Etikaf Ke Masail

E tekf Ke Masail

الاعت كاف

ऐतिकाफ़ के मसाइल

मसला 132. ऐतिकाफ़ सुन्नते मोअक्किदा किफ़ाया है और उसकी अवधि दस दिन है।

मसला 133. हर मुसलमान को रमज़ानुल मुबारक में कम से कम एक बार कुरआन पाक की तिलावत मुकम्मल करनी चाहिए।

हज़रत अबू हुरैरह रज़ि० फ़रमाते हैं नबी अकरम सल्ल० के सामने हर साल (रमज़ान में) एक बार कुरआन पढ़ा जाता। जिस साल आप सल्ल० ने वफ़ात पाई उस साल आप सल्ल० के सामने दोबारा क़ुरआन मजीद ख़त्म किया गया। इसी तरह हर साल आप दस दिन का ऐतिकाफ़ फ़रमाते लेकिन वफ़ात के साल आप सल्ल० ने बीस दिन का ऐतिकाफ़ फ़रमाया । इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।’

मसला 134. ऐतिकाफ़ के लिए फ़ज्र की नमाज़ के बाद ऐतिकाफ़ की जगह बैठना मसनून है।

हज़रत आइशा रज़ि० फ़रमाती हैं कि “रसूलुल्लाह सल्ल० जब ऐतिकाफ़ में बैठने का इरादा फ़रमाते तो फ़ज्र की नमाज़ पढ़कर मौतकिफ़ में दाख़िल होते।” इसे अबू दाऊद और इब्ने माजा ने रिवायत किया है।

  1. मिश्कातुल मसाबीह, लिल अलबानी, भाग 1, हदीस 2099।।
  2. सहीह सुनन अबी दाऊद, लिल अलंबानी, भाग 1, हदीस 2152।

मसला 135. ऐतिकाफ़ करने वाले की पत्नी मुलाक़ात के लिए आ सकती है और ऐतिकाफ़ करने वाला पत्नी को घर तक छोड़ने के लिए मस्जिद से बाहर जा सकता है।

हज़रत सफ़िया रज़ि० फ़रमाती हैं रसूलुल्लाह सल्ल० ऐतिकाफ़ में थे, मैं रात को नबी अकरम सल्ल० से मिलने आई और बातें करती रही, वापस जाने के लिए उठी तो नबी अकरम सल्ल० मुझे छोड़ने के लिए उठकर खड़े हो गए। इसे बुख़ारी और मुस्लिम ने रिवायत किया है।’

मसला 136. मर्दो को ऐतिकाफ़ मस्जिद में ही करना चाहिए। मसला 137. रमज़ान में ऐतिकाफ़ के लिए रोज़ा रखना ज़रूरी है।

मसला 138. हालते ऐतिकाफ़ में बीमार का हाल पूछने के लिए जाना, जनाज़े में शरीक होना, पत्नी से संभोग करना, बशरी तक़ाज़ों के बिना ऐतिकाफ़ की जगह से बाहर जाना मना है।

। हज़रत आइशा रज़ि० फ़रमाती हैं “ऐतिकाफ़ करने वाले के लिए सुन्नत यह है कि वह बीमार का हाल पूछने को न जाए, जनाज़े में शरीक न हो, पत्नी को न छुए और न उससे संभोग करे, ऐतिकाफ़ की जगह से ऐसे ज़रूरी काम (अर्थात पेशाब पाख़ाना, फ़र्ज़ गुस्ल आदि) के बिना न निकले, जिसके बिना चारा ही न हो, ऐतिकाफ़ रोज़े के साथ ही होता है और जामा मस्जिद में होता है। इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है।

मसला 139. औरतों को भी ऐतिकाफ़ करना चाहिए।

  1. मंतक़ी अख़बार, भाग 1, हदीस 2280।
  2. सहीह सुनन अबी दाऊद, लिल अलबानी, भाग 1, हदीस 2160 ।

हज़रत आइशा रज़ि० से रिवायत है कि नबी अकरम राल्ल० रमज़ानुल मुबारक का आख़िरी अशरा (21 से 30 रमज़ानुल मुबारक) ऐतिकाफ़ फ़रमाया करते थे यहां तक कि आप सल्ल० ने वफ़ात पाई, आपके बाद आपकी पाक पत्नियां रज़ि० ने ऐतिकाफ़ किया। इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।

मसला 140. औरतों को ऐतिकाफ़ अपने घर में करना चाहिए।

हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ि० कहते हैं रसूलुल्लाह सल्ल० ने फ़रमाया “औरतों को मस्जिद में जाने से मना करो लेकिन (नमाज़ पढ़ने के लिए) उनके घर मस्जिद से बेहतर हैं। इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया

मसला 140-1. अगर किसी को ऐतिकाफ़ के लिए दस दिन न मिल सकें तो जितने दिन मिलें उतने दिनों का ही ऐतिकाफ़ कर लेना चाहिए। यहां तक कि एक रात का ऐतिकाफ़ भी सही है।

हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ि० से रिवायत है कि हज़रत उमर रज़ि० ने नबी अकरम सल्ल० से पूछा ‘‘मैंने ज़माना जाहिलियत में मस्जिदे हराम में एक रात का ऐतिकाफ़ करने की नज़र मानी थी (पूरी करू या न करू?)” आप सल्ल० ने फ़रमाया “अपनी नज़र पूरी कर।” इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।

  1. मुख़्तसर सहीह मुस्लिम, लिल अलबानी, हदीस 633।।
  2. सहीह सुनन अबी दाऊद, लिल अलबानी, भाग 1, हदीस 530।।
  3. किताबुस्सोम अध्याय ऐतिकाफ़।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *