Azbae Quran Majeed Ki Roshni Mein

عذاب القبر في ضوء القرآن

अज़ाबे क़ब्र, कुरआन मजीद की रौशनी में

मसला 61. समुन्द्र में डूब जाने के बाद आले फ़िरऔन को रोज़ाना सुबह व शाम आग का अज़ाब दिया जाता है।

ووخان بال فرعون سوء العذاب والنار يغرضون عليها غدوا و عشا ہووم

(46-45:40)६०-Miii i iiiLI __“आले फ़िरऔन बदतरीन अज़ाब के फेर में आ गए जहन्नम की आग के सामने वे सुबह व शाम पेश किए जाते हैं और जब क़यामत की घड़ी आएगी तो हुक्म होगा कि आले फ़िरऔन को सख्त अज़ाब में दाखिल करो।”

(सूरह मोमिन, आयत 45-46) मसला 62. मौत के समय से ही काफ़िरों को अज़ाब शुरू हो जाता है।

وولوتری اذالليمون في غمرت الموت والمملكة باسطوا أيديهم أخرجوا انفسكم اليوم تجزون عذاب الهون بما كنتم تقولون على الله غير الحق وتتم عن ايئه

(93:6)६० “काश! तुम ज़ालिमों को इस हालत में देखो जब वे जांकनी (रूह निकलने) की तकलीफ़ का शिकार होते हैं। फ़रिश्ते हाथ बढ़ा बढ़ाकर कह रहे होते हैं, लाओ निकालो अपनी जानें आज तुम्हें उन बातों के जुर्म में रुसवाकुन अज़ाब दिया जाएगा जो तुम नाहक़ अल्लाह तआला के बारे में कहा करते थे और अल्लाह तआला की आयात के मुक़ाबले में घमंड किया करते थे।”

___ (सूरह अनआम, आयत 93). __ मसला 63. काफ़िरों की रूह क़ब्ज़ करते ही फ़रिश्ते उन्हें जहन्नम के अज़ाब में झौंक देते हैं।

والذين تتوهم الملكة إلى انفسهم فالقوا الشلم ما كنا نعمل من شؤء بالی ان الله عليم بما كنتم تعتزن 6 قاذلوا أبواب جهم خلين فيها قلبنت تفوی

(29-28:16) (03 “अपनी जानों पर जुल्म करने वाले काफ़िर जब (मौत के समय) फ़रिश्तों के हाथों गिरफ़्तार होते हैं तो फ़ौरन (सरकशी से) रुक जाते हैं और कहते हैं “हम तो कोई बुरा काम नहीं कर रहे थे” फ़रिश्ते जवाब देते हैं “कैसे नहीं कर रहे थे? अल्लाह तआला तुम्हारे कर्मों से खूब अवगत है अब जहन्नम के दरवाज़ों में दाखिल हो जाओ हमेशा हमेशा के लिए, जहन्नम वास्तव में बहुत ही बुरा ठिकाना है घमंड करने वालों के लिए।”

___ (सूरह नल, आयत 20-28) मसला 64. काफ़िरों की रूह निकालते ही फ़रिश्ते उन्हें मारना पीटना शुरू कर देते हैं।

ولو ترى إذ يتوفی الذين كفروا الملكة يضربون وجوههم وأدبارهم ودولوا

(50:8)6 opini “काश! तुम देखते जब फ़रिश्ते (बद्र के मैदान में) काफ़िरों की रूहें क़ब्ज़ कर रहे थे वे उनके चेहरों और कूल्हों पर मार लगाते जाते थे और कहते जाते थे “लो अब जलने की सज़ा का मज़ा चखो।”

– (सूरह अनफ़ाल, आयत 50)

و فكيف إذا تتهم المملكة يضربون وجوههم وأدبارهم )

  • “फिर क्या हाल होगा काफ़िरों का जिस समय फ़रिश्ते उनकी रूहें क़ब्ज़ करेंगे और उनके चेहरों और पीठों पर (थप्पड़) मारेंगे।”

