Maut Ki Tamanna Karna Mamnoo He

تمنى الموت ممنوع

मौत की तमन्ना करना मना है 5. मौत की इच्छा करना मना है।

لا يتمنين أحدكم الموت عن أبي هريرة رضي الله عنه قال : قال رشول الله إما خينا فلعله أن يزداد خيرا و إما مبينا فلعله أن يتغيب .)) رواه البخاري (1)

हज़रत अबू हुरैरह (रज़ि०) कहते हैं कि रसूलुल्लाह (सल्ल०) ने फ़रमाया “कोई व्यक्ति मौत की तमन्ना न करे अगर कोई नेक आदमी है तो अपनी नेकियों में वृद्धि करेगा और अगर गुनाहगार है तो संभव है अल्लाह तआला से माफ़ी मांग ले।” इसे बुखारी ने रिवायत किया है।’

मसला 6. शदीद तकलीफ़ में मौत की दुआ निम्न शब्दों में करनी चाहिए।

: (( لايتم أخدم الموت عن انس بن مالک رضی الله عنه قال : قال النبي من ضر أصابه فإن كان لا بد فاعلا فليقل : اللهم أحيني ما كانت الحياة خيزالی و توفني إذا كانت الوفاة خيرالی . )) رواه البخاری (2)

हज़रत अनस बिन मालिक (रज़ि०) से रिवायत है कि नबी अकरम (सल्ल०) ने फ़रमाया “तुममें से कोई भी आदमी तकलीफ़ या मुसीबत की वजह से मौत की आरजू न करे और अगर उसके बिना चाराकार न हो तो यूं कहना चाहिए “या अल्लाह! मुझे उस समय तक जिंदा रख जब तक मेरे ज़िंदा रहने में भलाई है और मुझे उस समय मौत दे जब मरने में मेरे लिए भलाई हो।” इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है। ___ मसला 7. शहादत के लिए दुआ करना जाइज़ है।

  1. मुख्तसर सहीह बुख़ारी लिल जुबेदी, हदीस 1960, 2. मुख़्तसर सहीह बुख़ारी लिल जुबेदी, हदीस 1958,

 

عن أبي هريرة رضي الله عنه قال : قال سمعت البي و قول ((والذي نفسی

اقتل ) ان اقتل في سبيل الله ثم أخي ثم أقتل ثم أخي ثم أقتل ثم أخي بيده لودذ رواه البخاری (1)

हज़रत अबू हुरैरह (रज़ि०) कहते हैं, मैंने रसूलुल्लाह (सल्ल०) को यह फ़रमाते हुए सुना है कि “उस ज़ात की क़सम जिसके हाथ में मेरी जान है मैं पसन्द करता हूं कि अल्लाह की राह में क़त्ल किया जाऊं फिर ज़िंदा किया जाऊं, फिर (अल्लाह की राह में) क़त्ल किया जाऊं फिर ज़िंदा किया जाऊं, फिर (अल्लाह की राह में) क़त्ल किया जाऊं फिर जिंदा किया जाऊं, फिर (अल्लाह की राह में) क़त्ल किया जाऊं।” इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।’ ___मसला 8. मौत को खैर व बरकत का ज़रिआ बनाने के लिए अल्लाह तआला से यह दुआ मांगनी चाहिए।

يقول (( اللهم أضيخ لی عن أبي هريرة رضي الله عنه قال : كان ممول الله ديني الذي هو عصمة أمري و أضيخ لی دنیای التي فيها معاشی و أضخ لئ آخرتی التي فيها مقادی و اجعل الحياة بريادة لي في كل خير واجعل الموت راحة لي من كل

हज़रत अबू हुरैरह (रज़ि०) कहते हैं कि रसूलुल्लाह (सल्ल०) यह दुआ मांगा करते थे “या अल्लाह! मेरे दीन की इस्लाह फ़रमा जो मेरे अंजाम का मुहाफ़िज़ है मेरी दुनिया की इस्लाह फ़रमा जिसमें मेरी रोज़ी है मेरी आख़िरत : की इस्लाह फ़रमा जहां मुझे (मरने के बाद) पलट कर जाना है मेरी ज़िंदगी को नेकियों में इज़ाफ़े का ज़रिआ बना और मौत को हर बुराई से बचने के लिए बाइसे राहत बना।” इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।’

  1. किताबुल जिहाद, बाब तमन्ना शहादत । 2. मुख्तसर सहीह मुस्लिम, लिल अलबानी, हदीस 1869,

