Kabeera Gunahun Par Azabe Qabr Hota he

وجب الكبائر عذاب القبر

कबीरा गुनाहों पर अज़ाबे क़ब्र होता है

मसला 72. रसूले अकरम (सल्ल०) ने पेशाब की छींटों से न बचने पर अज़ाबे क़ब्र की ख़बर दी है।

मसला 73. ग़ीबत (पीठ पीछे बुराई करना) करने वालों को भी कब्र में अज़ाब होता है।

على بري فقال (( إنهما ليبان عن ابن عباس رضي الله عنهما مر النبي وما يعذبان وما يقتان في كبير)) ثم قال ((بلی أما أحدهما فكان يغي باليمة وانا الأخر فكان لأيسر من بوله )) رواه البخاري

हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ि०) से रिवायत है कि नबी अकरम , (सल्ल०) दो क़ब्रों से गुज़रे आप (सल्ल०) ने फ़रमाया “ इन दोनों को (क़ब्रों में) अज़ाब हो रहा है और किसी बड़ी बात पर नहीं।” फिर फ़रमाया “इनमें से एक चुग़ली खाता था और दूसरा अपने पेशाब से एहतियात नहीं करता था।” इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।’

स्पष्टीकरण : “किसी बड़ी बात पर अज़ाब नहीं हो रहा” इसका मतलब यह है कि किसी मुश्किल या नाक़ाबिले अमल बात पर अज़ाब नहीं हो रहा बल्कि अगर ये दोनों इन कामों से बचना चाहते तो बचना बहुत आसान था।

  1. किताबुल जनाइज़, बाब अज़ाबे क़ब्र मिनल ग़ीबत वल बोल।

ملك القبر …………. منگر و نكير

क़ब्र के फ़रिश्ते…..कर और नकीर

मसला 74. क़ब्र में दफ़न करने के बाद मय्यित के पास सवाल व जवाब के लिए दो फ़रिश्ते आते हैं जिनका रंग काला सियाह और आंखें नीली होती हैं उन्हें मुंकर और नकीर कहा जाता है।

(( إذا قبر الميت (أو قال عن أبي هريرة رضي الله عنه قال : قال رؤل الله أحدكم أتاه ملكان أسودان أزرقان يقال لأحدهما المنكر و الأخ الكير فيقولان ما گنت تقول في هذا الرجل ؟)) رواه الترمذی (1)

‘(or) ___हज़रत अबू हुरैरह (रज़ि०) कहते हैं रसूलुल्लाह (सल्ल०) ने फ़रमाया “जब मय्यित दफ़नाई जाती है (या आप सल्ल० ने फ़रमाया तुममें से किसी एक की मय्यित दफ़नाई जाती है, तो उसके पास दो सियाह रंग के, नीली आंखों वाले फ़रिश्त आते हैं उनमें से एक को “मुंकर” और दूसरे को “नकीर” कहा जाता है वे दोनों मय्यित से पूछते हैं “तुम इस व्यक्ति (अर्थात हज़रत मुहम्मद सल्ल०) के बारे में क्या कहते थे?” इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है।

मसला 75. मुंकर और नकीर की आंखें तांबे के देगचे के बराबर बड़ी बड़ी, दांत गाय के सींग के बराबर और आवाज़ बिजली की तरह गरजदार होगी।

فلما فرغ منهذا جنازة مع نبي الله عن أبي هريرة رضي الله عنه قال

(رائم الان يسمع خفق يعالكم ، أنا منگژو فيها ، وانفرد الأم ، قال نبي الله نيز اغيهما مثل دور الخام ، و أنيابها فل ضياصی البقر ، وأضوائهما مثل الزغبي

  1. अबवाबुल जनाइज़, बाब माजा, अज़ाबिल क़ब्र (1/856)।

(حسن)

فيجلسانه سالانه ما كان يعبد ومن كان تبنية ؟)) رواه الطبرانی (1)

___ हज़रत अबू हुरैरह (रज़ि०) कहते हैं एक जनाज़े में हम नबी अकरम (सल्ल.) के साथ थे जब हम उसकी तदफ़ीन से फ़ारिग़ हुए और लोग वापस जाने लगे तो आप (सल्ल०) ने इरशाद फ़रमाया “अब यह (तुम्हारे वापस पलटने पर) तुम्हारे जूतों की आवाज़ सुनेगा उसके पास मुंकर और नकीर

आए हैं जिनकी आंखें तांबे के देगचे के बराबर हैं, दांत गाय के सींग की तरह हैं और उनकी आवाज़ बिजली की तरह गरजदार है। वे दोनों उसको बिठाएंगे और पूछेगे, किसकी इबादत करते थे और तुम्हारा नबी कौन था?” इसे तबरानी ने रिवायत किया है।’ ___मसला 76. मुंकर और नकीर अपने दांतों से ज़मीन उखेड़ते आते हैं, उनकी आवाज़ में गरजने वाले बादलों जैसी कड़क और आंखों में चुंधिया देने वाली चमक होती है।

قال في ذكر المؤمن (( قيد إلى مضجيه فياييه منگر و عن البراء عن النبي تير بنيران الأزض بانیابهما و ينجفان الأزض بأشعارهما خلانيه ثم قال له يا هذا من ربك ؟)) وقال في ذكر الكافي (( قيايي منكر و نكز بنيران الازه بانی بهناز ينقان الأزض بشقاهما ، أضوائهما كالوغد القاصف و أبصارهما كالبرق الخاطف

