Paigambar Ke Sadvaiwahaar Ke Kuch Darshan Part 2

पैगम्बरके सद्व्यवहार के कुछ दर्शन

  1. परिपूर्ण बुद्धिः पैग़म्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम परिपूर्ण बुद्धिमानता की उस चरम सीमा पर पहुंचे हुए थे जहाँ आप के सिवा कोई मनुष्य नहीं पहुंचा है।
  2. एहतिसाब (अर्थात किसी भी काम का बदला अल्लाह तआला से चाहना): पैग़म्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जो भी काम करते थे उसका बदला केवल अल्लाह तआला से चाहते थे और इस मैदान में आप सब के नायक थे। आप को अपनी दावत के फैलाने के मार्ग में बहुत कष्ट और कठिनाईयों का सामना करना पड़ा, किन्तु आप ने धैर्य के साथ और अल्लाह की ओर से अज्र व सवाब और बदले की उम्मीद रखते हुए सब कुछ सहन कर लिया। अब्दुल्लाह बिन मस्ऊद रज़ियल्लाहु अन्हु कहते हैं: गोया मैं पैग़म्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को देख रहा हूँ कि आप एक ईश्दूत का बयान कर रहे थे जिन्हें उनकी कौम ने मारा-पीटा था और वह अपने चेहरे से खून पोंछते हुए कह रहे थेः “ऐ अल्लाह! मेरी क़ौम को क्षमा कर दे क्योंकि वह नहीं जानती”। (सहीह बुखारी व सहीह मुस्लिम ) और जुन्दुब बिन सुफ्यान कहते हैं: एक लड़ाई के दौरान पैग़म्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की अंगुली घायल होगई तो आप ने फरमायाः “तू एक अंगुली है जो घायल होगई है, जो तकलीफ तुझे पहुंची है वह अल्लाह के रास्ते में है”। (सहीह बुखारी व सहीह मुस्लिम ) 3. इखलास (निःस्वार्थता) : (अर्थात कोई भी काम केवल अल्लाह तआला की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए करना) पैग़म्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपने तमाम कामों और मामलों में मुख्लिस -निःस्वार्थ- थे, जैसाकि अल्लाह तआला ने आपको इसका आदेश दिया है, अल्लाह तआला ने फरमायाः

قل إن صلاتي ونسكي ومحياي ومماتي لله رب العالمين لا شريك له وبذاك أمرت وأنا أول المسلمين [الأنعام:۱۹۲- ۱۹۳)

“आप कह दीजिये कि निःसन्देह मेरी नमाज़ और मेरी समस्त उपासनायें (इबादत ) और मेरा जीना और मेरा मरना; ये सब केवल अल्लाह ही के लिए है जो सारेसंसार का पालनहार है। उसका कोई साझी नहीं और मुझे इसी का आदेश हुआ है और मैं सब मानने वालों में से पहला हूँ”। (सूरतुल-अनआमः१६२-१६३)

  1. सद्व्यहार -खुश अख्लाकी- और सामाजिकताः आप की पत्नी आईशा रज़ियल्लाहु अन्हा से जब आप के आचार के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहाः “कुरआन करीम ही आप का आचार -अख्लाक- था”। (मुसनद अहमद) इस का अर्थ यह है कि पैग़म्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कुरआन करीम के आदेशों का पालन करने वाले और उसकी मना की हुई (निषिधि ) चीज़ों से बचने वाले थे। उसके अन्दर जिन विशेषताओं और गुणों का उल्लेख किया गया है उनको अपनाने वाले और अपने आप को उनके अनुसार ढालने वाले थे। जिन जाहिरी या बातिनी (प्रत्यक्ष या प्रोक्ष) बुराईयों से कुरआन ने रोका है उन्हें त्यागने वाले थे। और इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है; क्योंकि आप का ही यह फर्मान है:

(11) “अल्लाह तआला ने मुझे उत्तम अख़्लाक़ और अच्छे कामों की तक्मील (परिपूर्ण करने ) के लिए भेजा है”।