 

گرات الموت

मौत की सख्तियां मसला 9. मौत की तकलीफ़ और सख्ती बरहक़ है।

وجاءت سكرة الموت بالحق

“और मौत की सख्ती हक़ लेकर आ पहुंची।”

(सूरह क़ाफ़, आयत 19) मसला 10. मौत की तकलीफ़ बड़ी सख्त है।

عن جابر رضي الله عنه قال: قال رسول الله و رلاتمو الموت فإن مول المد شديد وان من النقاد أن يطول عمر العبي ورقه الله عزوجل الإنابة)) رواه أخمد 1)

(ime) . ___ हज़रत जाबिर (रज़ि०) कहते हैं कि रसूलुल्लाह (सल्ल०) ने फ़रमाया “मौत की तमन्ना न करो जांकनी की तकलीफ़ बड़ी सख्त है और यह नेक बख्ती की अलामत है कि अल्लाह किसी बन्दे की उम्र लम्बी कर दे और उसे तौबा की तौफ़ीक़ अता फ़रमा दे।” इसे अहमद ने रिवायत किया है।

मसला 11. मौत की जितनी तकलीफ़ रसूले अकरम (सल्ल०) को हुई इतनी तकलीफ़ क़यामत तक किसी दूसरे आदमी को नहीं होगी।

عن انس بن مالك رضي الله عنه قال لما وجد رشول الله * من گرب

(( كزب علی ابن الموت ما وجد، قالت فاطمه واگزب ابتاه فقال ترشول الله بعد اليوم إنه قد خضر من ابنك مالي بتاري منه أخذا الواقه يوم القيمة.)) رواه

(e)

(1) हज़रत अनस बिन मालिक (रज़ि०) कहते हैं जब रसूले अकरम

. 1. अत्तीब वत्तीब, जिल्द 4, हदीस 4931,

(सल्ल०) को मौत की तकलीफ़ शुरू हुई तो हज़रत फ़ातिमा (रज़ि०) ने कहा “हाय मेरे बाप की तकलीफ़!” रसूले अकरम (सल्ल०) ने फ़रमाया “आज के बाद तुम्हारे बाप को ऐसी तकलीफ़ कभी नहीं होगी, तुम्हारे बाप को मौत के समय ऐसी तकलीफ़ आई जो आइंदा क़यामत तक किसी और को नहीं आएगी।” इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है।’

मसला 12. रसूले अकरम (सल्ल0) की मौत की तकलीफ़ पर हज़रत आइशा (रज़ि०) का इज़्हारे ख्याल।

عن عائشة رضي الله عنها قالت مات البى * وإنه لين حاقی و اقتي ف اكره نيئة الموت لاحد ابدا بعد البي * رواه البخاری (2)

हज़रत आइशा (रज़ि०) कहती हैं कि नबी अकरम (सल्ल.) की मृत्यु इस हालत में हुई कि आप (सल्ल०) का सर मुबारक मेरे सीने और ठोड़ी के बीच था। आप (सल्ल0) की मौत की तकलीफ़ देखने के बाद अब मैं किसी के लिए मौत की सख्ती को बुरा नहीं समझती। इसे बुख़ारी ने रिवायत किया

  1. अबवाबल जनाइज़, बाव ज़िक्र वफ़ात व दफ़न नबी (सल्ल०) (1/1320)। 2. किताबल मग़ाज़ी, बाब मर्जुन नबी (सल्ल०) व वफ़ात ।

مكارم المختصر

मरते समय मोमिन के ऐजाज़ात मसला 13. मरते समय मोमिन आदमी को निम्न दस किस्म के ऐजाज़ात या उनमें से कुछ ऐजाज़ात (सम्मानों) से नवाज़ा जाता है।

  1. फ़रिश्ता रूह क़ब्ज़ करने से पहले आकर अस्सलामु अलैकुम कहता
  2. मोमिन आदमी की रूह क़ब्ज़ करने (निकालने) के लिए सूरज की तरह रौशन चेहरों वाले फ़रिश्ते आते हैं।
  3. मोमिन आदमी की रूह लपेटने के लिए रहमत के फ़रिश्ते जन्नत से सफ़ेद रेशमी कफ़न अपने साथ लाते हैं। __4. रूह को मुअत्तर करने के लिए फ़रिश्ते जन्नत से खुश्बू भी अपने साथ लाते हैं।
  4. मोमिन की रूह क़ब्ज़ करते हुए फ़रिश्ते मोमिन आदमी को अल्लाह तआला की तरफ़ से भग़फ़िरत और रज़ामंदी की खुशखबरी देते हैं। . 6. मोमिन आदमी की रूह जिस्म से निकलती है तो उससे ज़मीन पर पाई जाने वाली बेहतरीन मुश्क जैसी खुश्बू आती है।
  5. मोमिन आदमी की रूह के लिए जमीन व आसमान के बीच मौजूद सारे फ़रिश रहमत की दुआ करते हैं।

