Qabr Mein Azabon Kismein

انواع العذاب في القبر

क़ब्र में अज़ाबों की किस्में मसला

110. काफ़िर, कपटी और गुनाहगार आदमी को क़ब्र में निम्न दस प्रकार के अज़ाब या इनमें से कुछ अज़ाब दिए जाएंगे।

  1. क़ब्र में शदीद ख़ौफ़ और घबराहट का अज़ाब। 2. जन्नत से महरूम रहने की हसरत का अज़ाब। 3. जहन्नम की ज़हरीली और गर्म हवा का अज़ाब। 4. जहन्नम में अपनी रिहाइश का भयानक दृश्य देखने का अज़ाब। 5. आग के बिस्तर का अज़ाब। 6. आग के लिबास का अज़ाब। 7. क़ब्र के शिकंजे में जकड़े जाने का अज़ाब। 8. लोहे के गुर्हो (हथौड़ों) से मारे जाने का अज़ाब। 9. सांपों और बिच्छुओं के डसने का अज़ाब।
  2. बुरे कर्मों का इंतिहाई मरूह इंसानी शक्ल में आकर डराने का . अज़ाब।

स्पष्टीकरण : उपरोक्त तमाम अज़ाबों की किस्मों के बारे में अहादीस आइंदा मसाइल में देखें। ____ मसला 111. गुनाहगार आदमी क़ब्र में इंतिहाई घबराहट और ख़ौफ़ के

आलम में उठकर बैठता है। ___ मसला 112. सवाल व जवाब में नाकामी के बाद गुनाहगार आदमी को पहले जन्नत का नज़ारा करवाया जाता है और उसे बताया जाता है कि अल्लाह तआला ने तुझे इस नेमत से वंचित कर दिया है।

मसला 113. जन्नत दिखाने के बाद गुनाहगाह आदमी को जहन्नम में उसकी क़यामगाह दिखाई जाती है। .

मसला 114. इस्लाम के बारे में जिस शक व शुबह में रहते हुए

गुनाहगार आदमी ने जिंदगी गुज़ारी थी क़यामत के दिन उसी शक व शुबह पर उसे उठने की “खुशखबरी” सुनाई जाती है।

((و إذا كان الرجل الشؤء عن عائشة رضي الله عنها قال : قال رسول الله أجلس في قبره زغاشقوق ، فيقال له فما كنت تقول ؟ فيقول : سمع الناس يقولون قولا قل كما قالوا. يفرج له فزجة إلى الجنة ، فينظر إلى زهرتها وما فيها ، فقال له : أنظر إلى ما صرف الله غنگ . ثم يفرج له فزجة قبل النار فينظر إليها يحطم بغضها بغضا ، ويقال : هذا معدگ منها ، على الشك كنت و غليهم، و عليه تبع إن

हज़रत आइशा (रज़ि०) से रिवायत है कि रसूले अकरम (सल्ल०) ने फ़रमाया “ गुनाहगार आदमी जब अपनी क़ब्र में उठाकर बिठाया जाता है तो बहुत घबराया हुआ और भयभीत होता है। उससे पूछा जाता है “तुम (दुनिया में अल्लाह और रसूल के बारे में) क्या कहते थे?” वह कहता है “मैंने लोगों को जो कुछ कहते सुना वही कुछ मैं भी कहता रहा।” अतएव जन्नत की तरफ़ उसके लिए एक सुराख्न किया जाता है वह जन्नत की रौन

और उसकी दूसरी नेमतें देखता है तो उसे बताया जाता है “देख यह है वह जन्नत, जिससे अल्लाह ने तुझे महरूम कर दिया है।” फिर उसके लिए जहन्नम की तरफ़ एक सुराख किया जाता है और वह उसका नज़ारा करता है जहन्नम की आग एक दूसरे को खा रही होती है उससे कहा जाता है “यह है तुम्हारी क़यामगाह, तूने शक में ज़िंदगी गुज़ारी, शक पर ही मरा और इंशाअल्लाह शक पर ही उठेगा। फिर उसे अज़ाब में मुब्तला कर दिया जाता है।” इसे अहमद ने रिवायत किया है।’ .