(حسن) فيجيايه ثم قال له يا هذا من ربک؟ )) رواه أحمد والبيهقي (2)

हज़रत बराअ (रजि०) रिवायत करते हैं कि नबी अकरम (सल्ल०) ने मोमिन आदमी (की मौत का) उल्लेख करते हुए फ़रमाया “फिर उसे उसकी जगह (अर्थात क़ब्र) में लौटाया जाता है तो उसके पास मुंकर और नकीर आते हैं अपने दांतों से ज़मीन उखेड़ते हुए, अपने बालों से ज़मीन रौंदते हुए और मोमिन आदमी को बिठा देते हैं और उससे पूछते हैं ऐ फ़लां तुम्हारा रब कौन है?” और काफ़िर का उल्लेख करते हुए आप (सल्ल०) ने इरशाद

  1. अत्तर्णीब वत्तीब, जिल्द 4, हदीस 5223,

फ़रमाया “मुंकर और नकीर उसके पास आते हैं, अपने दांतों से ज़मीन उखेड़ते हुए और अपने बड़े बड़े होंठों से ज़मीन रगेदते हुए, उनकी आवाज़ गरजते हुए बादलों की तरह होती है और उनकी आंखों में चुंधिया देने वाली चमक होती है वे काफ़िर को उठाकर बिठा देते हैं और उससे पूछते हैं ऐ फ़ला! बता तेरा रब कौन है?’ इसे अहमद और बैहेक़ी ने रिवायत किया है।

  1. अत्तर्णीब वत्तीब, जिल्द 4, हदीस 5221,

كيفية الميت في القبر عند الشوالي؟

क़ब्र में सवाल व जवाब के समय

___ मय्यित की हालत?

मसला 77. क़ब्र में दफ़न करने के बाद इंसान के शरीर में रूह डाली जाती है और सवालों का जवाब देने के लिए हर इंसान को अक़्ल और शऊर भी दिया जाता है।

 ذكر ان القبر فقال عن عبد الله بن عمر رضى الله عنهما أن رؤل اللهتک

(( نعم

؟ فقال ترشول الله عمرو اثر علينا قولنا یا زشؤل الله

: (حسن) اليوم) فقال عمر : بقيه الخجر )) رواه أحمد والطبرانی (1)

___ हज़रत अब्दुल्लाह बिन अम्र (रज़ि०) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह (सल्ल0) ने क़ब्र के फ़रिश्तों का उल्लेख फ़रमाया तो हज़रत उमर (रज़ि०) ने कहा “या रसूलल्लाह (सल्ल०)! क्या हमें हमारी यह समझ बूझ लौटा दी जाएगी?” आप (सल्ल०) ने इरशाद फ़रमाया “बिल्कुल ! आज जैसी ही सूझ बूझ (क़ब्र में) दी जाएगी।” हज़रत उमर (रज़ि०) ने कहा “फ़रिश्ते के मुंह में पत्थर” (अर्थात मैं उसको ख़ामोश कर दूंगा।) इसे अहमद व तबरानी ने रिवायत किया है।

بيشة الميت في قبره و سوال نگر عن عمر بن الخطاب رضي الله عنه لما أخبر النبى ونكير وهما مگان قال له يارسول الله * أيرجع إلى عقلي ؟ قال نعم )) قال إذا انیگما و الله ! لين سالانی سألهما فاقول لهما إن ربى الواؤمن بما انتما؟. رواه البيهقي 2

हज़रत उमर बिन ख़त्ताब (रजि०) से रिवायत है कि जब नबी अकरम (सल्ल0) ने सहाबा किराम (रज़ि०) को क़ब्र में आज़माए जाने और मुंकर

  1. अत्तीब वत्तहीब, जिल्द 4, हदीस 5223,

और नकीर के सवाल व जवाब के बारे में आगाह फ़रमाया तो उन्होंने पूछा “या रसूलल्लाह (सल्ल०)! क्या उस समय मुझे मेरी अक्ल लौटा दी जाएगी?” आप (सल्ल०) ने इरशाद फ़रमाया “हां!” हज़रत उमर (रजि०) ने कहा “फिर मैं दोनों फ़रिश्तों (मुंकर नकीर) के लिए काफ़ी हूंगा, वल्लाह! अगर उन फ़रिश्तों ने मुझसे पूछा (तुम्हारा रब कौन है?) मैं जवाब दूंगा, मेरा रब तो अल्लाह है तुम बताओ तुम दोनों का रब कौन है?” इसे बैहेक़ी ने रिवायत किया है।’

स्पष्टीकरण : सवाल व जवाब के समय इंसान को अक़्ल और सूझ-बूझ दी जाती है ताकि सोच समझ कर जवाब दे सके, लेकिन बरज़ख़ी ज़िंदगी बहरहाल दुनिया की ज़िंदगी से अलग है अतः इस कैफ़ियत को दुनिया की कैफ़ियत जैसा समझना सही नहीं होगा। इस हालत का ज्ञान अल्लाह के सिवा कोई नहीं जानता।

  1. तकिरा इमाम कुरतबी, बाब ज़िक्र हदीस बराअ।

انواع الثعم في القبر

क़ब्र में नेमतों की किस्में मसला 78. मोमिन आदमी को क़ब्र में निम्न दस नेमतें या उनमें से कुछ नेमतें प्राप्त होती हैं। __ 1. क़ब्र में इत्मीनान और बेख़ौफ़ी की हालत। .