___8. मोमिन आदमी की रूह को आसमान पर ले जाने वाले फ़रिश्ते खुश आमदीद कहते हुए आसमान का दरवाज़ा खोल देते हैं।

  1. हर आसमान के फ़रिश्ते मोमिन की रूह को अलविदा कहने के __लिए अगले आसमान तक साथ जाते हैं। .

___10. सातवें आसमान पर पहुंचने के बाद अल्लाह तआला के हुक्म से मोमिन रूह का दाखिला इल्लिय्यीन में कर लिया जाता है और रूह को वापस क़ब्र में भेज दिया जाता है।

स्पष्टीकरण : उपरोक्त तमाम ऐजाज़ात (सम्मानों) का उल्लेख आइंदा पृष्ठों में दिए गए मसाइल के अन्तर्गत आने वाली अहादीस में मुलाहिज़ा फ़रमाएं।

मसला 14. रूह क़ब्ज़ करने से पहले फ़रिश्ते मोमिन आदमी को अल्लाह तआला का सलाम पहुंचाते हैं।

والذين تتوفم المليكه طيبين يقولون سلم عليگم که

.. “नेक और मुत्तक़ी (परहेज़गार) लोगों की रूह फ़रिश्ते क़ब्ज़ करने आते हैं तो कहते हैं तुम पर सलामती हो।” (सूरह नहल, आयत 32)

“जिस दिन (अहले ईमान) अल्लाह से मिलेंगे उनका स्वागत सलाम से होगा।”

(सूरह अहज़ाब, आयत 44) ___ मसला 15. मोमिन आदमी की रूह क़ब्ज़ करने से पहले फ़रिश्ते उसे अल्लाह तआला की ख़ुशनूदी और रज़ामंदी की खुशखबरी देते हैं जिससे मोमिन के दिल में अल्लाह तआला से मुलाक़ात की ख़ाहिश बहुत ज़्यादा हो जाती है।

قال ( من أحب لقاء الله عن عبادة ابني الفايټ رضى الله عنه عن النبي أحب الله لقاءه ومن كرة لقاء الله كرة الله لقاءه » قالت عائشه رضي الله عنها أو

ذلك ولكن المؤمن إذا حضرة الموت بغض ازواجه الكرة الموت قال ( لي بشر برضوان الله و گراميه فليس شيء أحب إليه مما أمامه قاب لقاء الله وأحب الله لقاء ، و إن الكافر إذا خربشر بعذاب الله وعقوبته فليس شيء أكره إليه مما أمامه فكرة لقاء الله وكرة الله لقاءه » رواه البخاری (1)

हज़रत उबादा बिन सामित (रजि०) से रिवायत है कि नबी अकरम (सल्ल.) ने फ़रमाया “जो व्यक्ति अल्लाह से मुलाक़ात करना पसन्द करता है. अल्लाह भी उससे मुलाक़ात करना पसन्द करता है और जो व्यक्ति अल्लाह ताला से मुलाक़ात करना पसन्द नहीं करता, अल्लाह तआला भी उससे मिलना पसन्द नहीं फ़रमाता।” हज़रत आइशा (रज़ि०) या आप

