Paigambar Ke Sadvaiwahaar Ke Kuch Darshan Part 1

पैग़म्बर

के सद्व्यवहार के कुछ दर्शन

अल्लाह के नाम से आरम्भ करता हूँ जो अति मेहरबान और दयालू है।

प्राक्कथन

जब पूर्वी और पश्चिमी दुनिया विचारधारा के अन्धकार और भ्रष्ट उपासना के अन्धेरे में जीवन यापन कर रही थी, मानव-जाति नाना प्रकार की अज्ञानता, मूर्खता, पिछड़ापन, पतन, नैतिक (अख़लाकी और सांस्कृतिक गिरावट से जूझ रही थी। अरब द्वीप में लोग मूर्तियों को पूजते, लड़कियों को मार डालते, वेश्या और व्यभिचार से कमाई करते … फारसवासी अग्नी पूजा के साथ ही अत्याचारी किस्रा की भी पूजा में लिप्त थे जिस ने फारसी सम्प्रदाय के मध्य घृणा (नफरत) और ऊँच-नीच को फैला रखा था… हिरक्ल ने रूमानियों के बीच सामप्रदायिक भेद भाव को भड़का रखा था। चुनाँचे वह अपने धर्म के विरोधियों का वध कर देता था, सत्ताधारी रूमानी शासन आर्थिक, रजनीतिक और प्रशासनिक भ्रष्टाचार से पीड़ित थी… यहाँ तक उन्हों ने जन्ता पर टैक्स लगा रखा था जिसे “सिर का टैक्स” कहा जाता था जिसे नागरिक अपने सिर को कटने से बचाने के बदले देता था! इसी कारण हम देखते हैं कि सामान्य रूप से सामूहिक आत्म-हत्या की पूरी तैयारी थी। उस समय मानव जाति आत्म हत्या से केवल प्रसन्न ही नहीं थी, बल्कि उस पर टूटी पड़ रही थी!! इस प्रकार दुनिया अत्याचार और पतन तथा पिछड़ेपन के समुद्र में हचकोले खा रही थी कि अरब द्वीप के पवित्र नगर मक्का मुकर्रमा में अल्लाह के सन्देष्टा मुहम्मद सल्लल्लाह अलैहि व सल्लम के रूप में एक उज्ज्वल प्रकाश फूटा जिस की किरणों से सर्व संसार प्रकाश मान हो गया और उसे इस्लाम का मार्ग दर्शन प्राप्त हुआ। इस प्रकार भटकती हुई मानवता को एक वास्तविक मार्ग दर्शक, रक्षक और मुक्ति देने वाला महान उपकारी, कृपालू, निष्काम और शुद्धहृदय पुरूष प्राप्त हो गया। जिसे उसकी कौम के लोगों ने “सादिक़” (सच्चा, सत्यवादी) और “अमीन” (विश्वस्त, अमानतदार) की उपाधि से जानती थी

और जिस को उस के पालनहार ने इस तरह से सम्बोधित कियाः

“हम ने आप को सर्व संसार के लिए रहमत -करूणाबनाकर भेजा है।” (सूरतुल अम्बियाः१०७) चुनांचे सर्व संसार के पालनहार ने आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पैगाम को विश्व व्यापी करूणा और दया घोषित किया है जो सर्व समय काल में सर्व संसार के लोगों को सामान्य रूप से सम्मिलित है। यह रहमत (करूणा और दया) किसी समय अथवा किसी सम्प्रदाय के साथ विशिष्ट नहीं है। अर्थात प्रत्येक मानव आप के निकट दया का पात्र है। पैग़म्बर सल्लल्लाह अलैहि व सल्लम स्वयं फरमाते हैं किः “मैं करूणा बन कर आया हूँ जो सर्व संसार के पालनहार की ओर से संसार वालों के लिए एक उपहार है।” यदि आप इसकी पुष्टि चाहते हैं तो पैग़म्बर सल्लल्लाह अलैहि व सल्लम की जीवनी का अध्ययन करें, आप को पग पग पर पैग़म्बर सल्लल्लाह अलैहि व सल्लम की करूणा और दया के अनुपम दर्शन का अनुभव होगा। तथा पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि व सल्लम सद्व्यवहारऔर शिष्टाचार के जिस शिखर पर पदासीन थे वहाँ तक न किसी की पहुँच हुई है और न होगी। और ऐसा क्यों न हो जब सर्व संसार का पालनहार ही इस की गवाही देते हुए कथित हैः “निःसन्देह आप महान आचरण -अखलाक- से सम्मानित हैं।” (सूरतुल-कलमः४) तथा पैग़म्बर सल्लल्लाह अलैहि व सल्लम स्वयं फरमाते हैं किः “मुझे पैग़म्बर बना कर भेजा ही इस लिए गया है कि मैं अच्छे अखलाक -शिष्टाचार- की पूर्ति कर दूं।” इस की पुष्टि में आप के जीवन साथी आईशा रज़ियल्लाहु अन्हा का यह कथन कितना तर्क पूर्ण है किः “कुआन करीम ही आप का अख़्लाक़ -आचार- था।” फिर सर्व संसार के लिए कितनी लज्जा की बात है कि ऐसे महान पुरूष के विरूध मीडिया ने युद्ध छेड़ रखा है

और उन्हें बदनाम करने के मूर्ख प्रयास किये जा रहे हैं। “रहमत” -करूण, दया- जो आप का सबसे महान और विशेष गुण है और जिस से आप के बड़े से बड़े शत्रु भी प्रभावित हुए बिना न रह सके, उसी पर प्रश्न का चिन्ह लगाया जा रहा है !! सच्च तो यह है कि कुत्तों के भूकने से बादल का कुछ नहीं बिगड़ता, किन्तु यह संसार के प्रत्येक मनुष्य के लिए कलंक का कारण है कि मानव जाति के मुक्तिदाता, ईश्वरके अन्तिम सन्देष्टा, इस्लाम और शान्ति के पैग़म्बर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का इस प्रकार अपमान किया जाए। यदि आप इस महान पुरूष के सद्व्यवहार और शिष्टाचार से अनभिग और अपरिचित हैं या किसी भ्रांति के शिकार हैं, तो विशेष रूप से आप के लिए पैग़म्बर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम (उन पर अल्लाह की कृपा

और शान्ति अवतरित हो ) के सद्व्यवहार के कुछ उदाहरण प्रस्तुत हैं, जो पैग़म्बर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की व्यक्तित्व को स्पष्ट करने में सहायक सिद्ध हों गे। तत्व पश्चात आप स्वयं निर्णय कर सकते हैं कि इस न्याय-प्रिय महान पुरुष के साथ वर्तमान समय के “न्याय के दावेदार” कितना बड़ा अन्याय कर रहे हैं!!! सर्व जगत के पालनहार से हमारी प्रार्थना है कि इस लेख को पैग़म्बर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के महान आचार से मानवता को परिचित कराने में लाभदायक बनाये।

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