(सूरह मुहम्मद, आयत 27) मसला 65. नूह की क़ौम को पानी में डुबोने के साथ ही आग में दाखिल कर दिया गया।

. ومئاخطينهم أغرقوا فأدخلوا نازا قلم يجدوا لهم من دون الله انصارا

___“नूह की क़ौम के लोग अपने गुनाहों के जुर्म में डुबो दिए गए और

आग में दाखिल कर दिए गए और फिर उन्होंने अल्लाह से बचाने के लिए किसी को अपना मददगार न पाया।” (सूरह नूह, आयत 25)

شد عذاب القبر

अज़ाबे क़ब्र की सख्ती मसला 66. क़ब्र के किनारे बैठकर आप (सल्ल.) इतना रोए कि मिट्टी तर हो गई।

في جنازة ، فجلس على عن البراء رضى الله عنه قال : كنا مع رشول الله قير القبر ، فبکی ٹی بل الثرى ، ثم قال (( يا إخواني لمثل هذا قاعدوا ) رواه ابن

(1)

(or)

हज़रत बराअ (रज़ि०) से रिवायत है कि हम रसूले अकरम (सल्ल०). के साथ एक जनाज़े में थे। आप (सल्ल0) क़ब्र के किनारे बैठ कर रोने लगे, यहां तक कि मिट्टी आप (सल्ल०) के आंसुओं से तर हो गई फिर आप (सल्ल०) ने इरशाद फ़रमाया “ऐ मेरे भाइयो! इसके लिए कुछ तैयारी कर लो।” इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है।’ ___ मसला 67. क़ब्रों में लोग फ़ितना दज्जाल की तरह आज़माए जाएंगे।قال « و لقد أوجی عن أسماء بنت ابی بکر رضی الله عنهما أن ربنزل الله إلى انكم فتون في القوړ بغل از قريبا من فتنة الدجال)) ، لا أدرى انهما قال أسماء رواه البخاری (2)

हज़रत असमा बिन्ते अबी बक्र (रज़ि०) से रिवायत है कि रसूले अकरम (सल्ल०) ने फ़रमाया “मेरी तरफ़ वह्य की गई है कि तुम लोग कब्रों में फ़ितना दज्जाल की तरह या उसके क़रीब क़रीब आज़माए जाओगे, मैं (अर्थात हज़रत अनस रज़ि०) नहीं जानता कि हज़रत असमा’ (रज़ि०) ने कौन सा शब्द प्रयोग किया. (अर्थात फ़ितना दज्जाल की तरह या फ़ितना

  1. किताबुज्जुहद, बाबुल हज़न वल बका (2/3383)।

दज्जाल के क़रीब)। इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।’

كان يتوي من عذاب القبر ومن فتة عن عائشة رضي الله عنها أن النبي(صحيح)

. الأجال وقال (( انكم تفون في بؤر گم.)) رواه النسائی (1)

. हज़रत आइशा (रज़ि०) से रिवायत है कि नबी अकरम (सल्ल०) अज़ाबे क़ब्र और फ़ितना मसीह दज्जाल से पनाह मांगा करते थे और फ़रमाते “तुम लोग क़ब्रों में आज़माए जाओगे।” इसे नसाई ने रिवायत किया है।’

मसला 68. रसूले अकरम (सल्ल.) ने अज़ाबे क़ब्र से पनाह मांगी है।

عن عايشة رضي الله عنها أنها قالت : قال شول الله * ( اللهم رب جبرايل وبنگال(صحیح) النار وين عذاب القبر)) رواه النسائی (2) اسرافيل أوبک من

