Qabar Mein Namaziyon Ke Shaan part 9

كلام الميت وماغه

मय्यित का कलाम करना और सुनना मसला 47. मरने के बाद नेक और बद दोनों मय्यितें अपना अपना अंजाम देखकर अपने अपने वारिसों से हमकलाम होती हैं जिसे वारिसीन (रिश्तेदार) नहीं सुनते अगर सुन लें तो बेहोश हो जाएं।

عن ابي يريد الخدري رضي الله عنه يقول : قال رسول الله * (( إذا وضعت الجنازة قالها الرجال على الخناقهم فان گائث صالحة قالت قدمونی قدمونی وانغير صالحة قالت يا ولها أين يذهبون بها ؟ يسمع صوتها كل شيء الا الإنتان كان ولو منها الإنسان لموق)) رواه البخاري

.हज़रत अबू सईद ख़ुदरी (रज़ि०) कहते हैं रसूले अकरम (सल्ल0) ने फ़रमाया “जब जनाज़ा तैयार होता है और लोग उसे अपने कंधों पर उठा लेते हैं नेक आदमी कहता है मुझे जल्दी ले चलो, मुझे जल्दी ले चलो, अगर नेक न हो तो कहता है हाय हलाकत! मुझे कहां ले जा रहे हो। मय्यित की आवाज़ इंसानों (और जिन्नों) के अलावा सारे प्राणी सुनते है अगर इंसान सुन ले तो बेहोश हो जाए।” इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।’

___ स्पष्टीकरण : आप (सल्ल.) का इरशाद है मय्यित को जल्द से जल्द दफ़न करो ताकि अगर मरने वाला नेक है तो जल्द से जल्द भलाई हासिल करे और अगर बुरा है तो उसका बोझ जल्द से जल्द कंधों से उतर जाए।

(बुख़ारी) मसला 48. जंगे बद्र में मरने वाले काफ़िरों ने रसूलुल्लाह (सल्ल0) का फ़रमान मुबारक सुना।

___1. किताबुल जनाइज़, बाब कलाम मय्यित अलल जनाज़ा।

 

 

 

عن أنس بن مالک رضی الله عنه أن رسول الله و ترک، کئلی در قائم اتاقم فقام عليهم قتادهم قال (( يا أبا جهل بن هشام يا أمية بن خلف يا عتبة بن ربيعة يا شية بن ريمة ! أليس ذ وجذم ما وعدكم ربكم قد قائى قد وجدت ما وعدنی بی خفا))فقال : يا شول الله و كيف ينموا وانی ف مع عم رضي الله عنه قول النبي يجيبوا وذجيفؤا قال ((والذي نفسي بيده ! ما انتم بأسمع إما أول منهم و لكنهم لاجبوا فألقوا في قليب بدر . رواه مسلم فيرون أن يجيبوا )) ثم أمر بهم

हज़रत अनस बिन मालिक (रजि०) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह (सल्ल०) ने बद्र के मक्तूलीन (मरने वालों) को तीन दिन तक ऐसे ही पड़ा रहने दिया, फिर आप (सल्ल०) उनके पास तशरीफ़ लाए और उन पर खड़े होकर आवाज़ दी, फ़रमाया “ऐ अबू जहल बिन हिशाम, ऐ उमैया बिन खल्फ़, ऐ उतबा बिन रबीआ, ऐ शैबा बिन रबीआ! तुम्हारे रब ने (मेरे ज़रिए) तुम्हारे साथ जो वायदा किया था क्या तुमने उसे सच पा लिया (या नहीं?). मेरे रब ने मेरे साथ जो वायदा किया था मैंने तो उसे सच पा लिया।” हज़रत उमर (रजि०) ने आप (सल्ल0) का इरशाद सुना तो कहा “या रसूलल्लाह (सल्ल०) ये कैसे सुनते हैं और क्या जवाब देते हैं हालांकि ये तो अब मुर्दार हो चुके हैं?” आप (सल्ल०) ने इरशाद फ़रमाया “उस सत्ता की क़सम जिसके हाथ में मेरी जान है मैं जो कुछ इनसे कह रहा हूं वह तुम इनसे ज़्यादा नहीं सुन रहे? हां! अलबत्ता ये जवाब नहीं दे सकते।” फिर आप (सल्ल०) ने उन्हें ठिकाने लगाने का हुक्म दिया तो उन्हें घसीट कर (बद्र के कुएं) क़लीब में डाल दिया गया।” इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।

मसला 49. दफ़न करने के बाद जब मय्यित के रिश्तेदार वापस जाते हैं तो मय्यित उनके क़दमों की आवाज़ सुनती है।

((ان الند اذا وضع

عن أنس بن مالك رضي الله عنه قال: قال رسول الله

  1. किताबुल जन्नत।

في كبره وتولى عنه أضخابه إنه ليسمع خفق يقالهم إذا انفروا)) رواه مسلم

हज़रत अनस बिन मालिक (रजि०) कहते हैं रसूलुल्लाह (सल्ल०) ने फ़रमाया “जब बन्दा अपनी क़ब्र में दफ़न किया जाता है और उसके साथी वापस पलटते हैं तो मय्यित अपने साथियों के जूतों की आवाज़ सुनती है।” इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।

  1. किताबुल जन्नत।

 

 

 

مفتي القبر

क़ब्र का मतलब मसला 50. “क़ब्र” का मतलब किसी चीज़ को छुपाना या दफ़न करना

و بعث الله غرابا يبحث في الأرض ليريه كيف يوارى سوء أخيه (5

“फिर अल्लाह तआला ने एक कौआ भेजा जिसने ज़मीन खोदी ताकि लील को) दिखाए कि वह अपने भाई की लाश कैसे छुपा सकता है।”

(सूरह माइदा, आयत 31)

21 : 80) البزك الرجل: إذا جعل له تزاری قول الله عز وجل وناثره (

सरह अबस की आयत 21 में अल्लाह तआला का इरशाद है अक-र-बहू” अरब लोग कहते हैं “अक़बरतुर रजुल” अर्थात मैंने मी को दफ़न किया। जब कोई आदमी कहे कि मैंने उसके लिए क़ब्र और उसे क़ब्र में डाला तो उसका मतलब है मैंने उसे दफ़न किया।

(बुख़ारी) मसला 51. क़ब्र की ज़िंदगी को बरज़न (अर्थात पर्दा) की ज़िंदगी या जालमे बरज़ख भी कहा जाता है।

(100:23)

LAPTEMi “उन सब (मरने वालों) के पीछे एक पर्दा है उस दिन तक के लिए जब है कब्रों से) उठाए जाएंगे।” (सूरह मोमिनून, आयत 100) ‘ स्पष्टीकरण : मरने के बाद मय्यित मिट्टी में दफ़न हो या पानी में की हो या दरिन्दे उसे खा जाएं या जलाकर उसे राख बना दिया जाए, जहां मय्यित का जिस्म या जिस्म के ज़र्रात या ज़र्रा ठहरेगा, वही उसकी क़ब्र

कहलाएगी।

1. बुख़ारी, किताबुल जनाइज़।

 

 

 

نويم القبر

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क़ब्र की नेमतें हक़ हैं मसला 52. ईमान वालों को क़ब्र में जन्नत की नेमतें हासिल होती हैं।

والذين تتوهم الملكة طيين يقولون لم علم ادخلوا الجنة بما ثم

(32:16)405 “नेक और पाक लोगों की रूह क़ब्ज़ करने के लिए जब फ़रिश्ते आते हैं तो (पहले) अस्सलामु अलैकुम कहते हैं (और फिर कहते हैं) दाखिल हो जाओ जन्नत में उन कर्मों के बदले जो तुम करते रहे।”

(सूरह नहल, आयत 32) __ मसला 53. क़ब्र मोमिन के लिए हरा-भरा व शादाब बाग़ है जिसमें चौधवीं के चांद जैसी रौशनी होती है।

قال ((ان المؤمن في قبره فى روضة ولي الله عن ابي هريرة رضي الله عنه عن(حسن) و فراغاو وژله كالقمر ليلة البذر)) رواه أبو يعلى خضراء قيځ له قبره

हज़रत अबू हुरैरह (रजि०) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह (सल्ल०) ने फ़रमाया “बेशक मोमिन अपनी क़ब्र में हरे-भरे बाग़ में होता है जो उसके लिए सत्तर हाथ (लगभग 105 फिट या 35 मीटर) फैला दिया जाता है और उसमें चौधवीं रात के चांद जैसी रौशनी कर दी जाती है।” इसे अबू यअला ने रिवायत किया है।

स्पष्टीकरण : दूसरी हदीस में मोमिन की क़ब्र सत्तर दर सत्तर (अर्थात 35×35 मीटर) खोलने के शब्द आए हैं। क़ब्र में विशालता मोमिन के सद कर्मों के अनुसार होगी।

मसला 54. अहले ईमान को क़ब्र में उनकी जन्नत वाला निवास स्थान 1. अत्तर्णीब वत्तींब, जिल्द 4, हदीस 5216,

सुबह व शाम दिखाया जाता है।

عن ابن عمررضى الله عنهما أن ممول الله وقال إن أحدكم إذا مات غرض

من أهل الجنة وان كان من ان النار علي مقعده بالغداة والممشى إن كان من أفل التي فمن أهل النار قال هذا مقعدك حتى يتعنت الله إليه يوم القيمة )) رواه مسلم 

.हरत अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ि०) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह (सल्ल०) ने फ़रमाया “तुममें से जब कोई मरता है तो उसे सुबह व शाम उसका ठिक ना दिखाया जाता है। अगर वह जन्नती है तो उसे जन्नतियों वाले मेहलात दिखाए जाते हैं और अगर जहन्नमी है तो जहन्नमियों वाला ठिकानां दिखाया जाता है और उसे बताया जाता है तेरे रहने की जगह अल्लाह तआला क़यामत के दिन तुझे यहां भेजेगा।” इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।’

मसला 55. मोमिन को क़ब्र में जन्नत का बिस्तर और जन्नत का लिबास मुहैया किया जाता है। .

स्पष्टीकरण : हदीस मसला 91 के अन्तर्गत देखें।

मसला 56. मोमिन की क़ब्र में जन्नत की तरफ़ एक मुस्तक़िल दरवाज़ा खोल दिया जाता है।

स्पष्टीकरण : हदीस मसला 92 के अन्तर्गत देखें।

1. किताबुल जन्नत।

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