  1. जहन्नम से बचने की ख़ुशख़बरी।
  2. जन्नत की खुशखबरी और जन्नत में अपनी नेमतों भरी आरामगाह का दिलकश नज़ारा। ___ 4. जन्नत की नेमतों से फ़ायदा उठाने के लिए जन्नत की तरफ़ एक दरवाज़ा।
  3. जन्नत के बिस्तर और जन्नत के लिबास। 6. सत्तर दर सत्तर हाथ (35×35 मीटर) क़ब्र की फ़राखी।
  4. क़ब्र में चौधवीं के चांद जैसी रौशनी के साथ हरे-भरे बाग़ का नाज़ारा।
  5. क़ब्र की तंहाई दूर करने के लिए सद कर्मों की खूबसूरत इंसानी शक्ल में रिफ़ाक़त (साथ)।
  6. क़यामत के दिन ईमान पर उठने की शुभ सूचना। 10. सुकून और आराम की नींद क़यामत तक।

मसला 79. मोमिन आदमी अपनी क़ब्र में किसी घबराहट और परेशानी के बिना उठकर बैठ जाता है।

मसला 80. सवाल जवाब में कामयाब होने के बाद मोमिन आदमी को जहन्नम दिखाई जाती है और उससे बचने की खुशखबरी दी जाती है।

मसला 81. जन्नत की तरफ़ सुराख करके मोमिन आदमी को जन्नत की नेमतों का नज़ारा करवाया जाता है और उसे उसका महल भी दिखाया जाता है।

मसला 82. मोमिन को क़यामत के दिन ईमान की हालत पर उठने की ख़ुशख़बरी दी जाती है।

عن عائشة رضي الله عنها قالت : جاء يهودية استطعمت على بابي فقال : اطعموني أعاكم الله من فتنة الدجال ومن فتنة عذاب القبر قال : قلم ازل أخبها

حتى جاء شول الله فقلت : يا رسول الله ! ما تقول هذه اليهودية ؟ قال ((وما تقول؟ )) قلت : تقول أعاكم الله من فتنة الأجال ، ومن فتنة عذاب القبر ، قالث

عائشة ، فقام شول الله و رفع يديه ما يستوي بالله من فتنة الأجا و من فتنة عذاب القبر ، ثم قال (( أما فيتن الأجالي فإنه لم يكن بين الأخر أمه و أخذكم بحيث لم يخزه نبئ ته انه اغوز ، و إن الله ليس بأغوير ، مكتوب بين عينيه كافر يفتره گل مؤمن ، فاما فتنة القبرقبتي يفتنون و عني يسالون ، فإذا كان الجل الصالح أجلس في قبره غير فزع و لا تشوف ، ثم قال له : ما كنت تقول في الإسلام؟ يقول : الله ربي ، فقال : ما هذا الرجل الذي كان فيكم ؟ يقول محمد تنول الله

جاء بالبينات من عند الله فضفناه فيفرج له فزجة قبل النار ، فينظر اليها خطة بعضها بعضا، فيقال له : انظر إلى ما قال الله ، ثه نفرج الله فرجة الى الجنة فينظر الى زغرتها و ما فيها ، فيقال له : هذا مقعدك منها ويقال : على اليقين کنت ، و عليه مث ، وعليه تبع ان شاء الله . )) رواه أحمد (1)

وصحيح)

हज़रत आइशा (रज़ि०) कहती हैं कि एक यहूदी औरत मेरे घर खाना मांगने आई और कहने लगी “अल्लाह तुझे फ़ितना दज्जाल और फ़ितना क़ब्र से पनाह दे मुझे खाना खिलाओ।” हज़रत आइशा (रज़ि०) कहती हैं, मैंने उसे रोक लिया यहां तक कि रसूले अकरम (सल्ल.) तशरीफ़ ले आए। मैंने कहा “या रसूलल्लाह (सल्ल०)! यह यहूदी औरत क्या कह रही है?”

आप (सल्ल०) ने पूछा “क्या कहती है?” मैंने कहा “यह कहती है अल्लाह तुझे फ़ितना दज्जाल और फ़ितना क़ब्र से पनाह दे।” हज़रत आइशा

लिए और फ़ितना दज्जाल और फ़ितना क़ब्र से पनाह मांगने लगे, फिर फ़रमाया “कोई नबी ऐसा नहीं गुज़रा जिसने अपनी उम्मत को फ़ितना दज्जाल से न डराया हो, लेकिन मैं तुम्हें दज्जाल के बारे में ऐसी ख़बर देता हूं जो उससे पहले किसी नबी ने अपनी उम्मत को नहीं दी, वह यह कि दज्जाल काना होगा। (अर्थात उसकी एक आंख होगी) उसकी दोनों आंखों के बीच काफ़िर लिखा होगा जिसे मोमिन पढ़ लेगा। जहां तक फ़ितना क़ब्र का संबंध है तुम लोग क़ब्रों में आज़माए जाओगे और क़ब्रों में सवाल किए जाओगे अगर आदमी नेक हो तो उसे अपनी क़ब्र में बिना किसी घबराहट