___ (अदबुल-मुफरद लिल-बुखारी, मुसनद अहमद) अल्लाह तआला ने कुरआन में अपने इस कथन के द्वारा आप की विशेषता का वर्णन किया है:

وإنك لعلى خلق عظيم * القلم:4)

हवाल का शा

लैहि वसल्लम

जारी व

“निःसन्देह आप महान अख़्लाक़ पर हैं”। (सूरतुल-कलमः४) अनस बिन मालिक -जिन्हों ने दस साल तक रात व दिन

और यात्रा व निवास में आपकी सेवा की और उसके दौरान आपके अहवाल का ज्ञान प्राप्त किया- कहते हैं: अल्लाह के पैग़म्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम लोगों में सब से उत्तम अख़्लाक़ के मालिक थे। (सहीह बुखारी व सहीह मुस्लिम) तथा वह कहते हैं: “पैग़म्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम न गाली बकते थे, न फक्कड़ बाज़ी करते थे और न शाप देते थे। अगर आप किसी को डांट फटकार करते थे तो केवल इतना कहते थेः उसे क्या हो गया है उसकी पेशानी खाक आलूद हो (मट्टी में सने)।” (सहीह बुखारी)

(12) 5. अदब व सलीका (सभ्यता और शिष्टता ): सहल बिन सअद रज़ियल्लाहु अन्हु बयान करते हैं कि पैग़म्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास पीने वाली कोई चीज़ लाई गई जिस में से आप ने पिया। आपके दाहिने ओर एक बच्चा और आपके बायें ओर बड़े-बड़े लोग थे, आप ने बच्चे से कहाः “क्या तुम मुझे यह इजाज़त देते हो कि यह (पीने वाली चीज़) इन लोगों को दे दूं”? बच्चे ने कहाः अल्लाह की कसम मैं आपसे मिलने वाले अपने हिस्से पर किसी को प्राथमिकता नहीं दे सकता। सहाबी कहते हैं: चुनाँचे आप ने उस चीज़ को उस बच्चे के हाथ में रख दिया। (सहीह बुखारी व सहीह मुस्लिम) 6. सुलूह पसन्दी (सन्धि प्रियता) : आप सुधार और सन्धि प्रिय थे, सहल बिन सअद कहते हैं: कुबा वालों ने आपस में लड़ाई-झगड़ा किया यहाँ तक कि एक दूसरे पर पत्थर बाजी किये, जब पैग़म्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को इसकी सूचना मिली तो आप ने फरमायाः “चलो चलकर हम उनके बीच समझौता -सुलह- करा दें”। (सहीह बुख़ारी) 7. भलाई का आदेश देना और बुराई से रोकनाः अब्दुल्लाह बिन अब्बास बयान करते हैं कि पैग़म्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक आदमी के हाथ में सोने की एक अंगूठी देखी तो उसे निकाल कर फेंक दिया और फरमायाः “तुम में से कोई व्यक्ति आग का अंगारा ले कर अपने हाथ में डाल लेता है!” जब पैग़म्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम चले गये तो उस आदमी से कहा गया कि अपनी अंगूठी ले लो और उस से लाभ उठाओ, उसने कहाः नहीं, अल्लाह की कसम! जब पैग़म्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उसे फेंक दिया तो मैं उसे कभी भी नहीं उठा सकता। (सहीह मुस्लिम) 8. पवित्रता और सफाई पसन्दीः आप बहुत पवित्रता और स्वच्छता प्रिय थे, मुहाजिर बिन कुनफुज़ बयान करते हैं कि वह पैग़म्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास आये इस हाल में कि आप पेशाब कर रहे थे। उन्हों ने आप को सलाम किया तो आप ने उसका जवाब नहीं दिया यहाँ तक कि आप ने वुजू कर लिया, फिर आप ने उनसे क्षमा याचना करते हुए कहा : “मैं ने बिना पाकी के अल्लाह तआला का ज़िक्र (स्मरण) करना पसन्द नहीं किया।” (सुनन अबूदाऊद ) 9. जुबान की सुरक्षाः अब्दुल्लाह बिन अबी औफा बयान करते हैं कि पैग़म्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम |

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