मसला 115. काफ़िरों और कपटियों से मुंकर नकीर बड़े अक्कड़ और ग़ज़बनाक लहजे में सवाल करते हैं। ___ मसला 116. सवाल व जवाब में नाकामी के बाद फ़रिश्ते लोहे का गुर्ज़

.. 1. अत्तर्णीब वत्तींब, जिल्द 4, हदीस 5220,

काफ़िर और कपटी के दोनों कानों के बीच मारते हैं जिससे वह बुरी तरह चीखने चिल्लाने लगता है जिसे जिन्न व इन्सान के अलावा बाक़ी सारे प्राणी सुनते है।

دخل نخلي الجار عن أنس بن مالك رضي الله عنه أن رؤل الله

ناس ماتوا في فسمع صوتا ففزع فقال من أصحاب هذه القبور؟ قالوا يا رسول الله الجاهلية قال (( تعوا بالله من عذاب النار و من فتنة الأمجال . قالوا و ممه ذاک

؟ قال (( وإن الكافر إذا وضع في قبره أتاه ملک فينتهره فيقول له : ما یارسول الله گنت تب؟ فيقول : لا أدري. فقال له لا دريت و لا تليت . فيقال له : ما كنت تقول في هذا الرجل ؟ فيقول : كنت أقول ما يقول الناس فيضربه بمطراق من حديد بين

(صحیح) يه ، فيصيح صيحة يسمعها الخلق غير الثقين)) رواه أبو داود (1)

हज़रत अनस बिन मालिक (रज़ि०) से रिवायत है कि रसूले अकरम (सल्ल०) बनी नज्जार के बाग़ में गए वहां आपने एक आवाज़ सुनी जिससे घबरा गए और मालूम किया “यह क़बे किन लोगों की हैं?” सहाबा-ए-किराम (रज़ि०) ने कहा “ये उन लोगों की क़बें हैं जो अज्ञानता काल में फ़ौत हुए।” आप (सल्ल०) ने इरशाद फ़रमाया “आग के अज़ाब से और फ़ितना दज्जाल से अल्लाह की पनाह मांगो।” सहाबा-ए-किराम (रज़ि०) ने कहा “या रसूलल्लाह (सल्ल0)! वह किस लिए?” आप (सल्ल०) ने इरशाद फ़रमाया “दफ़न होने वाली मय्यित अगर काफ़िर (कपटी) हो तो उसके पास एक फ़रिश्ता आता है और उसे खूब डांटकर पूछता है “तू किसकी इबादत करता था।” काफ़िर (कपटी) कहता है “मैं नहीं जानता।” फ़रिश्ता उसे जवाब में कहता है “तूने न तो स्वयं अक्ल से काम लिया न (कुरआन) पढ़ा।” फिर फ़रिश्ता पूछता है “इस आदमी (अर्थात मुहम्मद सल्ल०) के बारे में तू क्या कहता था?” काफ़िर (या कपटी) कहता है “मैं वही कहता था जो दूसरे लोग कहते थे।” (यह जवाब सुनकर) फ़रिश्ता उसके दोनों कानों के बीच (अर्थात दिमाग़ पर) लोहे के गुों से मारना शुरू कर देता है और वह बुरी तरह चीखने चिल्लाने लगता है उसकी आवाज़ जिन्न व इन्सान के अलावा हर जानदार मख्लूक़ सुनती है।” इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है।’

قال ((العبد إذا وضع في قبره و تولی و عن أنس رضي الله عنه عن النبي ذهب أضخابه حتى إنه ليسمع قرع نعالهم ، اتاه ملكان فالعداه فيقولان له ماكنت

؟ فيقول : أشهد أنه عبدالله و رسوله ، فيقال : نظر إلى تقول في هذا الؤجل محمد

: ( قيراهما جميعا ، معت بين النار أبدلك الله به مقعدا من الجنة))، قال النبي وأما الكافر أو المنافق فيقول : ” آذری گن أول ما يقول الناس ، فيقان : لا دريت و الأتليت ، ثم يضرب بمطرقة من حديد ضربة بين أذنيه فيجيځ ضيخة يسمعها من يليه