और परेशानी के बिठाया जाता है और उससे पूछा जाता है तू इस्लाम के बारे में क्या जानता है? नेक आदमी कहता है “मेरा रब अल्लाह है।’ फिर उससे पूछा जाता है जो साहब तुम्हारे बीच आए थे वे कौन थे? नेक आदमी कहता है “हज़रत मुहम्मद (सल्ल०) अल्लाह तआला की स्पष्ट निशानियां लेकर आए और हमने उनकी पुष्टि की। अतएव जहन्नम की तरफ़ एक सुराख किया जाता है और मोमिन आदमी नज़ारा करता है कि जहन्नम की आग (इतनी सख़्त है कि) उसका एक हिस्सा दूसरे को बर्बाद कर रहा है फ़रिश्ते उसे बताते हैं देख, यह है वह आग जिससे अल्लाह ने तुझे बचा लिया है। फिर जन्नत की तरफ़ उसके लिए एक सुराख़ किया जाता है और मोमिन आदमी जन्नत की रौनकें और बहारें देखता है। उसे बताया जाता है जन्नत में यह है तुम्हारा निवास स्थान। फिर फ़रिश्ते कहते हैं तूने ईमान पर जिंदगी गुज़ारी। ईमान पर मरा और (क़यामत के दिन) इंशाअल्लाह इसी ईमान पर उठेगा।” इसे अहमद ने रिवायत किया है।’ ____ मसला 83. मोमिन आदमी को जहन्नम में उसका घर दिखाया जाता है और कहा जाता है कि अल्लाह तआला ने तुझे इस घर से बचा लिया है फिर जन्नत में उसे उसका घर दिखाया जाता है और बताया जाता है कि अल्लाह तआला ने तुझे यह घर अता फ़रमाया है।

मसला 84. मोमिन आदमी अपने नेक अंजाम की ख़बर अपने घर

  1. अत्तर्णीब वत्तहीब, जिल्द 4, हदीस 5220,

वालों को देना चाहता है लेकिन उसे उसकी इजाजत नहीं दी जाती।

قال (( إن المؤمن إذا وضع عن أنس بن مالك رضي الله عنه أن رسول الله

يقول له ما كنت تحب؟ فإن الله تعالی هداة قال : كنت أغبداللة ، في قبره أتاه ملك يقال : ما كنت تقول في هذا الرجل ؟ فيقول : هو عبدالله و زشؤله ، فما يسأل عن شن و غيرها بغذها ، فينطلق به إلى بيت كان له في النار ، يقال له : هذا بينک کان لك في النار، ولكن الله عصمک و رحمک فاندلك به بيتا في الجنة فيراه فقول

(en) (1)5ysioljja.ki.jagiri

हज़रत अनस बिन मालिक (रज़ि०) से रिवायत है कि रसूले अकरम (सल्ल०) ने फ़रमाया “जब मोमिन आदमी को क़ब्र में दफ़न किया जाता है तो उसके पास एक फ़रिश्ता आता है जो उससे पूछता है “तू किसकी इबादत करता था?” अगर अल्लाह उसे हिदायत दे तो वह कहता है मैं अल्लाह की इबादत करता था। फिर फ़रिश्ता उससे पूछता है “इस आदमी (हज़रत मुहम्मद (सल्ल.) के बारे में तू क्या कहता था?” मोमिन आदमी जवाब देता है “वे अल्लाह के बन्दे और उसके रसूल हैं।” उसके बाद उससे कोई और बात नहीं पूछी जाती। फिर उसे जहन्नम में एक घर दिखाया जाता है और उसे बताया जाता है कि यह तुम्हारे लिए था लेकिन अल्लाह ने तुझे इससे बचा लिया है और इसके बदले में तुझे जन्नत में एक घर प्रदान किया है जिसे मोमिन आदमी देखता है और कहता है कि ज़रा मुझे छोड़ो मैं अपने घर वालों को ख़ुशखबरी दे दूं (कि अल्लाह तआला ने मुझे जन्नत में घर प्रदान किया है, लेकिन ने कहा जाता है “अब यहीं ठहरो।” इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है।’

स्पष्टीकरण : इस हदीस में एक फ़रिश्ते के क़ब्र में आने का उल्लेख है जबकि दूसरी हदीस में दो फ़रिश्तों का उल्लेख है इसका मतलब यह है कि कुछ लोगों के पा दो फ़रिश्ते आते हैं कुछ के पास एक फ़रिश्ता आता

___ 1. किताबुस्सुन्न. (3/3977)।है। (2) आप (सल्ल.) का इरशाद मुबारक है “हर आदमी के दो मक़ाम हैं एक जन्नत में एक जहन्नम में, जब कोई व्यक्ति मरने के बाद जहन्नम में चला जाता है तो जन्नती उसकी जगह के वारिस बन जाते हैं। (इब्ने माजा) (3) रसूले अकरम (सल्ल.) के बारे में किए गए सवाल के शब्द मुख्तलिफ़ अहादीस में मुख़्तलिफ़ हैं। कुछ शब्दों से यह गुमान होता है कि शायद क़ब्र में आप (सल्ल0) की शक्ल मुबारक दिखाकर सवाल किया जाता है हालांकि ऐसा नहीं है। यह बिल्कुल ऐसा ही है जैसा किसी ग़ायब (अप्रकट) आदमी के बारे में कोई सवाल करे कि “फलां आदमी कौन है?’

मसला 85. नमाज़ी आदमी पर क़ब्र में मामूली सा डर या घबराहट भी

नहीं होती।

मसला 86. मोमिन आदमी को सवाल व जवाब में कामयाबी के बाद जन्नत की दूसरे नेमतों के अलावा उसके रहने की जगह का नज़ारा भी करवाया जाता है।

मसला 87. कुछ अहले ईमान की क़ब्रे सत्तर हाथ (35 मीटर) खोल दी जाती हैं।

मसला 88. अहले ईमान की क़बें रौशन कर दी जाती हैं। .

