Qabar Mein Namaziyon Ke Shaan Part 8

عقابات المختضر

मरते समय काफ़िर की सज़ाएं मसला 31. मरते समय काफ़िर आदमी को निम्न दस क़िस्म की या इनमें से कुछ सज़ाएं दी जाती हैं।

  1. काफ़िर की रूह क़ब्ज़ करने के लिए अत्यन्त भयानक सियाह चेहरे वाले फ़रिश्ते आते हैं।
  2. काफ़िर की रूह क़ब्ज़ करने वाले फ़रिश्ते अपने साथ टाट का कफ़न लेकर आते हैं।
  3. रूह क़ब्ज़ करने से पहले ही फ़रिश्ते काफ़िर को यह कहकर डराना शुरू कर देते हैं “ऐ नापाक रूह, निकल इस जिस्म से और चल अल्लाह के गुस्से और ग़ज़ब की तरफ़।” ___4. काफ़िर की रूह क़ब्ज़ करते समय फ़रिश्ते उसके चेहरे और पीठ पर थप्पड़ मारते हैं।
  4. काफ़िर की रूह क़ब्ज़ करते समय फ़रिश्ते काफ़िर को आग के अज़ाब की “खुशखबरी” भी सुनाते हैं।
  5. मरते समय काफ़िर की रूह से ज़मीन पर पाए जाने वाले बदतरीन मुर्दार जैसी ग़लीज़ बदबू आती है।
  6. काफ़िर रूह की बदबू महसूस करके ज़मीन व आसमान के बीच और आसमान में मौजूदा तमाम फ़रिश्ते उस पर लानत भेजते हैं।
  7. काफ़िर की रूह क़ब्ज़ करने के बाद फ़रिश्ते उसे पहले आसमान की तरफ़ ले जाते हैं और तआरुफ़ करवाने के बाद आसमान का दरवाज़ा खोलने की दरखास्त करते हैं लेकिन मुहाफ़िज़ फ़रिश्ते दरवाज़ा खोलने से इंकार कर देते हैं। ___ 9. अल्लाह तआला की तरफ़ से हुक्म होता है इस काफ़िर रूह का दाखिला सिज्जीन में कर लिया जाए।
  8. सिज्जीन में दाखिले के बाद काफ़िर की रूह को बड़ी ज़िल्लत के साथ आसमाने अव्वल से ज़मीन पर पटख दिया जाता है। . स्पष्टीकरण : उपरोक्त तमाम सज़ाओं का ज़िक्र अगले पृष्टों में दिए

गए मसाइल के अन्तर्गत कुरआनी आयात और अहादीस में देखिए। __मसला 32. काफ़िर की रूह क़ब्ज़ करने से पहले ही फ़रिश्ते उसे जहन्नम में दाखिल होने की “शुभ सूचना” सुना देते हैं।

والذين تتوهم المليك الني انفيهم قالوا الشتم ما كنا نمل من وو بلی إن الله عليم بما كنتم تعملونه فاذلوا أبواب جهنم خلډين فيها قلبن منوی

(29-28:16) 03 “फ़रिश्ते जब उनकी रूह क़ब्ज़ करने लगते हैं उस समय वे झुक जाते हैं कि हम बुगई नहीं करते थे क्यों नहीं? अल्लाह तआला खूब जानने वाला है जो कुछ तुम करते थे। जहन्नम के दरवाज़ों से हमेशा के लिए दाखिल हो जाओ जो मुतकब्बिरीन (घमंड करने वालों) के लिए बहुत बुरी जगह है।”

… (सूरह नहल, आयत 28-29) मसला 33. काफ़िर की रूह क़ब्ज़ करते समय फ़रिश्ते उनके चेहरों पर थप्पड़ और पीठों पर कोड़े मारते हैं और साथ साथ आग के अज़ाब की ख़ुशख़बरी भी देते हैं।

ولو ترى إذ يتوفى الذين كفروا الملك يضربون وجوههم وأدبارهم ووقوا

___(50:8) Oihani … “काश तुम वह मंज़र देख सको जब फ़रिश्ते काफ़िरों की रूह क़ब्ज़ कर रहे होते हैं और (साथ साथ) उनके चेहरों और पीठों पर मार लगा रहे होते – हैं और कहते हैं अब जलने के अज़ाब का मज़ा चखो।” . (सूरह अनफ़ाल, आयत 50)

27 : 47) وكيف إذا توقنهم الملكة يضربون وجزتهم وأدبارهم € (

“उस समय क्या हाल होगा (काफ़िरों का) जब फ़रिश्ते उनकी रूह क़ब्ज़ करेंगे (और साथ) उनके चेहरों और पीठों पर मार रहे होंगे।”

(सूरह मुहम्मद, आयत 27) मसला 34. काफ़िर की रूह क़ब्ज़ करने से पहले फ़रिश्ते उसे खूब डांटते डपटते हैं और रुसवाकुन अज़ाब से दोचार होने की खुशखबरी सुनाते

