qabar ka momin maiyat ko dabana

ضغط القبر للميت المؤمني

. क़ब्र का मोमिन मय्यित को दबाना

मसला 128. हज़रत साअद बिन मुआज़ (रज़ि०) को क़ब्र ने दबाया और रसूले अकरम (सल्ल.) के दुआ फ़रमाने पर छोड़ दिया।

قال (( هذا الذي ترك له عن ابن عمر رضي الله عنهما عن ممول اللهضمة ثم الغزش ، وتخث له أبواب السماء ، وهذه سبعون ألفا من الملكة لقد(a)

Lirijity हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ि०) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह (सल्ल०) ने फ़रमाया “साअद बिन मुआज़ (रज़ि०) वह व्यक्ति है जिस (की मौत पर अल्लाह तआला का) अर्श हिल गया, जिसके लिए आसमानों के (सारे) दरवाज़े खोल दिए गए, जिस (के जनाज़े) में सत्तर हज़ार फ़रिश्ते शरीक हुए उसे भी क़ब्र ने एक बार दबाया फिर फ़राख हो गई।” इसे नसाई ने रिवायत किया है।’

بن سعد في القبرمةعن ابن عمر رضي الله عنهما قال : قال رسول الله

( 1)

2 Titlji (Kisiksi nagi हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ि०) कहते हैं रसूलुल्लाह (सल्ल.) ने फ़रमाया “हज़रत साअद (रज़ि०) क़ब्र में दबाए गए मैंने अल्लाह तआला से दुआ की कि इससे यह तकलीफ़ दूर फ़रमा दे (और अल्लाह ने दूर फ़रमा दी)।” इसे हाकिम ने रिवायत किया है।

स्पष्टीकरण : कहा जाता है कि मोमिन मय्यित को क़ब्र इस तरह

  1. किताबुल जनाइज़, (2/1942)। 2. किताब मारफ़तुस्सहाबा, (4/4977) ।

दबाती है जैसे मां अपने बच्चे को गोद में लेकर प्यार से दबाती है जबकि काफ़िर मय्यित को, क़ब्र अज़ाब और सज़ा देने के लिए इस तरह दबाती है कि उसकी एक तरफ़ की पस्लियां दूसरी तरफ़ की पस्तियों में घुस जाती हैं

और यह भी कहा जाता है कि किसी अवसर पर हज़रत साअद (रज़ि०) से पेशाब के मामले में बेएहतियाती हुई थी जिस वजह से क़ब्र ने उन्हें दबाया।

عقيدة التوحيد وشؤال المنكر والنكير

अक़ीदा तौहीद और मुंकर नकीर के सवाल – मसला 129. ख़ालिस अक़ीदा तौहीद ही फ़रिश्तों के सवाल व जवाब में कामयाबी का सबब बनेगा।

عن البراء بن عازب رضى الله عنه عن النبي و قال ((اذا أعد المؤمن في قبره :

بي ثم شهد أن لا إله إلا الله وأن محمد رمول الله فذلك قوله : طيب الله الذين آمنوا بالقول الثابت » رواه البخاری1)

हज़रत बराअ बिन आज़िब (रजि०) से रिवायत है कि नबी अकरम (सल्ल०) ने फ़रमाया “जब मोमिन अपनी क़ब्र में बिठाया जाता है तो उसके पास (फ़रिश्ते) आते हैं और मोमिन आदमी गवाही देता है “ला इला-ह इल्लल्लाहु मुहम्मदुर्रसूलुल्लाह’ । अल्लाह तआला के फ़रमान (कि अल्लाह तआला अहले ईमान को कलिमा तय्यिबा की बरकत से दुनिया और आख़िरत (अर्थात क़ब्र) में साबित क़दम रखते हैं।)” (सूरह इबराहीम, आयत 27) का यही मतलब है।” इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।’ ___ मसला 130. कब्र में मुंकर नकोर के भय और घबराहट से कलिमा-एतौहीद ही सुरक्षित रखेगा।

T

عن أبي سعيد الخدري رضي الله عنه قال بعض القوم یا زشؤل الله ما أخذ يقوم عليه لك في يده مطران الأمل (ملک) ؟ قال شول الله ويش، الله الذين(صحیح) آمنوا بالقول الثابت في الخيرة الأنياه رواه أحمد (2)

____ हज़रत अबू सईद ख़ुदरी (रज़ि०) से रिवायत है कि (अज़ाबे क़ब्र के बारे में सुनकर) लोगों ने कहा “सा रसूलल्लाह (सल्ल०)! जिस आदमी के सर