मसला 89. अहले ईमान को सारी नेमतें और बशारतें देने के बाद – आराम व सुकून की नींद सुला दिया जाता है।

मसला 90. कुछ अहले ईमान की रूहें परिन्दों की शक्ल में जन्नत के पेड़ों पर चहचहाती फिरती हैं।

عن أبي هريرة رضي الله عنه عن النبي و قال (( إن الميت إذا وضع في قبره انه

فيجل قد مثلث يسمع خفق يغالهم حين يولون مذبرين فإن كان مؤمنا يقال له اخلي

هذا الذي كان قبلكم ما تقول ، وقد أذنيث بلغروب ، فيقال له ازانتك له الشم

تفعل ، أخبرنا فيه؟ و ما ذا تشهد عليه؟ فيقول : ذغونی حتی أضلی ، فيقولون : إنك غانممالک عنه : آزات هذا الرجل الذي كان قبلكم ما ذا تقول فيه ؟ و ماذا

، و انه جاء بالخق من عند تشهد عليه ؛ قال : فيقول: مخمد ، اشهد الله رسول الله

، و على ذلك يرث، و على ذلك تبك ان شاء الله ، الله ، فقال له على ذلك ځي

منها ، وما أعد الله لك فيها ثم يفتح له باب من أبواب الجنة فيقال له : هذا مقعد يزداد غبطة ومرورا ، ثم يفتح له باب من أبواب النار، فيقال له : هذا مقعدك منها و ما أغذ الله لك فيها لؤ عصيته ، فيزداد غبطة و روزا ، ثم يفسح له في قبره سبعون ذراعا، وينؤ له فيه ، و يعاد الجسد لما بيرى منه ، فتجعل نسمه في الييم الطيب ، وهي طير تغلق في شجر الجنة فذلك قوله سبحانه وينب الله الذين آمنوا بالقول الثابت في الحياة الدنيا و في الأجرة رالاية … ابراهيم : 27) * رواه الطبرانی و ابن بان و الحاكم (1)

( -)

हज़रत अबू हुरैरह (रज़ि०) से रिवायत है कि नबी अकरम (सल्ल०) ने फ़रमाया “मय्यित जब क़ब्र में दफ़न की जाती है तो वह वारिसीन के (वापस लौटते समय) जूतों की आवाज़ सुनती है अगर मय्यित मोमिन हो तो उसे (क़ब्र में) कहा जाता है “बैठ जाओ।” वह बैठ जाता है और उसे सूरज अस्त होता दिखाया जाता है और पूछा जाता है कि वह व्यक्ति जो बहुत पहले तुम्हारे यहां नबी बनाकर भेजे गए उनके बारे में तुम क्या कहते थे और तुम उनके बारे में क्या गवाही देते हो?” मोमिन आदमी कहता है “ज़रा बैठो मुझे नमाज़े अन अदा करने दो। (सूरज अस्त होने वाला है)।” फ़रिश्ते कहते हैं, बेशक तू (दुनिया में) नमाज़ पढ़ता रहा है हम जो बात पूछ रहे हैं उसका हमें जवाब दो, बताओ वह व्यक्ति जो बहुत पहले तुम्हारे बीच नबी बनाकर भेजे गए उनके बारे में तुम क्या कहते थे और क्या गवाही देते थे?” मोमिन आदमी कहता है “वे (हज़रत) मुहम्मद (सल्ल०) हैं, मैं गवाही देता हूं कि वह अल्लाह के रसूल हैं और अल्लाह की तरफ़ से हक़ लेकर आए हैं।” तब उसे कहा जाता है इसी अक़ीदे पर तू जिंदा रहा, इसी पर मरा और इंशाअल्लाह इसी अक़ीदे पर उठेगा। फिर जन्नत के दरवाज़ों में से एक दरवाज़ा उसके लिए खोल दिया जाता है और उसे बताया जाता है “जन्नत में यह तुम्हारा महल है और जो कुछ अल्लाह ने जन्नत में तुम्हारे लिए तैयार कर रखा है (वह भी देख लो यह सब कुछ देखकर) उसके शौक़ और लज़्ज़त  में इज़ाफ़ा हो जाता है। फिर उसकी क़ब्र सत्तर हाथ (अर्थात 105 फिट या 35 मीटर) फैला दी जाती है और उसे मुनव्वर (पुरनूर) कर दिया जाता है। उसके शरीर को पहले वाली हालत में लौटा दिया जाता है (अर्थात उसे सुला दिया जाता है) और उसकी रूह को पाकीज़ा और ख़ुश्बूदार बना दिया जाता है और यह परिन्दे की शक्ल में जन्नत के पेड़ों पर उड़ती फिरती है। (क़ब्र में मोमिन का नेक अंजाम) अल्लाह तआला के इस इरशाद की तफ़्सीर है “अल्लाह तआला अहले ईमान को कलिमा तय्यिबा की बरकत से दुनिया और आख़िरत की ज़िंदगी (अर्थात क़ब्र) में साबित क़दमी अता फ़रमाएगा।” इसे तबरानी, इब्ने हिबान और हाकिम ने रिवायत किया है।’ ___मसला 91. सवाल व जवाब में कामयाबी के बाद मोमिन आदमी के लिए क़ब्र में जन्नत का बिस्तर लाकर बिछाया जाता है और जन्नत का लिबास पहनाया जाता है।