(सल्ल0) की किसी दूसरी ज़ोजा (पाक पत्नी) ने कहा “मौत तो हमें भी नापसन्द है।” आप (सल्ल0) ने इरशाद फ़रमाया “अल्लाह की मुलाक़ात से तात्पर्य मौत नहीं बल्कि मोमिन को जब मौत आती है तो उसे अल्लाह की रज़ामंदी और इज़्ज़त अफ़ज़ाई की ख़ुशख़बरी दी जाती है उस समय मोमिन को आइंदा मिलने वाली नेमतों से ज़्यादा कोई चीज़ महबूब नहीं होती और वह (जल्दी जल्दी) अल्लाह से मिलना चाहता है और अल्लाह भी उससे मिलने को पसन्द फ़रमाता है जब काफ़िर को मौत आती है तो उसे अल्लाह के अज़ाब और उसकी सज़ा की “बशारत’ दी जाती है तब उसे आइंदा पेश आने वाले हालात से ज़्यादा नफ़रत किसी चीज़ से नहीं होती, अतः वह अल्लाह तआला से मुलाक़ात को नापसन्द करता है और अल्लाह तआला भी उससे मिलना पसन्द नहीं फ़रमाता।” इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।’ ___ मसला 16. मोमिन आदमी की रूह क़ब्ज़ करने के लिए सूरज की तरह रौशन चेहरों वाले फ़रिश्ते आते हैं। ___मसला 17. मोमिन आदमी की रूह क़ब्ज़ करने वाले फ़रिश्ते जन्नत से कफ़न और जन्नत से ख़ुश्बू अपने साथ लाते हैं। ___ मसला 18. रूह निकालने से पहले फ़रिश्ते मोमिन आदमी की रूह को सम्बोधित करके कहते हैं “ऐ पाक रूह! अल्लाह को मग़फ़िरत और खुशनूदी की तरफ़ चल।” – . 19. मोमिन आदमी की रूह, जिस्म से इस तरह जल्दी जल्दी निकलती है जिस तरह पानी की मश्क से पानी जल्दी जल्दी निकलता है।

मसला 20. मोमिन आदमी की रूह से ज़मीन पर पाई जाने वाली बेहतरीन मुश्क जैसी ख़ुश्बू आती है। – मसला 21. मोमिन आदमी की रूह को आसमान पर ले जाने वाले फ़रिश्ते हर आसमान के दरवाज़े पर मोमिन आदमी का परिचय करवाते हैं तो मुहाफ़िज़ फ़रिश्ते ख़ुशआमदीद कहते हुए आसमान का दरवाज़ा खोल देते

मसला 22. हर आसमान के फ़रिश्ते मोमिन आदमी की रूह को 1. किताबुरिक़ाक़।

अलविदाअ कहने के लिए अगले आसमान तक साथ जाते हैं।

___ मसला 23. सातवें आसमान पर पहुंचने के बाद अल्लाह तआला के हुक्म से नेक आदमी की रूह का दाखिला इल्लिय्यीन में कर लिया जाता है और रूह को वापस क़ब्र में भेज दिया जाता है।

عن البراء بن عازب رضى الله عنه قال خرجنا مع وولي الله في جرة رجل من الأنصار فانتهينا إلى القبر ولما يأخذ بعد قتیل زشؤل الله جلا دوله كانما على روسيا الطير ، و يده غؤد ینگ به في الأرض فرفع رأسه فقال (( ا ستعيذوا بالله من عذاب القبر )) متي از تلاش ، ثم قال : ((إن العبد المؤمن إذا كان في إنقطاع من الدنيا و إقبال من الآخرة نزل إلي م كة من الشبماء بيض الوجوه؛ كأن وجوههم الشم ‘ معهم كفن من اكفان الجنة وتوطين تؤط الجنية اختي يخلوا منه مد البصر ، ويجيء ملک الموت عليه السلام حتى يجلس عند رأسه فيقول : انها الشف الطبية : أخرجي إلى مغفرة من الله و رضوان قال : فخرج فتييل كما تييل القطرة من في الشقاء، فيأخما ، فإذا أخذها لم يذغؤها في يده طرفة عين ختى ياؤها فيجوما في ذلك الكفني ، وفي ذلك الوط ، ويخرج منه كاطيب نفخة يشې وجدت على وجه الأرض قال : فيضون بها فلا يمرون على ملايين الملايكة و قالوا : ما هذا الروح الطيب ؟ فيقولان : فلان ابن فلان بأختي أشمالية التي كان يسمى بها في الأينا ، حتى ينتهوا بها إلى السماء الدنيا ، فيستفتون له ففتح له ، فيشيعه من كل

ماء مقبوها إلى الماء التي تليها ، حتى ينتهي بها إلى الماء السابقة فيقول الله عز وجل: اكتبوا كتاب غبين في عليين واعدوة إلى الأرض في جده) رواه أحمد (1)

(حسن)

हज़रत बराअ बिन आज़िब (रज़ि०) कहते हैं हम एक अंसारी के जनाज़े के लिए रसूले अकरम (सल्ल0) के साथ निकले जब हम क़ब्र पर पहुंचे तो क़ब्र अभी अधूरी थी। रसूले अकरम (सल्ल०) बैठ गए और हम भी

