Qabar Mein Namaziyon Ke Shaan Part 8

  1. मुहतरम वालिद हाफ़िज़ मुहम्मद इदरीस कीलानी (रह) अपने गांव कीलिया नवाला ज़िला गूजरां वाला की जामा मस्जिद में जुमे का ख़ुत्बा देते थे, दौरांने ख़ुत्बा मैंने दो तीन बार उनसे यह घटना सुनी। वाक़िया तहरीर कर चुका था कि इसी दौरान साप्ताहिक “ऐतसाम” के अंक 14 दिनांक- 25 मुहर्रमुल हराम 1422 हि० (26 अप्रैल 2001 ई०) मैं “गैर मेहरम औरत से ख़िल्वत नशीनी के ख़तरात” के शीर्षक से लिखे गए मज़मून में मुहतरम डॉक्टर अब्दुल ग़फ़र साहब ने भी इस घटना का विस्तृत उल्लेख फ़रमाया है। जिसे पढ़कर अलहम्दुलिल्लाह मजीद इत्मीनान हो गया । (लेखक)

ذكر الموت مستحب

मौत को याद करना मुस्तहब है मसला 1. मौत को कसरत से याद करना चाहिए।

عن ابي هريرة رضي الله عنه قال : قال رشول الله تررأكثروا ذكر هاذم

()

(iiiiii हज़रत अबू हुरैरह (रज़ि०) कहते हैं कि रसूलुल्लाह (सल्ल०) ने फ़रमाया “लज़्ज़तों को मिटाने वाली चीज़, अर्थात मौत को कसरत से याद किया करो।” इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है।

मसला 2. मौत को कसरत से याद करने वाले लोग ही अक्लमंद हैं।

فجاء رجل من عن ابن عمر رضى الله عنهما الله قال كنت مع رسول الله! أى المؤمنين أفضل ؟ قال ((أ نهم الأنصار فسلم على النبي ثم قال يا رشول الله حلفا ) قال

فاى المؤمنين ايش ؟ قال (( اكثرهم يموت ذكرا و أختهم لما بعده

(or)

(Khilijasti हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ि०) कहते हैं कि मैं रसूलुल्लाह (सल्ल0) के साथ था एक अंसारी आदमी आया और सलाम किया, फिर कहने लगा “या रसूलल्लाह (सल्ल०)! मोमिनों में से श्रेष्ठ कौन है?” आप (सल्ल०) ने इरशाद फ़रमाया ‘जिसके आचरण अच्छे हों।” अंसारी ने कहा “मोमिनों में से सबसे ज़्यादा अक्लमंद कौन है?” आप (सल्ल०) ने इरशाद फ़रमाया “जो मौत को ज़्यादा याद करता हो और मौत के बाद आने वाले समय के लिए अच्छी तरह तैयारी करता हो वह सबसे ज़्यादा अक्लमंद है।” इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है।’

  1. किताबुजुहद, बाब ज़िक्र मौत वल इस्तेदाद (2/3434)। 2. किताबुजुहद, बाब ज़िक्र मौत वल इस्तेदाद (2/3435)।

النبي و عار عشرة، فقام رجل من عن ابن عمر رضى الله عنهما ، قال ان، من ايش الناس و اخؤم الناس ؟ قال ((اكثرهم ډز الأنصار ، فقال : يا نبي الله للموت ، و اگر هم استعدادا للموت، أولنك الأكياس هوا بشرف الدنيا و گرامية(1)

ii हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ि०) से रिवायत है कि मैं नबी अकरम (सल्ल0) की सेवा में दसवां आदमी हाज़िर हुआ। अंसार में से एक आदमी खडा हुआ और कहा “ऐ अल्लाह के नबी (सल्ल०)! लोगों में से सबसे ज्यादा अक्लमंद और दूर अंदेश कौन है?” आप (सल्ल0) ने इरशाद फरमाया “मौत को सबसे ज़्यादा याद करने वाला और मौत के लिए सबसे ज्यादा तैयारी करने वाला…ये लोग सबसे ज़्यादा अक्लमंद हैं। दुनिया और आखिरत में इज़्ज़त व शर्फ़ पाने वाले हैं।” इसे तबरानी ने रिवायत किया है। __मसला 3. मौत को याद करना इबादत है।

عن أنس عنه قال ذكر عند النبي رجل بعبادة و اجتهاد فقال : ((كيف ذکر ضاجبكم الموت؟)) قالوا ما شمعه يذكره ، قال : ((ليس مضاجم هناك) رواه(51)

___ (2) __ हज़रत अनस (रज़ि०) कहते हैं कि नबी अकरम (सल्ल0) के सामने एक आदमी की इबादत और रियाज़त का उल्लेख किया गया तो आप (सल्ल0) ने पूछा “तुम्हारा साथी मौत को कितना याद करता था?’ सहाबा किराम (रज़ि०) ने कहा “हमने उसे कभी मौत का ज़िक्र करते तो नहीं सना।” आप (सल्ल०) ने फ़रमाया “फिर तुम्हारा साथी इबादत के उस दर्जे को नहीं पहुंचा जिसका ज़िक्र तुम कर रहे हो।” इसे बज़्ज़ार ने रिवायत किया है।

  1. अत्तर्णीब वत्तीब, जिल्द 4, हदीस 4886, 2. अत्तर्णीब वत्तीब, जिल्द 4, हदीस 4888,

، فجعل عن سهل بن تنغير : الشاعی به قال مات رجل من أصحاب النبي

ساكت ، اصحاب رسول الله لا يؤثر عليه ، ويذكرون من عباده و زشؤل الله

شول الله : ((هل كان يكثر ذكر الموت؟)) قالوا: لا . قال : (( فهل فلما سكتوا ال كان يدع كيرا ما يشتهي؟)) قالوا : لا . قال : ((ما بلغ صاحبكم كثيرا ما تهون( )

(1) spiniti (( हज़रत सहल बिन साअद अंसारी (रज़ि०) कहते हैं कि असहाबे रसूल (सल्ल०) में से एक आदमी मर गया तो सहाबा किराम (रज़ि०) ने उसकी तारीफें की और उसकी (कसरत) इबादत का ज़िक्र किया। रसूले अकरम (सल्ल०) ख़ामोशी से सुनते रहे। जब सहाबा किराम (रज़ि०) ख़ामोश हुए तो रसूलुल्लाह (सल्ल०) ने फ़रमाया “क्या वह कसरत से मौत का ज़िक्र करता था?’ सहाबा किराम (रज़ि०) ने कहा “नहीं।’ फिर आप (सल्ल०) ने दरयाफ़्त फ़रमाया “क्या उसने मरगूबात नफ़्स को छोड़ा?” सहाबा किराम (रज़ि०) ने अर्ज़ किया “नहीं” । आप (सल्ल०) ने इरशाद फ़रमाया “जिस दर्जे को तुम पहुंचे हो उस दर्जे को वह नहीं पहुंचा।” इसे तबरानी ने रिवायत किया है।

___ मसला 4. मौत और क़ब्र को याद रखने वाला सही मानों में अल्लाह से हया का हक़ अदा करता है।

((اتخيوا من الله حق عن عبدالله بن مسعود ، قال : قال رسول الله

! إنا لتنتخي و الحمد لله، قال رئيس داگ و لكن الخياء قلنا : يا نبي الله الانتخاء من الله حق الحياء أن تخفظ الرأس، وما وعى ، و تخفظ البطن، وما حوى ،وتتذكر الموت و البني ، ومن أراد الآخرة ترك زينة الأنيا فمن فعل ذلك فقير

(a).

(2)Srinity. strian हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ि०) कहते हैं कि रसूलुल्लाह

  1. अत्तीब वत्तींब, जिल्द 4, हृदीस 4887 ।(सल्ल0) ने फ़रमाया हया करने का हक का शुक्र है कि हम अ
  • क़ब्र का बयान ने फ़रमाया “अल्लाह तआला से इस तरह हया करो जिस तरह

का हक़ है।” हमने कहा “ऐ अल्लाह के नबी (सल्ल०) ! अल्लाह है कि हम अल्लाह तआला से हया तो करते हैं।” आप (सल्ल०) फरमाया “ऐसे नहीं बल्कि इस तरह कि जिस तरह हया करने का और वह यह कि तुम हिफ़ाज़त करो, सर की और जो कुछ सर में है

ख. कान और ज़बान आदि की) और फिर पेट की हिफ़ाज़त करो में कोई हराम चीज़ न जाए) और उन चीज़ों की हिफ़ाज़त करो जो

साथ लगी हुई हैं (अर्थात शर्मगाह और हाथ पांव आदि) और याद पेट के स

व में) हड्डियों के गल सड़ जाने को और जो व्यक्ति आख़िरत की

खाहिशमंद हो उसे चाहिए कि दुनिया की जब व ज़ीनत छोड़ दे। स्ति ने यह सारे काम किए उसने मानो अल्लाह तआला से इस तरह ही जिस तरह वास्तव में हया करने का हक़ था।” इसे तिर्मिज़ी ने

(अर्थात आंख, कान से

करो

जिस

हया रिवायत किया है।

। अबवाब सिफ़तुल क़य्यिमह, बाब 14 (2/2000)।

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