मसला 92. जन्नत की नेमतों से मुस्तफ़ीद होने के लिए मोमिन आदमी की क़ब्र में जन्नत की तरफ़ एक दरवाज़ा खोल दिया जाता है।

मसला 93. कुछ अहले ईमान की क़ब्रे हदे निगाह तक खोल दी जाती

_____ मसला 94. मोमिन आदमी की क़ब्र में उसके सद कर्म इंतिहाई खूबसूरत आदमी की शक्ल में आते हैं जिसे देखकर मोमिन आदमी की मसर्रत और खुशी में बहुत अधिक वृद्धि हो जाती है।

मसला 95. मोमिन आदमी अपना नेक अंजाम देखकर इतना खुश होता है कि क़यामत के जल्द क़ायम होने की दुआ करने लगता है। __ मसला 96. मोमिन आदमी अपने नेक अंजाम की खुशी में जल्द से जल्द अपने परिवार से मिलने की इच्छा करता है।

عن البراء بن عازب رضی الله عنه قال : قال رسول الله * (( إن العبد المؤمن وټانو مگان فيجلسانه فيقولان له: من ربك ؟ فيقول : ربى الله ، فيقولان له: ما بینک ؟ فيقول : بنى الإسلام، فيقولان له ما هذا الرجل الذي بيت فيكم ؟ فقول هو

  1. अत्तर्णीब वत्तींब, जिल्द 4, हदीस 5225,

رسول الله و يقولان : وما يدرنگ ؟ فيقول : قرأت كتاب اللوقا من به و صفت

قيادى مناد من السماء : أن قد صدق عندى أفرشوة من الجنة والبؤة من الجنة والتوا له بابا إلى الجنة ) قال : ((فياييه من روحها و طيبها ، و يفتح له فيها قبره مد بقره) ، قال : (( و ياييه رجل حسن الوجه، خسن الثياب ، طيب الريح، فيقول : ابز بالذي يژک، هذا يومك الذي كنت توعد، فيقول : من أنت ؟ قوجهک الوجه الخس يجي بالخير؟ فيقول : أنا عملك الصالح ، فيقول : رب أقم الساعة، رب

(حسن) ام الشاقة ، حتى ارجع إلى آهلی و مالی.)) رواه أحمد و ابوداؤد (1)

हज़रत बराअ बिन आज़िब (रज़ि०) कहते हैं कि रसूले अकरम (सल्ल०) ने फ़रमाया “मोमिन बन्दे की क़ब्र में दो फ़रिश्ते आते हैं जो उसे उठाकर बिठा देते हैं और पूछते हैं “तेरा रब कौन है?” मोमिन आदमी कहता है “मेरा रब अल्लाह है।’ फ़रिश्ते पूछते हैं “तेरा दीन (धर्म) कौन सा है?” मोमिन आदमी कहता है “मेरा दीन इस्लाम है।’ फिर वे पूछते हैं “वह व्यक्ति जो तुम्हारे बीच भेजा गया कौन था?” मोमिन आदमी कहता है वे अल्लाह के रसूल थे।” फिर फ़रिश्ते पूछते हैं “तुझे ये बातें कैसे मालूम हुईं?’ मोमिन आदमी कहता है “मैंने अल्लाह की किताब पढ़ी उस पर ईमान लाया और उसकी पुष्टि की।” आसमान से एक मुनादी पुकारता है “मेरे बन्दे ने सच कहा उसके लिए जन्नत से बिस्तर ले आओ, जन्नत से लिबास ले आओ, जन्नत की तरफ़ एक दरवाज़ा खोल दो जहां से जन्नत की हवा और ख़ुश्बू उसे आती रहे, उसकी क़ब्र हद निगाह तक खोल दी जाती है। आप (सल्ल०) ने फ़रमाया “फिर उसके पास एक खूबसूरत चेहरे वाला आदमी आता है खूबसूरत कपड़े पहने हुए, बेहतरीन ख़ुश्बू लगाए हुए

और कहता है तुझे आराम और राहत की खुशखबरी हो यही वह दिन है जिसका तुझसे वायदा किया गया था। मोमिन आदमी पूछता है “तू कौन है? तेरा चेहरा कितना खूबसूरत है तू खैर व बरकत लेकर आया है” वह कहता है “मैं तेरा नेक अमल हूं।” तब मोमिन आदमी दुआ करता है “या रब! क़यामत क़ायम फ़रमा, ऐ मेरे रब ! क़यामत जल्द क़ायम फ़रमा, यहां तक कि मैं अपने घर वालों से मिलूं।” इसे अहमद और अबू दाऊद ने रिवायत किया

स्पष्टीकरण : इस हदीस में रसूले अकरम (सल्ल0) का इरशाद . मुबारक है कि कब्र ह्रद निकाह तक खोल दी जाती है जबकि दूसरी हदीस में सत्तर दर सत्तर हाथ (अर्थात 35X35 मीटर) खोलने की खबर दी है। एक हदीस में सिर्फ सत्तर हाथ लम्बी, और दूसरी जगह चालीस दर चालीस हाथ (अर्थात 20×20 मीटर) खोलने की खबर दी गई है। यह फ़र्क अहले ईमान के ईमान व सद कर्म की कसरत (अधिकता) और क़िल्लत (कमी) की वजह से होगा। …