आप (सल्ल.) के गिर्द (इतनी ख़ामोशी से) बैठ गए जैसे हमारे सरों पर परिन्दे बैठे हैं आप (सल्ल.) के हाथ मुबारक में एक छड़ी थी जिससे आप (सल्ल०) ज़मीन कुरेद रहे थे आप (सल्ल०) ने (अचानक) अपना सर मुबारक उठाया और दो या तीन बार फ़रमाया “लोगो! अज़ाबे क़ब्र से अल्लाह की पनाह मांगो।” फिर इरशाद फ़रमाया “जब मोमिन आदमी दुनिया से कूच करके आख़िरत की तरफ़ रवाना होने लगता है तो उसके पास इतने सफ़ेद चेहरे वाले फ़रिश्ते आते हैं मानो कि सूरज की तरह चमक रहे हैं उनके पास जन्नत के कफ़नों में से एक कफ़न और जन्नत की ख़ुश्बुओं में से एक ख़ुश्बू होती है वे फ़रिश्ते हदे निगाह के फ़ासले पर आकर बैठ जाते. हैं फिर मलकुल मौत (हज़रत इज़राईल अलैहिस्सलाम) तशरीफ़ लाते हैं और मोमिन आदमी के सर के पास आकर बैठ जाते हैं और कहते हैं, ऐ पाक रूह ! निकल (इस जिस्म से) और अल्लाह की मग़फ़िरत और रिज़ा की तरफ़ चल, अतएव रूह जिस्म से इस तरह (आसानी से) निकल आती है जैसे पानी मश्क से बह निकलता है। मलकुल मौत उसे पकड़ लेता है, मलकुल मौत के हाथ में क्षण भर के लिए वह रूह रहती है कि दूसरे फ़रिश्ते उससे लेकर (जन्नत के) कफ़न में लपेट लेते हैं और उसे (जन्नत की) ख़ुश्बू से मुअत्तर कर देते हैं। अतएव उस रूह से ज़मीन पर पाई जाने वाली बेहतरीन मुश्क से भी अच्छी ख़ुश्बू आती है फिर वे फ़रिश्ते (खुश्बूदार) रूह को लेकर आसमान की तरफ़ जाते हैं। रास्ते में जहां जहां मुकर्रब फ़रिश्ते उन्हें मिलते हैं वे कहते हैं यह पाकीज़ा रूह किस आदमी की है? जवाब में फ़रिश्ते कहते हैं यह फलां इब्ने फलां व्यक्ति की है जो दुनिया में अपने फ़लां बेहतरीन नाम से पहचाना जाता था। फ़रिश्ते उसकी रूह लेकर आसमाने दुनिया तक पहुंच जाते हैं और उसके लिए दरवाज़ा खोलने की प्रार्थना करते हैं। दरवाज़ा खोल दिया जाता है और उस आसमान के फ़रिश्ते मोमिन की रूह को अगले आसमान तक अलविदाअ कहने के लिए साथ जाते हैं यहां तक कि फ़रिश्ते उस रूह को लेकर सातवें आसमान तक पहुंच जाते हैं। अल्लाह तआला की तरफ़ से हुक्म होता है “मेरे बन्दे का नाम इल्लिय्यीन में लिख लो और इसे ज़मीन की तरफ़ वापस इसके जिस्म में लौटा दो।” इसे अहमद ने रिवायत

मसला 24. मोमिन की रूह क़ब्ज़ करने (निकालने) के लिए रहमत के फरिश्ते सफ़ेद रंग का रेशमी कफ़न अपने साथ लाते हैं।

मसला 25. रूह क़ब्ज़ करने से पहले फ़रिश्ते मोमिन आदमी को अल्लाह तआला की रिज़ा और रहमत की शुभ सूचना देते हैं।

मसला 26. मोमिन आदमी की रूह से आने वाली ख़ुश्बू सूंघकर फ़रिश्ते भी खुशी महसूस करते हैं।

मसला 27. फ़ौत होने वाले अहले ईमान की रूहें जब इल्लिय्यीन में पहुंचती हैं तो पहले से मौजूद अहले ईमान की रूहों से मिलकर उन्हें ख़ुशी महसूस होती है और वे एक दूसरे का हाल चाल मालूम करती हैं।

