن أنس رضي الله عنه قال كان رجل تضرانيا فاشلم وقرة البقرة وآل عمران  الأماكتب له ، فما نضرانيا ، فكان يقول : مايدري محمد فكان يكتب للنبي فأماته الله قدوة فاضح وقد لفظته الأزض فقالوا : هذا فيغل مخمد * واصحابه – بشوا عن ضاجبنا لما قرب نهم فالقوة ، ففروا له فأغمقوا قاضيخ وقد لفظته الأرضوأضخابه بشوا عن ضاجبنا لما هرب منهم فألقوه خارج فقالوا : ماذا فعل محمد القبر؛فحفروا له ، وأغمقوا له في الأزض مااستطاعوا فاضبخ قذ أممة الأزض قلمؤأنه

(2) sujhaljj .in/ हज़रत अनस (रज़ि०) रिवायत करते हैं कि एक ईसाई आदमी मुसलमान हुआ उसने सूरह बक़रा और सूरह आले इमरान पढ़ ली और रसूले अकरम (सल्ल0) के लिए (वय की) किताबत करने लगा, लेकिन बाद में मुरतद हो गया। कहने लगा मुहम्मद (सल्ल०) को तो किसी बात का पता ही नहीं है जो कुछ मैं लिख कर देता हूं बस वही कह देते हैं। अल्लाह तआला ने जब उसे मौत दी तो ईसाइयों ने उसे (क़ब्र में) दफ़न कर दिया, सुबह हुई तो (लोगों ने देखा कि) ज़मीन ने उसे बाहर निकाल फेंका है। ईसाइयों ने कहा यह मुहम्मद (सल्ल०) और उनके साथियों का काम है चूंकि यह उनके दीन से भाग कर आया है अतः उन्होंने इसकी क़ब्र खोदकर लाश बाहर निकाल फेंकी है। ईसाइयों ने उसके लिए दोबारा (नई जगह) क़ब्र खोदी और उसे (पहले के मुक़ाबले) बहुत गहरा बनाया और (लाश को

  1. किताबुल जनाइज़।

सारा दफ़न कर दिया) जब सुबह हुई तो (लोगों ने देखा कि) ज़मीन ने उसे

बाहर निकाल फेंका है। ईसाइयों ने फिर आरोप लगाया यह मुहम्मद न) और उनके साथियों का काम है चूंकि यह उनके दीन (धम) से भाग आया है अतः उन्होंने इसकी क़ब्र खोदकर लाश बाहर निकाल फेंकी है। हयों ने (तीसरी बार) उसके लिए क़ब्र खोदी और इतनी गहरी बनाई नी गहरी वे बना सकते थे। सुबह हुई तो (लोगों ने देखा कि) ज़मीन से फिर निकाल बाहर फेंका है, तब उन्हें यक़ीन हो गया कि यह लमानों का काम नहीं है (बल्कि अल्लाह तआला का अज़ाब है) अतएव दयों ने उसकी लाश ऐसे ही छोड़ दी।” इसे बुख़ारी ने रिवायत किया

मसल

  1. किताबुल मनाक़िब।

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