lailatul qadr ki fazilat aur uske masail

Lailatul Qadar

فضل ليلة القدر

लैलतुल क़द्र की श्रेष्ठता और उसके मसाइल

मसला 141. लैलतुल क़द्र में उपासना विगत गुनाहों की मगफ़िरत का सबब है।

हज़रत अबू हुरैरह रज़ि० से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्ल० ने फ़रमाया ‘‘जिसने लैलतुल क़द्र में ईमान के साथ सवाब की नीयत से क़याम किया उसके पिछले तमाम गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं। इसे बुख़ारी और मुस्लिम ने रिवायत किया है।

मसला 142. लैलतुल क़द्र के सौभाग्य से महरूम रहने वाला बहुत ही बदनसीब है।

हज़रत अनस बिन मालिक रज़ि० से रिवायत है कि रमज़ान आया, तो रसूलुल्लाह सल्ल० ने फ़रमाया “यह जो महीना तुम पर आया है उसमें एक रात ऐसी है जो (क़द्र व मनज़िलत के हिसाब से) हज़ार महीनों से बेहतर है। जो व्यक्ति उस (का सौभाग्य हासिल करने) से महरूम रहा वह हर भलाई से महरूम रहा। और लैलतुल क़द्र के सौभाग्य से केवल भाग्यहीन ही महरूम किया जाता है। इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है।

मसला 143. लैलतुल क़द्र रमज़ान के आख़िरी अशरे की ताक़ रातों में

  1. सहीह बुख़ारी किताबुस्सोम अध्याय फ़ज़्ल लैलतुल क़द्र ।
  2. सहीह सुनन इब्ने माजा, लिल अलबानी, भाग 1, हदीस 1333।

तलाश करनी चाहिए।

हज़रत आइशा रज़ि० से रिवायत है रसूलुल्लाह सल्ल० ने फ़रमाया रमज़ान के आख़िरी अशरे (दस दिन) की ताक़ रातों में लैलतुल क़द्र की तलाश करो।” इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।’

मसला 144. रमज़ान के आख़िरी अशरे में बहुत ज्यादा इबादत करनी चाहिए।

मसला 145. रमज़ान के आख़िरी अशरे में अपने घर वालों को उपासना के लिए खुसूसी तग़ब दिलाना मसनून है।

हज़रत आइशा रज़ि० फ़रमाती हैं “रसूलुल्लाह सल्ल० रमज़ान के आख़िरी अशरे में बाक़ी दिनों की निस्बत उपासना में बहुत ज़्यादा कोशिश फ़रमाते थे।” इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है।

हज़रत आइशा रज़ि० फ़रमाती हैं “जब रमज़ान के आख़िरी दस दिन शुरू होते तो रसूलुल्लाह सल्ल० (उपासना के लिए) तैयार हो जाते । रातों को जागते और अपने घर वालों को भी जगाते।’ इसे बुख़ारी और मुस्लिम ने रिवायत किया है।

मसला 146. आख़िरी अशरे की तमाम रातों में जागने का समय न पाने वालों के लिए लैलतुल क़द्र का भरपूर सवाब हासिल करने के लिए दो अहम अहादीस।

  1. किताबुस्सोम अध्याय तहरी लैलतुल क़द्र।।
  2. सहीह सुनन इब्ने माजा, लिल अलबानी, भाग 1, हदीस 1429।
  3. लुअलुउ वेल मरजान, भाग 1, हदीस 730।

हज़रत अबूज़र रज़ि० कहते हैं रसूलुल्लाह सल्ल० ने फ़रमाया ‘जिसने (रमज़ान में) इमाम के वापस होने तक इमाम के साथ क़याम किया (अर्थात नमाज़ तरावीह जमाअत से अदा की) उसके लिए सारी रात क़याम का सवाब लिखा जाएगा। इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है।

हज़रत उसमान बिन अफ़्फ़ान रज़ि० कहते हैं मैंने रसूलुल्लाह सल्ल० को फ़रमाते हुए सुना है जिसने इशा की नमाज़ जमाअत से अदा की उसने मानो आधी रात क़याम किया और जिसने (नमाज़ इशा जमाअत से अदा करने के बाद) सुबह की नमाज़ जमाअत से अदा की उसने मानो सारी रात क़याम किया। इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।

| मसला 147. रमज़ानुल मुबारक में रसूलुल्लाह सल्ल० कसरत से तिलावत कुरआन और अल्लाह की राह में ख़र्च फ़रमाया करते थे।

हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ि० फ़रमाते हैं कि रसूलुल्लाह सल्ल० लोगों के साथ भलाई करने में बहुत दानी थे, लेकिन रमज़ान में जब जिब्रील अलैहि आपसे मिलते तो आप और भी ज़्यादा दानी हो जाते। रमज़ान में हज़रत जिब्रील अलैहि० हर रात आपसे मिला करते और नबी

  1. सहीह सुनन तिर्मिज़ी, लिल अलबानी भाग 1, हदीस 1646 ।
  2. मुख़्तसर सहीह मुस्लिम, लिल अलबानी हदीस 324 ।

अकरम सल्ल० रमज़ान गुज़रने तक उन्हें कुरआन मजीद सुनाते। जब जिब्रील अलैहि० आपसे मिलते तो आपकी दानवीरता तेज़ हवाओं से भी ज़्यादा बढ़ जाती।’ इसे बुख़ारी और मुस्लिम ने रिवायत किया है।’

मसला 148. लैलतुल क़द्र में यह दुआ पढ़नी मसनून है।

हज़रत आइशा रज़ि० से रिवायत है मैंने पूछा “या रसूलल्लाह सल्ल०! अगर मैं शबेक़द्र पा लू तो कौन सी दुआ पढू?” नबी अकरम सल्ल० ने फ़रमाया, कहो “या अल्लाह! तू माफ़ करने वाला है, माफ़ करना पसन्द करता है, अतः मुझे माफ़ फ़रमा।” इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। .

  1. सहीह बुख़ारी किताबुस्सोम।
  2. मिश्कातुल मसाबीह, लिल अलबानी, भाग 1, हदीस 2091।।

 

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