___(1) Syxphijjasthya हज़रत अनस (रजि०) से रिवायत है कि नबी अकरम (सल्ल०) ने फ़रमाया “जब बन्दा क़ब्र में दफ़न किया जाता है और उसके साथी वापस पलटते हैं तो वह उनके जूतों की अवाज़ सुनता है। उसके पास दो फ़रिश्ते आते हैं, उसे बिठाते हैं और पूछते हैं “तू उस आदमी के बारे में क्या कहता था ?” (अर्थात मुहम्मद सल्ल० के बारे में) बन्दा कहता है “मैं गवाही देता हूं कि वह अल्लाह के बन्दे और उसके रसूल हैं।’ फिर उससे कहा जाता है “देख जहन्नम में तेरी जगह यह थी जिसके बदले में अल्लाह तआला ने तुझे जन्नत में जगह प्रदान की।” अतएव वह अपने दोनों ठिकाने देखता है और काफ़िर या कपटी (मुंकर नकीर के जवाब में) कहता है “मुझे मालूम नहीं “मुहम्मद (सल्ल0) कौन हैं” मैं वही कुछ कहता था जो लोग कहते थे।” अतएव उसे कहा जाता है “तूने समझा न पढ़ा (कुरआन व हदीस)” फिर उसके दोनों कानों के बीच लोहे के हथौड़े से मारा जाता है और वह बुरी तरह चीख उठता है। उसकी आवाज़ जिन्न व इन्सान के अलावा उसके पास वाली सारी मख्लूक़ सुनती है।” इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।

– 1. किताबुस्सुन्नह, (3/3977)। — • 2. किताबुल जनाइज़, बाब मय्यित।

मसला 117. काफ़िर के लिए कब्र में आग का बिस्तर बिछाया जाता है और आग का लिबास पहनाया जाता है।

मसला 118. काफ़िर की क़ब्र में जहन्नम की तरफ़ सुराख करके उसे निरंतर जहन्नम की आग और ज़हरीली हवाओं का अज़ाब दिया जाता है।

___ मसला 119. काफ़िर को क़ब्र की दीवारें शिकंजे की तरह बार बार इस सख्ती से दबाती हैं कि दायीं तरफ़ की पस्तियां बायीं तरफ़ की पस्लियों में धंस हो जाती हैं।

मसला 120. काफ़िर को क़ब्र में लोहे का गुर्ज़ मारने के लिए अंधा और बेहरा फ़रिश्ता मुसल्लत किया जाता है।

عن أبي هريرة رضي الله عنه عن النبي صلى الله عليه وسلم قال (( إن الميت إذا وضع في قبره انه يسمع خفق يعالهم حين يولون مدبرین و ان الكافر إذا أتى من قبل رأيه فلا يوجد شيء

،ثم أتى عن يمينه فلا يوجد شيء ، ثم أتى عن شماله فلا يوجد شيء ، ثم أتى من قبل – رجلي؛ فلا يوجد شيء ، فيقال له : إجلش فيجل مزعوا خائفا ، فقال : أرأيتك هذا : الرجل الذي كان في ماذا تقول فيه؟ وما ذا تشهد عليه ؟ فيقول : أ رجل؟ ولا . يهتدي لإينومه، فيقال له : محمد . فيقول : لا أدري ، سمع الناس قالوا قولا فق

كما قال الناس . فيقال له : على ذلك حييت ، و عليوي و غيوثق إن شاء الله ثم يفتح له باب من أبواب النار فيقال له : هذا تفقد من النار وما أعد الله لك فيها

يزداد خر و بورا ، ثم يفتح له باب من أبواب الجنة فيقال له : هذا مقعدك منها و ما أعد الله لك فيها لو اغته فيزداد خر و ثبورا ، ثم يضيق غليه نبرة حتى تختلف فيه أضلاعه، فتلک المويشة الضنكة التي قال الله فيقا له ميشه نگاو نخشة يوم القيمة اغمی (طه:124) رواه الطبرانی و ابن حبان و الحاكم (1) (حسن)

हज़रत अबू हुरैरह (रज़ि०) से रिवायत है कि नबी अकरम (सल्ल0) ने ‘ फ़रमाया “मय्यित जब क़ब्र में रखी जाती है तो वारिसीन (रिश्ते नाते के लोगों) के वापस जाते समय मय्यित जूतों की आवाजें सुनती है अगर मरने