عن أبي هريرة رضي الله عنه عن النبي * قبال : (( إن المؤمن إذا إختضر اتنة م كة الأخمة بخريرة بيضاء فيقولون : أخرجی راضية مرضية عنك إلى روح الله و ريحان ورب غير غضبان فتخرج كاطيب ريح المشي حتى انهم يناوله ب ه بعضا شونه ختى ياتوا به باب الماء فيقولون : ماأطيب هذه الريح التي جاء نیومن الأزض فكلما اتوا سماء قالوا ذلک شی ياتوا به أرواح المؤمنين قال فله أفرخ به من أخبركم بقائبه إذا قدم عليه قال فيسالون ما فعل فلان قال، فيقولون دعوة حثي يتريخ فإنه كان في غم الدنيا ، فإذا قال لهم : أما آتاكم فإنه قد مات قال : يقولون هب به إلى أمير الهاوية قال : وأما الكافر في م كة العذاب تايو فقول أرجی

اخط منوا عليك إلي عذاب الله وسخطه فيخرج كانت ريح جيفة فينطلقون به إلى باب الأرض فيقولون : ماانت هذه الريځ كلما أثر على الأرض قالوا ذلکونی يتوا به أزواخ الكفار )) رواه أحمد والحاكم وابن حبان .(1) (صحيح)

हजरत अबू हुरैरह (रज़ि०) से रिवायत है कि नबी अकरम (सल्ल०) ने फरमाया “जब मोमिन की मौत का समय क़रीब आता है तो रहमत के

फ़रिश्ते सफ़ेद रेशम (का कफ़न) लेकर आते हैं और कहते हैं (ऐ रूह!) अल्लाह की रहमत, जन्नत की ख़ुश्बू और अपने ख़ुश होने वाले रब की तरफ़ इस हालत में इस जिस्म से निकल कि तू अपने रब से राज़ी है और तेरा रब तुझसे राज़ी है। मोमिन आदमी की रूह जब जिस्म से निकलती है तो उससे बेहतरीन मुश्क जैसी ख़ुश्बू आ रही होती है यहां तक कि फ़रिश्ते एक दूसरे से लेकर उसकी ख़ुश्बू सूंघते हैं और जब आसमान के दरवाज़े पर पहुंचते हैं तो आसमान के फ़रिश्ते आपस में कहते हैं यह कैसी उम्दा खुश्बू (वाली रूह) है जो ज़मीन से तुम्हारे पास आ रही है फ़रिश्ते जैसे ही अगले आसमान पर पहुंचते हैं तो उस आसमान के फ़रिश्ते भी इसी तरह कहते हैं यहां तक कि (लाने वाले फ़रिश्ते) उस रूह को अहले ईमान की रूहों की जगह (इल्लिय्यीन) में ले आते हैं जब वह रूह पहुंचती है तो (पहले से मौजूद) रूहों को इतनी ज़्यादा ख़ुशी होती है जितनी तुममें से किसी एक को अपने भाई के मिलने पर हो सकती है अतएव कुछ रूहें (नई आने वाली रूह से) पूछती हैं फ़लां आदमी किस हाल में है? फिर वह आपस में कहती हैं। इसे ज़रा छोड़ दो आराम करने दो यह दुनिया के दुखों व मुश्किलों का शिकार था (सुस्ताने के बाद) वह रूह जवाब देती है क्या वह रूह तुम्हारे पास नहीं आई वह आदमी तो मर चुका है जिस पर वह (अफ़सोस से) कहते हैं वह अपनी मां हाविया (अर्थात जहन्नम) में ले जाया गया है। काफ़िर आदमी के पास अज़ाब के फ़रिश्ते आते हैं और कहते हैं ऐ ग़मज़दा और दुखी रूह निकल अल्लाह के अज़ाब और उसकी नाराज़ी की तरफ़। काफ़िर की रूह जब जिस्म से निकलती है तो उससे इतनी (ग़लीज़) बदबू आती है जितनी किसी मुर्दार से (ग़लीज़) बू आती है फ़रिश्ते उसे लेकर ज़मीन के दरवाज़े की तरफ़ आते हैं तो (ज़मीन के दरवाज़े के मुहाफ़िज़) फ़रिश्ते कहते हैं कितनी गंदी बू है यह। जैसे ही फ़रिश्ते अगली ज़मीन के दरवाजे पर पहुंचते हैं तो उस ज़मीन के दरवाज़े के मुहाफ़िज़ फ़रिश्ते भी ऐसा ही कहते हैं यहां तक कि अज़ाब के फ़रिश्ते उसे कुफ़्फ़ार की रूहों की तै जगह (अर्थात सिज्जीन) में ले आते हैं।” इसे हाकिम और इब्ने हिबान ने रिवायत किया है।