  1. किताबुल जनाइज़।

पर फ़रिश्ता गुर्ज़ लिए खड़ा होगा वह तो ख़ौफ़ और दहशत से (होश हवास खोकर) मिट्टी का बुत बन जाएगा (वह जवाब कैसे देगा?)’ आप (सल्ल०) ने इरशाद फ़रमाया “अहले ईमान को अल्लाह तआला कलिमा तय्यिबा की बरकत से दुनिया और आख़िरत (अर्थात क़ब्र) में साबित क़दम रखता है।” इसे अहमद ने रिवायत किया है।

، تلى هذه الأئه في عن عائشة رضي الله عنها قالت: ثلث یا رول الله بورها ، فكيف بی و آنا امرأة ضيفة ؟ قال : في يت الله الذين آمنوا بالقول الثابت في

( 1) ___(1) 50531615 (27:–NPI)

हज़रत आइशा (रज़ि०) कहती हैं मैंने कहा “या रसूलल्लाह (सल्ल०)! लोग अपनी क़ब्रों में आज़माए जाएंगे और मेरा क्या हाल होगा मैं तो एक कमज़ोर औरत हूं?” आप (सल्ल०) ने इरशाद फ़रमाया “अल्लाह तआला ईमान वालों को कलिमा-ए-तौहीद की बरकत से दुनिया की जिंदगी और क़ब्र में साबित क़दम रखता है।” इसे बज़्ज़ार ने रिवायत किया है।’ ___ मसला 131. कलिमा तौहीद की बरकत से ईमान वाले बड़े इत्मीनान से मुंकर नकीर के सवालों का जवाब देंगे।

خ انه ، عن البراء بن عازب رضى الله عنه قال ترشول الله : (( ويييير ملکان فيقولان له: من ربك؟ فيقول ربي الله ، فيقولان له : ما ډیگ ؛ فيقول دين الإسلام يقولان له: ما هذا الرجل الذي بيت فيكم ؟ قال فقول : هو ممول الله . فيقولان : وماجریر رضى الله عنه ) زاد في خدو ضئن نړیک؟ فيقول : قرأت كتاب الله فام

الله الذين آمنوا بالقول الثابت في المميزة الأنيا و في فذلك قول الله عزوجل طيب الأخرين به رواه أبوداؤد (ع) |

(c )

हज़रत बराअ बिन आज़िब (रज़ि०) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह (सल्ल०) ने फ़रमाया “क़ब्र में (मोमिन आदमी के पास) दो फ़रिश्ते आते हैं।

  1. अत्तीब वत्तीव, जिल्द 4, हदीस 5219, 1. अत्तीब वत्तीब, जिल्द 4, हदीस 5218,

उसे बिठा देते हैं और पूछते हैं “तेरा रब कौन है?” वह कहता है “मेरा रब अल्लाह है।” फिर वे पूछते हैं “तेरा दीन कौन सा है?” वह कहता है “मेरा दीन इस्लाम है।” फिर वे पूछते हैं “तुम्हारे बीच जो व्यक्ति (नबी बनाकर) भेजा गया उसके बारे में तुम्हारा क्या विचार है?” वह जवाब देता है “वे अल्लाह के रसूल हैं।” फ़रिश्ते पूछते है “तुम्हें ये सारी बातें कैसे मालूम हुईं? वह आदमी कहता है “मैंने अल्लाह की किताब पढ़ी उस पर ईमान लाया

और उसकी पुष्टि की।” हज़रत जरीर (रज़ि०) की हदीस में यह वृद्धि है कि यह मतलब है अल्लाह तआला के इस फ़रमान का कि “अल्लाह तआला ईमान वालों को कलिमा तय्यिबा की बरकत से दुनिया की ज़िंदगी और आख़िरत की ज़िंदगी (अर्थात क़ब्र) में साबित क़दम रखता है।” इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है।’ ____ मसला 132. कलिमा तय्यिबा की आयत ख़ास अज़ाबे क़ब्र के बारे में ही उतरी है।

الله الذين آمنوا

قال في عن البراء بن عازب رضى الله عنه عن النبي(سوره ابراهيم : 27) قال نزلت في عذاب القبر يقال له من بگ بالقول الثابت .الله الذين آمنوا بالقول

فذلك قوله عزوجل و فيقول ربي الله ونبين محمد الثابت في المميزة الأنيا و في الأجرة » رواه منيم 1)

हज़रत बराअ बिन आज़िब (रज़ि०) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह (सल्ल०) ने फ़रमाया कि “युसब्बितुल्लाहुल्लज़ी-न आमनू बिल क़ौलिस्साबिति” अज़ाबे क़ब्र के बारे में ही उतरी है (क़ब्र में) मय्यित से पूछा जाता है “तेरा . रब कौन है?” वह कहता है “मेरा रब अल्लाह है, मेरे नबी हज़रत मुहम्मद (सल्ल०) हैं।” और यही मतलब है अल्लाह तआला के फ़रमान का कि अल्लाह तआला अहले ईमान को कलिमे की बरकत से दुनिया की जिंदगी

और क़ब्र की ज़िंदगी में साबित कदमी अता फ़रमाता है।” इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।

  1. किताबुस्सुन्नह, बाब मसला फ़िल क़ब्र क अज़ाबिल क़ब्र (3/3979)। 2. किताबुल जन्नह व सिफ़त ।

عقيدة التوحيد وشؤال المنكر و النكير

सद कर्म अज़ाबे क़ब्र से ढाल हैं __ मसला 133. सद कर्म…..नमाज़, रोज़ा, जकात, हज, सिलारहमी, अम्र बिल मारूफ़ और नही अनिल मुंकर अर्थात नेक कामों का हुक्म देना और बुराई से रोकना आदि…..क़ब्र में मय्यित को अज़ाब से बचाते हैं।

عن أبي هريرة رضي الله عنه عن النبي صلى الله عليه وسلم قال ( إن الميت إذا وضع في قبره إنه يسمع خفق يعالهن جي يولز مدبرين ، فإن كان مؤمنا كانتالصلوة عند رأسه وكان الصيام عن يمينه ، وكانت الزكاة عن شماله ، وكان فعل الخيرات من الدقة والصلوة والمغزف والإحسان إلى الناس عند رجليه ، فيؤتي من قبل رأيه فتقول الملوة :

جليه ماتين مدخل ثم يؤتى عن يمينه فيقول الصيام : ماقبلی مدل ثم يؤتى من قبل يقول فعل الخيرات من الدقة والضلة والمعروف والإحسان إلى الناس : مالی

(or)

___ (1)  ___ हज़रत अबू हुरैरह (रज़ि०) से रिवायत है कि नबी अकरम (सल्ल०) ने फ़रमाया “मय्यित जब क़ब्र में रखी जाती है तो वह (दफ़नाने के बाद) वापस पलटने वाले लोगों के जूतों की आवाज़ सुनती है अगर मय्यित मोमिन हो तो नमाज़ उसके सर के पास, रोज़ा दायीं तरफ़, ज़कात बायीं तरफ़ और दूसरे सद कर्म (जैसे) सदक़ा, नवाफ़िल, लोगों के साथ भलाइयां और सद व्यवहार पांव की तरफ़ से उसकी सुरक्षा करते हैं, फ़रिश्ता अज़ाब के लिए सर की तरफ़ से आता है तो नमाज़ कहती है मेरी तरफ़ से रास्ता नहीं (किसी दूसरी तरफ़ से आओ) फिर फ़रिश्ता दायीं तरफ़ से आता है तो ज़कात कहती है मेरी तरफ़ से रास्ता नहीं है (किसी दूसरी तरफ़ से आओ) फिर फ़रिश्ता पांव की तरफ़ से आता है तो दूसरी नेकियां, सदक़ा खैरात, सिलारहमी लोगों के साथ भलाइयां और एहसान आदि कहते हैं मेरी तरफ़ से रास्ता नहीं है (किसी

दूसरी तरफ़ से आओ)।” इसे इब्ने हिबान ने रिवायत किया है।’ __मसला 134. सारे सद कर्म यहां तक कि नमाज़ के लिए मस्जिद की तरफ़ चलकर जाने वाले क़दम भी मय्यित को अज़ाब से बचाते हैं।

عن ابي هريرة رضي الله عنه عن البى # قال (( يؤتي الرجل في قبره فإذا أتى ته الدقه وإذا أتى من قبل من قبل رانيه دفعه تلاوة القرآن وإذا أتى من قبل يديه

جلي دقتة منه إلى المساجد ) رواه الطبرانی (1)

__हज़रत अबू हुरैरह (रज़ि०) से रिवायत है कि नबी अकरम (सल्ल०) ने फ़रमाया “आदमी जब क़ब्र में दफ़न किया जाता है तो फ़रिश्ता सर की तरफ़ से अज़ाब देने के लिए आता है तो तिलावते कुरआन उसे दूर कर देती है जब फ़रिश्ता सामने से आता है तो सदक़ा खैरात उसे दूर कर देते हैं और जब पांव की तरफ़ से फ़रिश्ता आता है तो मस्जिद की तरफ़ चलकर जाना उसे दूर कर देता है।” इसे तबरानी ने रिवायत किया है।’

  1. अत्तीब वत्तींब, जिल्द 4, हदीस 5225, 2. अत्तर्णीब वत्तींब, जिल्द .4, हदीस 5225,

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