ولو ترى إذا الليمون في ممرات الموت والمملكة باسطو آأيديهم اخرجوة أنفسهم اليوم تجزون عذاب الهون بما كنتم تقولون على الله غير الحق وكنتم عن

___(93:6)404 “काश तुम काफ़िरों को उस समय देखो जब वे मौत की सख्तियों में (फंसे) होते हैं और फ़रिश्ते हाथ फेलाए हुए कह रहे होते हैं निकालो अपनी जानें, आज तुम्हें ज़िल्लत का अज़ाब दिया जाएगा क्योंकि तुम अल्लाह तआला की तरफ़ नाहक़ बातें मंसूब (सम्बद्ध) किया करते थे और उसकी आयतों से घमंड किया करते थे।” (सूरह अनआम, आयत 93) __ मसला 35. काफ़िर की रूह क़ब्ज़ करने के लिए सियाह चेहरे वाले अज़ाब के फ़रिश्ते आते हैं।

मसला 36. काफ़िर की रूह लपेटने के लिए अज़ाब के फ़रिश्ते टाट का कफ़न अपने साथ लाते हैं। ____ मसला 37. काफ़िर की रूह उसके जिस्म से इतनी मुश्किल से निकलती है जितनी मुश्किल से लोहे की सीख गीली ऊन से बाहर निकलती है।

मसला 38. काफ़िर की रूह से ज़मीन पर पाए जाने वाले बदतरीन मुर्दार से ज़्यादा ग़लीज़ और गंदी बदबू आती है।

मसला 39. आसमान पर जाते हुए जिन जिन फ़रिश्तों के पास से रूह का गुज़र होता है वे सब उसे लानत मलामत करते हैं। ___ मसला 40. काफ़िर की रूह को अल्लाह तआला के समक्ष ले जाने के लिए पहले आसमान का दरवाज़ा खोलने की प्रार्थना की जाती है लेकिन मुह्यफ़िज़ फ़रिश्ते दरवाज़ा खोलने से इंकार कर देते हैं।

मसला 41. अल्लाह तआला की तरफ़ से हुक्म होता है कि इस काफ़िर सबसे निचली (अर्थात सातवीं) ज़मीन के नीचे मौजूद सिज्जीन 112

 چمچے

का नाम सबसे निमला 42. सिज्जीन में दाखिले के बाद काफ़िर की रूह पहले आसमान बरी तरह ज़मीन पर पटख दी जाती है।

الله

في جنازة

عن البراء بن عازب رضى الله عنه ، قال : خرجنا مع رشول اللير ع ن رجل من الأنصار ، فانتهينا إلى القبر ولما يأخذ بغد، فجلس شؤل اللون خوله گائما علی ره زا الطير وبيده ودينگ به في الأرض فرع را با

تعود بالله من عذاب القبر » مرتين أو ثلاثا ثم قال ( وإن العند الگاروری انقطاع من الدنيا و إقبال من الأجرة نزل إليه ملايكة ود الؤجزو متنيخشون منهنئ البصر ، ثم يجئ ملک الموت حتى يجلس عند رأسه ر ایهاالنفير الخبي ، أخرجي إلى خط من الله وغضب فتفرق في جده ای

ما ينتزع النقود من الصوفي المبلول، فيقا ، فإذا أخذها لم يغزما فنيا بغيتي تي يجتؤها في تلك المزح وتخرج منها كانت جيقة وجذث عن الأزض قيفقدون بها فلایژون بها على ملاء من الملايكة إلا قالوا : ماهذه الخية ؟ فيقولون : فلان ابن فلان ، باقبح أشباه التي كان يسمى بها في الأني، و ينتهي بها إلى الشماء الدنيا ، فينتفتح له فلا يفتح له ، ثم قرارسول الله هو لهم أبواب السماء ولايدخلون الجنة حتى يلج الجمل في سم الخياط 4 رای 40 ) يول الله عزوجل : أكتبوا كتابه في سجين في الأرض الفلی ،ن . وه طزخائم قرا : وومن يشرك بالله فگائما من الماء سنة و تهون به الري في مكان سحيق (الحج : 31) رواه أحمد (1) .