  1. हाकिम, किताबल जनाइज़, बाब हाल क़ब्ज़ रूह मोमिन व क़ब्ज़ रूह काफ़िर (1/1342)।

स्पष्टीकरण : याद रहे मरने के बाद ईमान वालों की रूहें सरकारी मेहमान ख़ा। में पहुंचा दी जाती हैं जो सातों आसमानों के ऊपर है जिसका नाम “इल्लिय्यीन” है जबकि काफ़िरों की रूहें मरने के बाद सरकारी जेल खाने में पहुंचा दी जाती हैं जो सातवीं ज़मीन के नीचे है जिसका नाम सिज्जीन है।

__मसला 28. मोमिन आदमी की रूह को जिस्म से निकलने तक फ़रिश्ते मुसलसल बशारतें देते रहते हैं यहां तक कि रूह जिस्म से निकल आती है।

मसला 29. रूह को अर्श अज़ीम तक ले जाते हुए हर आसमान के मुहाफ़िज़ फ़रिश्ते बड़ी इज़्ज़त व एहतिराम से मोमिन आदमी की रूह का इस्तकबाल करते हैं।

تخضيرة الملايكه فإذا عن أبي هريرة رضي الله عنه عن النبي صلى الله عليه وسلم قال ( ألم كان الرجل صالحا ، قالوا : أخرجی ایها الفن الطبية كانت في الجسد الطيب أخرجي حميدة وأنشرى بروح وريحان ورب غير غضبان ، فلا يزال يقال لها ، حتى تخرج ، ثم

غرج بها إلى الماء فيفت لها قال : من هذا ؟ فيقولون فلان ، فيقال: مرحبا بالنفس الطيبة كانت في الجسد الطيب أولى حميدة و أنشرى بروح وريحان ورب غير

حتى ينتهي بها إلى السماء التي فيها الله عزوجل و ادا غضبان فلا يزال يقال لها ذلك كان الرجل الشؤ؛ قال : أخرجي ايتها النفس الخبيه ! كان في الجسير الخييير أخرجی ديمة وابشري ب ينيم و شاق وآخر من کیه ازواج فيزال يقال لها ذلك حتى تخرج ثم يعرج إلى الشماء فلا يفتح لها فيقال : من هذا ؟ يقال فلان، قال : لأزبابالنفسي التحية كانت في الجسد الخييب إزجي دي، فإنها لا تفتح لي ابواب الماء يزل بها من الماء ثم تصير إلى القبر» رواه ابن ماجة (1) (صحیح)

___हज़रत अबू हुरैरह (रज़ि०) से रिवायत है कि रसूले अकरम (सल्ल०) ने फ़रमाया “फ़रिश्ते रूह क़ब्ज़ करने के बाद जब मरने वाले के पास आते हैं तो नेक और सालेह होने की सूरत में फ़रिश्ते कहते हैं “ऐ पाक रूह ! तू पाक जिस्म में थी अब तू जिस्म से निकल आ, तू तारीफ़ के लायक है

अल्लाह की रहमत से खुश हो जा तेरे लिए जन्नत की नेमतें हैं तेरा रब तुझसे राज़ी है।” फ़रिश्ते मरने वाले को मुसलसल ऐसे ही कहते रहते हैं यहां तक कि रूह जिस्म से निकल आती है फिर जब रूह निकल आती है तो फ़रिश्ते उसे लेकर आसमान की तरफ़ चढ़ते हैं। आसमान के दरवाज़े उसके लिए खोले जाते हैं और पूछा जाता है “यह कौन है?” फ़रिश्ते जवाब देते हैं “यह फ़लां आदमी है।” जवाब में कहा जाता है “इस पाक रूह के लिए खुशआमदीद है (दुनिया में) यह पाक जिस्म में थी (ऐ पाक रूह आसमान के दरवाज़े में) ख़ुशी ख़ुशी दाख़िल हो जा तेरे लिए अल्लाह की रहमत की बशारत है जन्नत की नेमतों से खुश हो जा और राज़ी होने वाले रब (से मुलाक़ात) की तुझे मुबारक हो।” हर आसमान के दरवाज़े से गुज़रते हुए उसे निरंतर यही ख़ुशख़बरियां दी जाती हैं यहां तक कि वह रूह अर्श तक पहुंच जाती है। मरने वाला अगर बुरा आदमी हो तो फ़रिश्ते कहते हैं “ऐ ख़बीस रूह! निकल (इस जिस्म से) तू ख़बीस जिस्म में थी निकल इस जिस्म से ज़लील होकर और बशारत हो तुझे खोलते पानी की, पीप की और कुछ दूसरे अज़ाबों की।” फ़रिश्ते रूह निकलने तक मुसलसल यही कहते रहते हैं फिर उसे लेकर आसमान की तरफ़ जाते हैं आसमान का दरवाज़ा उसके लिए नहीं खोला जाता। आसमान के फ़रिते पूछते हैं “यह कौन है?’ जवाब में कहा जाता है “यह फ़लां व्यक्ति है” आसमान के फ़रिश्ते कहते हैं इस ख़बीस रूह के लिए जो ख़बीस जिस्म में थी कोई ख़ुशआमदीद नहीं इसे ज़लील करके वापस भेज दो।” आसमान के दरवाज़े ऐसी ख़बीस रूह के लिए नहीं खोले जाते अतएव फ़रिश्ते उसे आसमान से नीचे फेंक देते हैं और वह क़ब्र में लौट आती है।” इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है।’ ___मसला 30. मोमिन आदमी की रूह आसमान पर पहुंचने से पहले ही आसमान के फ़रिश्ते उसके लिए दुआ-ए-रहमत करने लगते हैं।

ماذ: عن ابي هريرة رضي الله عنه قال إذا خرجت روح المؤين تنها ملكان يضعداها قال ، فذكر من طيب ريحها و ذكر المشک ، قال : ويقول امل الشتاء : ژوخطية جاءت من قبل

  1. अबवाबुजुहद, बाब ज़िक्र मौत वल इस्तेदाद (2/3437)।

الأزض صلى الله عليك وعلى جبر گنت تغمرنية ينطلق به إلى ربه عؤوجل ثم يقول : إنطلقوا به إلى آخر الأجل، قال : وإن الكافر إذا خرج ژوځة قال ما ذكر من نتيها وذكر لغاو يقول أهل السماء : ژوح بة جاءت من قبل الأزض قال : فقال : إنطلقوا به إلى آخر الآجل قال ابو هريرة رضي الله عنه فر؛ رسول الله يطة كانت عليه على أنه هكذا. رواه مسلم

हज़रत अबू हुरैरह (रज़ि०) फ़रमाते हैं जब मोमिन की रूह निकलती है तो दो फ़रिश्ते उसे लेकर आसमान की तरफ़ जाते हैं (हदीस के रावी) हम्माद कहते है हज़रत अबू हुरैरह (रज़ि०) ने रूह की ख़ुश्बू और मुश्क का ज़िक्र किया और कहा कि आसमान वाले फ़रिश्ते (उस रूह की ख़ुश्बू पाकर) कहते हैं कोई पाक रूह है जो ज़मीन की तरफ़ से आई है अल्लाह तुझ पर रहमत करे और उस जिस्म पर भी जिसे तूने आबाद कर रखा था फिर फ़रिश्ते अपने रब के सामने उस रूह को ले जाते हैं। अल्लाह तआला इरशाद फ़रमाते हैं इसे क़यामत क़ायम होने तक (इसकी तै जगह अर्थात इल्लिय्यीन में) पहुंचा दो। हदीस के रावी ने काफ़िर की रूह के निकलने का ज़िक्र करते हुए बताया कि हज़रत अबू हुरैरह रज़ि० ने रूह की बदबू और उस पर (फ़रिश्तों की) लानत का ज़िक्र किया। आसमान के फ़रिश्ते कहते हैं कोई नापाक रूह है जो ज़मीन की तरफ़ से आ रही है फिर (अल्लाह की तरफ़ से) हुक्म होता है इसे क़यामत क़ायम होने तक (इसकी तै जगह अर्थात सिज्जीन में) ले जाओ। हज़रत अबू हुरैरह (रज़ि०) कहते हैं जब रसूले अकरम (सल्ल.) ने काफ़िर की रूह की बदबू का ज़िक्र फ़रमाया तो (नफ़रत से) अपनी चादर का दामन इस तरह अपनी नाक पर रख लिया। (और फिर अपनी चादर नाक पर रखकर दिखाई)। इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।’

  1. किताबुल जन्नत, बाब अर्ज़ मक़अद अलल मय्यित व अज़ाबिल क़ब्र।

 

 

 

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