و

हज़रत आइशा (रज़ि०) कहती हैं रसूलुल्लाह (सल्ल०) ने यह दुआ मांगी है “या अल्लाह ! जिब्रील, मीकाईल और इसराफ़ील के रब! मैं तेरी पनाह मांगता हूं आग की गर्मी से और अज़ाबे क़ब्र से।” इसे नसाई ने रिवायत किया है। ___ मसला 69. अगर लोग अज़ाबे क़ब्र देख लें तो क़ब्रों में मुर्दे दफ़न करना छोड़ दें।

قال (( لولا آن و تاقوا لدعو الله أن

عن أنس رضي الله عنه أن النبي

(3) jahanikatta हज़रत अनस (रज़ि०) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह (सल्ल०) ने फ़रमाया “अगर (मुझे यह डर न होता) तुम (अपने मुर्दे) दफ़न करना छोड़ दोगे तो मैं अल्लाह तआला से दुआ करता कि वह तुम्हें अज़ाबे क़ब्र (की आवाज़े) सुनवा दे।” इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।

मसला 70. अगर लोग अज़ाबे क़ब्र देख लें तो हंसें कम रोएं ज़्यादा,

  1. अबवाबुल कसूफ़। 2. किताबुल जनाइज़, बाब तऊज़ मिन अज़ाबिल क़ब्र (2/1951)। 3. किताबुल इस्तआज़ा, बाब इस्तआज़ा मिन हर्रिन्नार (3/5092)। 4. किताबुल जन्नह व सिफ़त नईमहा।

औरतों के साथ संबंध स्थापित करना भूल जाएं और बस्तियां छोड़कर मैदानों और जंगलों में जा बसें।

(راني أرى ما لا ترون ، و أشم عن ابی ذر رضي الله عنه قال قال رؤل الله الأتون ، إن الشماء أث و خق لها أن تنط ما فيها موضع ازبع أصابع إلأ ومنت واضع جبهته ساجدا لله و الله لو تعلمون ما أغلم، لضحكتم قين و بگم كيرا ومامبالنساء على الفرات . و ترجم إلى المعدات تارون إلى الله ، قال أبو ذر ت

(حسن) رضى الله عنه والله لوددت ان گنت شجرة تغضد . رواه ابن ماجة (1)

हज़रत अबूज़र (रज़ि०) कहते हैं रसूले अकरम (सल्ल०) ने फ़रमाया “बेशक मैं वे चीजें देखता हूं जो तुम नहीं देखते और मैं वह कुछ सुनता हूं जो तुम नहीं सुनते। आसमान (अल्लाह के ख़ौफ़ से) चरचरा रहा है. और उसे चरचराना ही चाहिए। उस ज़ात की क़सम! जिसके हाथ में मेरी जान है आसमान में चार उंगली जगह (लगभग 3 इंच) ऐसी नहीं जहां कोई फ़रिश्ता अपनी पैशानी अल्लाह के सामने रखे सज्दा न कर रहा हो, अगर तुम वे बातें जान लेते जो मैं जानता हूं तो तुम हंसते कम और रोते ज़्यादा। बिस्तरों पर बीवियों से आराम हासिल न करते और अल्लाह की पनाह तलब करते हुए मैदानों की तरफ़ निकल जाते।” (हदीस के रावी) हज़रत अबूज़र (रज़ि०) कहते हैं, काश! मैं एक पेड़ होता जो काट दिया जाता। इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है। ___ मसला 71. क़ब्र से ज़्यादा घबराहट और सख्ती वाली और कोई जगह नहीं।

((ماران منظرا قط إلاوعن عثمان رضي الله عنه قال : قال رشول الله .

القبر الظع منه ) رواه التزيي

(or)

हज़रत उसमान (रज़ि०) कहते हैं कि रसूलुल्लाह (सल्ल०) ने फ़रमाया “मैंने क़ब्र से ज़्यादा सख्ती और घबराहट वाली जगह कोई नहीं देखी।” इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है।

  1. किताबुजुहद, बाब (2/3378)। 1. अबवाबुज़्जुहद, बाब माजा (2/1877)।

 

 

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