वाला काफ़िर हो तो अज़ाब का फ़रिश्ता उसके सर की तरफ़ से आता है और (ईमान और सद कर्म) की कोई रुकावट नहीं पाता। फिर (अज़ाब के लिए) बायीं तरफ़ से आता है तो उधर भी कोई रुकावट नहीं पाता फिर दायीं तरफ़ से आता है तो उधर भी कोई रुकावट नहीं पाता फिर पांव की तरफ़ से आता है तो उधर से भी कोई रुकावट नहीं पाता। फ़रिश्ता उसे कहता है “उठ जा।” काफ़िर भयभीत और सहमा हुआ उठके बैठ जाता है। फ़रिश्ता उससे पूछता है “जो व्यक्ति तुम्हारे बीच (भेजा गया) था उसके बारे में तुम क्या कहते थे और उसके बारे में तुम्हारी क्या गवाही थी?” काफ़िर जवाब देता है “कौन सा आदमी?” और उसे आप (सल्ल.) के बारे में कुछ पता नहीं होता।” फ़रिश्ता कहता है “हज़रत मुहम्मद (सल्ल०)!” काफ़िर कहता है “मैं नहीं जानता।” मैंने लोगों को उनके बारे में कुछ कहते सुना था बस वही मैं भी कहता हूं।’ फ़रिश्ता कहता है “शक में तूने ज़िंदगी बसर की इसी (शक की हालत) में मरा और इसी (शक के शिक्षाप्रद अंजाम) पर इंशाअल्लाह तू उठेगा, फिर जहन्नम के दरवाज़ों में से एक दरवाज़ा उसके लिए खोल दिया जाता है और उसे बताया जाता है कि यह है आग में तेरे रहने की जगह और दूसरे अज़ाब जो अल्लाह तआला ने तेरे लिए तैयार कर रखे हैं। इस दृश्य के बाद उसकी हसरत और नदामत में वृद्धि हो जाती है। फिर उसके सामने जन्नत के दरवाज़ों में से एक दरवाज़ा खोला जाता है और उसे बताया जाता है अगर तूने (अल्लाह और रसूल सल्ल०) की इताअत व फ़रमांबरदारी की होती तो तेरी जगह यहां होती। जन्नत का यह दृश्य उसकी नदामत और हलाकत में और इज़ाफ़ा कर देता है। फिर उसकी क़ब्र तंग कर दी जाती है यहां तक कि उसकी एक तरफ़ की पस्लियां दूसरी तरफ़ की पस्लियों में धंस जाती हैं। यह है वह कष्टदायक जिंदगी जिसका अल्लाह तआला ने कुरआन मजीद में इन शब्दों में ज़िक्र किया है “अतः काफ़िर के लिए तकलीफ़देह जिंदगी होगी और हम उसे क़यामत के दिन अंधा करके उठाएंगे।” (सूरह ताहा, आयत 124) इसे तबरानी, इब्ने हिबान और हाकिम …. ने रिवायत किया है।’

… 1. अत्तीब वत्तीब, जिल्द 4, हदीस 5225,

मसला 121. क़ब्र में काफ़िर के लिए आग का बिस्तर बिछाया जाता है और आग का लिबास पहनाया जाता है।

मसला 122. क़ब्र में काफ़िर को जहन्नम की गर्म और ज़हरीली हवा का अज़ाब देने के लिए जहन्नम की तरफ़ एक सुराख़ खोला जाता है।

__ मसला 123. काफ़िर आदमी को क़ब्र शिकंजे में इस सख्ती से जकड़ लेती है कि एक तरफ़ की पस्लियां दूसरी तरफ़ की पस्लियों में धंस जाती हैं।

मसला 124. क़ब्र में काफ़िर के पास उसके बुरे कर्म भयानक और बदसूरत इंसानी शक्ल में आते हैं जिससे काफ़िर के डर और घबराहट में और इज़ाफ़ा हो जाता है।

मसला 125. काफ़िर आदमी को लोहे के गुर्गों (हथौड़ों) से मारने के लिए अंधा और बेहरा फ़रिश्ता मुसल्लत किया जाता है जिसकी मार से काफ़िर का जिस्म रेज़ा रेज़ा हो जाता है जिसे दोबारा सही सालिम बना दिया जाता है फ़रिश्ता फिर उसे मार मारकर रेज़ा रेज़ा कर देता है। क़यामत तक काफ़िर इसी यातना का शिकार रहता है।

عن البراء بن عازب رضى الله عنه قال : قال رسول الله : (( وإن العبد الكافر فتاد روحه في جسده ، و يييير مكان فيجلسانه فيقولان له : من ربک؟ فيقول : هاه هاله ” آذرى. قال فيقولان له : ما ډینک ؟ فيقول : قاه قاه لا أدري. قال فيقولان له : ماهذا الرجل الذى بك فيكم؟ فيقول : ماه هاه لا اذری . فينادى مناد من الماء : أن كذب فاقرؤه من النار و البشرة من النار وافتحوا له بابا إلى النار فيني من خيرها وتؤيها ، و يضيق علي قبره ختى تختلف فيه أضلاعه ، و يأتيه رجل قبيح الوجه ، فين الشباب من النح. فيقول : ابز بالي يشوک، هذا يومك الذي كنت توعد. فيقول : من انت وجهک الوجه القبيح يجيء بالشر ؛ فيقول : أنا عملک الخبيث . فيقول : رب لا تقم الساعة . وفي رواية له بمغناة و اد در ياتيه آب قيځ الوجه ، قبيح الثياب ، مني الريح . فيقول : انز بهوان من الله و غذاب مقيم. فيقول : بشرك الله بالشر، من أنت ؟ فيقول : انا عملت الي كنت بطيئا عن طاعة الله

ريما في مغيه جزاك الله را ، ثم يقض له أغمى أضم بگم في يده مرة لو ضرب بها جبل تان رابا ، فيضربه ضربة قيصير شرابا ، ثم يعيده الله كما كان ، يضربه ضربة أخرى فيجي صبيحة يسمعه كل شيء إلا الثقلين . قال البراء ثم يفتح

(حسن) له باب من النار و يمهد له من فزش النار )) رواه أحمد (1)

हज़रत बराअ बिन आज़िब (रज़ि०) कहते हैं कि रसूले अकरम (सल्ल०) ने फ़रमाया “(क़ब्र में) काफ़िर आदमी की रूह जब उसके जिस्म में लौटाई जाती है तो उसके पास दो फ़रिश्ते आते हैं जो उसे उठाकर बिठा देते हैं और पूछते हैं “तेरा रब कौन है?” काफ़िर कहता है “हाय अफ़सोस मैं नहीं जानता।” फ़रिश्ते पूछते हैं “तेरा दीन कौन सा है?” काफ़िर कहता है “हाय अफ़सोस मैं नहीं जानता।” फ़रिश्ते पूछते हैं “वह व्यक्ति जो तुम्हारे बीच पैगम्बर बनाकर भेजे गए थे वे कौन थे?” काफ़िर कहता है “हाय अफ़सोस मैं नहीं जानता।” आसमान से मुनादी की आवाज़ आती है इसने झूठ कहा है। इसके लिए आग का बिस्तर बिछा दो, इसे आग का लिबास पहना दो, इसके लिए जहन्नम की तरफ़ एक दरवाज़ा खोल दो। अतएव जहन्नम की गर्म और ज़हरीली हवा उसे आने लगती है। उसकी क़ब्र उस पर तंग कर दी जाती है यहां तक कि उसकी एक तरफ़ की पस्लियां दूसरी तरफ़ की पस्लियों में धंस जाती हैं। फिर उसके पास एक बदसूरत, गंदे कपड़ों वाला, बदतरीन बदबू वाला व्यक्ति आता है और कहता है “तुझे बुरे अंजाम की बशारत हो यह है वह दिन जिसका तुझसे वायदा किया गया था। काफ़िर कहता है तू कौन है? तेरा चेहरा बड़ा ही भद्दा है। तू (मेरे लिए) बुराई लेकर आया है, वह जवाब में कहता है “मैं तेरे आमाल हूं।” तब काफ़िर कहता है “ऐ मेरे रब! क़यामत क़ायम न करना।” एक रिवायत यह है कि उसके पास एक बदशक्ल, गंदे कपड़ों वाला बदबूदार व्यक्ति आता है और कहता है “तुझे रुसवाकुन और हमेशा रहने वाले अज़ाब की खुशखबरी हो।” काफ़िर कहता है कि “अल्लाह तुझे शर से नवाज़े तू कौन है?” वह कहता है ‘मैं तेरे गंदे कर्म हूं। (दुनिया में) तू अल्लाह तआला के आज्ञापालन में टाल मटोल करने वाला और उसकी अवज्ञा में हर समय तैयार रहता था, अल्लाह तुझे बदतरीन बदला अता फ़रमाए।” फिर उस पर एक अंधा और बेहरा फ़रिश्ता मुसल्लत कर दिया जाता है जिसके हाथ में लोहे का गुर्ज़ होता है, अगर पहाड़ पर मारा जाए तो पहाड़ रेज़ा रेज़ा हो जाए, फ़रिश्ता उसे बुरी तरह मारता है। काफ़िर एक ही ज़र्ब (चोट) में रेज़ा रेज़ा हो जाता है। अल्लाह तआला उसे फिर पहली वाली हालत में लौटा देता है (अर्थात उसका जिस्म सही सालिम कर दिया जाता है) फिर फ़रिश्ता उसे दूसरी बार मारता है तो काफ़िर बुरी तरह चीखने चिल्लाने लगता है जिसे जिन्न व इन्सान के अलावा हर जानदार मख्लूक़ सुनती है। हज़रत बराअ बिन आज़िब (रज़ि०) कहते हैं फिर उसके लिए आग की तरफ़ दरवाज़ा खोल दिया जाता है और उसके लिए आग का बिस्तर बिछा दिया जाता है।” इसे अहमद ने रिवायत किया है।