. मसला 97. कुछ अहले ईमान की क़ब्रे सत्तर दर सत्तर हाथ खोल दी जाती हैं। –

मसला 98. अहले ईमान की क़ब्रों को नूर से भर दिया जाता है।

मसला 99. मोमिन आदमी अपने नेक अंजाम से अपने घर वालों को सूचित करना चाहता है लेकिन उसे इजाजत नहीं दी जाती।

मसला 100. मोमिन आदमी को बड़े अदब व एहतिराम से क़यामत तक आराम व सुकून की नींद सोने की हिदायत की जाती है जिससे वह क़यामत के दिन उठेगा।

मसला 101. सवाल व जवाब में नाकामी के बाद कपटी आदमी को कब्र की दीवारें शिकंजे की तरह जकड़ लेती हैं।

मसला 102. कपटी आदमी क़यामत तक निरंतर इसी अज़ाब का शिकार रहता है।

……. او عن أبي هريرة رضي الله عنه قال : قال رسول الله * (( إذا قبر الن قال أحدكم …… به ملكان أسودان ازرقان يقال لاخيهما : المنكر و الاخر النير، يقولان : ما كنت تقول في هذه الأجل ؟ فتقول ما كان يقول: هو عبد الله و رسوله أشهد أن لا إله إلا الله ، و أن محمدا عبده و رسوله ، فيقولان : قد كنا نعلم انك تقول

  1. अत्तर्णीब बत्तींब, जिल्द 4, हदीस 5221,

نذا. ثم يفسح له پی بره سبعون فيراغا لى سبعين ، ثم ينور له فيه ، ثم قال له : م. يقول : أرجع إلى أغلى فاخبرم؟ فيقولان : تم کومة العروس الذي لا يوقظه ولا أحب افله إليه، خشی به الله من تضجيه ذلك و إن كان منافقا قال : سمع الناس يقولون نزلا قالت له لا أذری . فيقولان : قد كنا نعلم انک تقول ذلك . فيقال يتزض التي عليه. فتلتم عليه ، فتختلف أضلاعه ، فلا يزال فيها معا حتى يبته الله ين

(or)

(Sriniji(Kisaki ___ हज़रत अबू हुरैरह (रजि०) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह (सल्ल०) ने फ़रमाया “जब मय्यित दफ़न की जाती है या आप (सल्ल०) ने फ़रमाया कि जब तुममें से कोई एक दफ़न किया जाता है तो उसके पास दो सियाह रंग के केरी (नीलगों) आंखों वाले फ़रिश्ते आते हैं जिनमें एक को “मुंकर” कहा जाता है और दूसरे का नाम “नकीर” है। वे दोनों (मय्यित से) पूछते हैं “उस व्यक्ति (अर्थात हज़रत मुहम्मद सल्ल०) के बारे में तुम क्या कहते थे (जिन्हें तुम्हारे यहां भेजा गया)? मोमिन आदमी वही जवाब देता है जो कुछ वह दुनिया में (हज़रत मुहम्मद सल्ल० के बारे में) कहता था अर्थात वह अल्लाह के बन्दे और उसके रसूल हैं (अतएव मोमिन कहता है) मैं गवाही देता हूं अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं और मुहम्मद (सल्ल.) अल्लाह के बन्दे और उसके रसूल हैं। दोनों फ़रिश्ते कहते हैं “हमें मालूम था तुम यही जवाब दोगे।” फिर उसकी क़ब्र सत्तर दर सत्तर हाथ (35X35 मीटर) खोल दी जाती है। क़ब्र को रौशन कर दिया जाता है। फिर उससे कहा जाता है “सोजा’। आदमी कहता है “मैं अपने परिवार के पास वापस जाना चाहता हूं ताकि उन्हें (अपने नेक अंजाम की) ख़बर दूं। जवाब में फ़रिश्ते कहते हैं “(संभव नहीं अब) तुम दुल्हन की तरह सो जाओ।” जिसे उसके घर वालों में से सबसे ज़्यादा महबूब हस्ती अर्थात पति) के अलावा और कोई नहीं जगाता, (मोमिन सो जाता है) यहां तक कि (क़यामत के दिन) अल्लाह तआला उसे उसकी ख्वाबगाह से जगाएगा। अगर मरने वाला कपटी हो तो (फ़रिश्तों के सवाल के जवाब में) कहता है “मैंने लोगों को (हज़रत मुहम्मद सल्ल० के बारे में) कुछ कहते सुना था तो मैं भी वही कुछ कहता था, उससे ज़्यादा मुझे कुछ मालूम नहीं।” फ़रिश्ते कहते हैं “हमें मालूम था कि तू जवाब में यही कुछ कहेगा।’ फिर ज़मीन को (अल्लाह की तरफ़ से) हुक्म दिया जाता है “इसे जकड़ ले।” क़ब्र उसे जकड़ लेती है। कपटी की एक तरफ़ की पस्लियां दूसरी तरफ़ की पस्तियों में धंस जाती हैं और वह हमेशा इसी यातना का शिकार रहता है। यहां तक कि अल्लाह तआला उसे उसकी क़ब्र से उठा खड़ा करेगा।” इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है।’ ____ मसला 103. मोमिन आदमी को क़ब्र में किसी प्रकार की घबराहट या परेशानी नहीं होती।

मसला 104. मोमिन आदमी को क़ब्र में जहन्नम से बचने और जन्नत पाने की शुभ सूचना दी जाती है।