(حسن)

जात बराअ बिन आज़िब (रजि०) से रिवायत है कि हम एक अंसारी बाजे के लिए रसूले अकरम (सल्ल.) के साथ (तदफ़ीन के लिए) निकले म कब्रिस्तान पहुंचे तो क़ब्र अभी तैयार नहीं हुई थी, अतएव रसूले कज

अकरम (सल्ल०) बैठ गए और हम भी आप (सल्ल0) के गिर्द (इतनी खामोशी से) बैठ गए मानो हमारे सरों पर परिन्दे बैठे हुए हैं। आप (सल्ल०) के हाथ में एक छड़ी थी जिससे आप (सल्ल0) ज़मीन कुरेद रहे थे। आप (सल्ल0) ने सर मुबारक ऊपर उठाया और फ़रमाया “अज़ाबे क़ब्र से अल्लाह की पनाह मांगो।” आप (सल्ल0) ने यह बात दो या तीन बार इरशाद फ़रमाई। फिर फ़रमाया “काफ़िर आदमी जब दुनिया से जाने लगता है और आखिरत की तरफ़ रवाना होता है तो उसकी तरफ़ सियाह चेहरे वाले फ़रिश्ते नाज़िल होते हैं उनके पास टाट (के कफ़न) होते हैं और वे उससे हदे निगाह के फ़ासले पर बैठ जाते हैं फिर मौत का फ़रिश्ता (हज़रत इज़राईल) आता है और उसके सर के पास बैठ जाता है और कहता है, ऐ ख़बीस रूह! निकल (और चल) अल्लाह के गुस्से और ग़ज़ब की तरफ़, रूह जिस्म के अंदर जाती है और फ़रिश्ते उसे इस तरह बाहर खींचते हैं जैसे कांटेदार लोहे की सीख गीली ऊन से बाहर निकाली जाती है। फ़रिश्ते उसकी रूह निकाल लेते हैं तो दूसरे फ़रिश्ते क्षण भर के लिए भी उसे मौत के फ़रिश्ते के हाथ में नहीं रहने देते, बल्कि उसे टाट (के कफ़न) में लपेट लेते हैं। उस रूह में से ज़मीन पर किसी मुर्दार से उठने वाली बदतरीन सड़ांद जैसी बदबू आ रही होती है फ़रिश्ते उसे लेकर ऊपर (आसमान की तरफ़) जाते हैं ( रास्ते में) जहां कहीं उनका गुज़र मुकर्रब फ़रिश्तों पर होता है तो वे कहते हैं यह किस ख़बीस (रूह) की बदबू है। जवाब में फ़रिश्ते कहते हैं यह फलां इब्ने फलां की रूह है। बदतरीन नाम जो दुनिया में लिया जाता था यहां तक कि फ़रिश्ते उसे लेकर आसमाने दुनिया तक पहुंच जाते हैं। फ़रिश्ते आसमान का दरवाज़ा खोलने के लिए प्रार्थना करते हैं लेकिन दरवाज़ा नहीं खोला जाता। फिर रसूले अकरम (र.ल्ल.०) ने यह आयत पढ़ी “(काफ़िरों के लिए) आसमान के दरवाज़े नहीं खोले जाते, न ही वे जन्नत में दाखिल होंगे यहां तक कि ऊंट सूई के नाके से गुज़र जाए।” (सूरह आराफ़, आयत 40) फिर अल्लाह तआला की तरफ़ से हुक्म होता ; सबसे निचली ज़मीन में मौजूद सिज्जीन (जेल) में इसका दाखिला कर लो और काफ़िर की रूह बुरी तरह ज़मीन पर पटख दी जाती है। उसके बाद रसूले अकरम (सल्ल०) ने क़ुरआन मजीद की

यह आयत तिलावत फ़रमाई “जिसने अल्लाह से शिर्क किया वह मानो आसमान से गिर पड़ा, अब उसे परिन्दे उचक लें या हवा उसे किसी दूर दराज़ मक़ाम पर फेंक दे।” (सूरह हज, आयत 31) इसे अहमद ने रिवायत किया

मसला 43. काफ़िर की रूह क़ब्ज़ करने से पहले फ़रिश्ते काफ़िर को अल्लाह के अज़ाब और गुस्से की “खुशखबरी” सुनाते हैं जिससे काफ़िर अल्लाह के पास जाना पसन्द नहीं करता।

स्पष्टीकरण : हदीस मसला 15 के अन्तर्गत देखें।

मसला 44. काफ़िर की रूह क़ब्ज़ करने से पहले फ़रिश्ते उसे यूं सम्बोधित करते हैं “ऐ ख़बीस रूह! तू ख़बीस जिस्म में थी अब निकल ज़लील होकर, आज खुशखबरी हो तुझे (जहन्नम के) खोलते पानी और पीप की और दूसरे अज़ाबों की।”

स्पष्टीकरण : हदीस मसला 29 के अन्तर्गत देखें।

मसला 45. काफ़िर रूह की बदबू महसूस करके फ़रिश्ते उस पर लानत भेजते हैं।

स्पष्टीकरण : हदीस मसला 30 के अन्तर्गत देखें। , मसला 46. काफ़िर रूह को सिज्जीन की तरफ़ ले जाते हुए ज़मीन के दरवाज़ों के फ़रिश्ते रूह की बदबू महसूस करके शदीद इज़्हारे नफ़रत करते

स्पष्टीकरण : हदीस मसला 24 से 27 के अन्तर्गत देखें।

. 1. अत्तीब बत्तहींव, जिल्द 1, हदीस 5221,

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