मसला 105. अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान के साथ जिंदगी बसर करने वालों को क़यामत के दिन इसी ईमान पर उठने की शुभ सूचना दी जाती है।

मसला 106. गुनाहगार आदमी को क़ब्र में बहुत ज़्यादा घबराहट और डर का शिकार होता है। ___ मसला 107. सवाल व जवाब में नाकामी के बाद गुनाहगार आदमी को जहन्नम में उसका ठिकाना दिखाया जाता है।

मसला 108. गुनाहगार आदमी को उसी शक की हालत में उठने की “शुभ सूचना” दी जाती है जिस पर उसने ज़िंदगी गुज़ारी की थी।

عن أبي هريرة رضي الله عنه قال ( إن الميت يصير إلى القبر قيل الرجل الصالح في ترم غير فزع ولا م ني ثم يقال له تم گنت ؟ قول : گنت في الإسلام . فقال له :ما

، جاءنا بالبينات من عند الله قضئقة . فقال له : ما الرجل ؟ فتقول : محمد رشول الله مل رایت الله ؟ فيقول : ما ينبغي لأحد أن يرى اللة : يفرج له فزجة قبل النار    بغضا. فقال له : أنظر إلى ما لا فينظر إليها يخطمالله ، ثم يفرج له فزجة بل الجنية ينظر إلى بنا

  1. अबवाबुल जनाइज़, बाब अज़ाबुल क़ब्र (1/856)।

زهرتها ومايها . قال له: هذا مفعدت ، ويقال له : على اليقيي كنت عليه مث و عليه بقك ، إن شاء الله و يخل الرجل الشوء في قبره فزعا مشوقا. قال له : يم نت ؟ فيقولالناس يقولون قولا قلته . فيفرج له قبل : لا آنړى، يقال له : ما هذا الؤجل؟ فيقول : سمع إلى زفرتها وما فيها فيقال له : أنظر إلى ما صرف الله نگم

يفرج له فزجة الجنة .قين قبل النار. فنظر إليها يخطم بعضها بعضا . فيقال له : هلا مقدك. على الشك گنت و غليه

(ivitijparin Librasily.. हज़रत अबू हुरैरह (रजि०) से रिवायत है कि नबी अकरम (सल्ल०) ने इरशाद फ़रमाया “जब मय्यित क़ब्र में दफ़न की जाती है तो नेक आदमी क़ब्र में किसी ख़ौफ़ और घबराहट के बिना उठकर बैठ जाता है। उससे पूछा जाता है “तू कौन से दीन पर था?” नेक (मोमिन) आदमी कहता है “मैं इस्लाम पर था।” फिर उससे पूछा जाता है “वह आदमी कौन था (जो तुम्हारे बीच भेजा गया)?” मोमिन आदमी कहता है “हज़रत मुहम्मद (सल्ल०), अल्लाह के रसूल थे वे अल्लाह की तरफ़ से हमारे पास उसका पैगाम लेकर आए और हमने उनकी पुष्टि की। फिर उससे पूछा जाता है “क्या तूने अल्लाह को देखा है?” वह कहता है “अल्लाह तआला को (दुनिया में) देखना किसी के लिए संभव नहीं।” अतएव उसके लिए आग की तरफ़ एक सुराख़ खोला जाता है और वह देखता है कि किस तरह आग का एक हिस्सा दूसरे को खा रहा है उसे बताया जाता है कि “देखो यह है वह आग जिससे अल्लाह तआला ने तुम्हें बचा लिया है।’ फिर जन्नत की. तरफ़ एक दरवाज़ा खोला जाता है और मोमिन आदमी जन्नत की बहारें और उसमें मौजूद नेमतें देखता है उसे बताया जाता है यह है तुम्हारा ठिकाना, तुमने (ईमान) पर ज़िंदगी गुज़ारी और उसी ईमान की हालत पर मरे और उसी ईमान की हालत पर इंशाअल्लाह उठाए जाओगे। गुनाहगार आदमी को कब्र में बिठाया जाता है तो वह बहुत घबराया हुआ और भयभीत होता है। उससे पूछा जाता है “तू किस धर्म पर था?” वह कहता है “मैं नहीं जानता।” फिर पूछा जाता है “वह आदमी कौन था?” (जो तुम्हारे बीच भेजा गया) वह कहता है “मैंने लोगों को जो कुछ कहते सुना वही मैं भी कहता था।” जन्नत की तरफ़ एक दरवाज़ा खोला जाता है और वह जन्नत की बहारों और उनमें मौजूद दूसरी नेमतों को देखता है तो उसे बताया जाता है कि यह है वह जन्नत जिससे अल्लाह तआला ने तुम्हें वंचित कर दिया है। फिर उसके लिए एक दरवाज़ा जहन्नम की तरफ़ खोला जाता है और वह देखता है किस तरह आग का एक हिस्सा दूसरे को खा रहा है। उसे बताया जाता है “यह है तुम्हारा ठिकाना।” तू (अल्लाह और रसूल सल्ल० के बारे में) शक में पड़ा रहा और शक की हालत में मरा और इंशाअल्लाह शक पर ही उठेगा।” इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है।

मसला 109. मोमिन की क़ब्र हरा-भरा व शादाब बाग़ होती है जिसमें चौधवीं रात के चांद जैसी मन मोहक रौशनी होती है।

स्पष्टीकरण : हदीस मसला 53 के अन्तर्गत देखें।

– 1. किताबुज्जुहद, बाब ज़िक्र क़ब्र वल बला (2/3443)।

 

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