मसला 126. क़ब्र में काफ़िर को डसने के लिए ऐसे सांप और बिच्छू मुसल्लत किए जाते हैं कि अगर उनमें से एक भी ज़मीन पर फूंक मार दे तो ज़मीन पर कभी कोई चीज़ पैदा न हो।

فلما فرغ من دفيها، و عن ابي هريرة رضي الله عنه قال شهدنا ممتازة مع نبي الله الصرف الناس ، قال نبي الله * (إنه الآن يسمع خفق يقالكم ، آتاة منكر ونكير اغيهما مفل تور الخام ، و ايابهما محفل ضياچی البقر، و أضوائها مثل الوغد ، فيجلسانه قينالايه ما

، جاء نا كان يبدو من كان به ، فإن كان من يعبد الله قال : أغبدالله ، و نبی محمد

اللة الذين آمنوا بالقول الثابت في بايات و الهدی قاما به وبغاة ، فلک قول الله وين

ثم يفتح له باب إلى الجنة ، و يوشع له في حفرته و إن كان من أمي الشت، قال: وعيوب

الناس يقولون شيئا فقته ، فقال له : على الشك حيث ، و عليه ، و لا ارى ، من

لو تفتح أختهم على الأنيا . ثم يفتح له باب إلى النار، و لط عليه عقارب وتنا عليه

  1. अत्तीब वत्तीब, जिल्द 4, हदीस 5221,

.. تبث يا تنهشه ، و تؤتمر الأزش تضم غليه ي تختلف اضلاع ) رواه الطبراني في

(ore)

(1) हज़रत अबू हुरैरह (रज़ि०) से रिवायत है कि हम एक जनाज़े में नबी अकरम (सल्ल0) के साथ थे जब आप (सल्ल०) तदफ़ीन से फ़ारिग़ हुए तो लोग वापस पलटने लगे, अल्लाह के नबी (सल्ल०) ने फ़रमाया “अब वह तुम्हारे जूतों की आवाज़ सुनेगा उसके पास मुंकर नकीर आएंगे जिनकी आंखें तांबे के देगचे जैसी (बड़ी बड़ी) हैं। दांत गाय के सींग की तरह हैं और आवाज़ बिजली की गरज जैसी है, वे दोनों इसको बिठाएंगे और सवाल करेंगे, वह किसकी इबादत करता था? उसका नबी कौन था? अगर वह अल्लाह की इबादत करने वालों में से था तो कहेगा, मैं अल्लाह की इबादत करता हूं और मेरे नबी हज़रत मुहम्मद (सल्ल०) हैं जो हमारे पास (नुबूवत के) स्पष्ट दलाइल और हिदायत लेकर आए हम आप (सल्ल०) पर ईमान लाए और आप (सल्ल0) का अनुसरण किया यही मतलब है अल्लाह तआला के इरशादे मुबारक का “अर्थात अल्लाह तआला ईमान वालों को एक क़ौले साबित के द्वारा दुनिया और आख़िरत की ज़िंदगी में साबित क़दम रखता है।” (सूरह इबराहीम, आयत 27) फिर उसे कहा जाता है यक़ीन पर तू ज़िंदा रहा। यक़ीन पर तेरी मौत आई और यक़ीन पर ही तू उठेगा। उसके लिए जन्नत की तरफ़ एक दरवाज़ा खोल दिया जाता है उसकी क़ब्र खोल दी जाती है अगर मरने वाला (अल्लाह और रसूल के बारे में) शक करने वालों में से हो तो वह (मुंकर नकीर के सवालों के जवाब में) कहता है मैं नहीं जानता मैंने लोगों को कुछ कहते सुना और मैंने भी वही बात कही। उससे कहा जाता है शक पर तू ज़िंदा रहा। शक पर तेरी मौत हुई और शक पर ही तू दोबारा ज़िंदा होगा। फिर उसके लिए जहन्नम की तरफ़ एक दरवाज़ा खोल दिया जाता है और उस पर इतने ज़ेहरीले बिच्छू और अज़दहे मुसल्लत किए जाते हैं कि अगर उनमें से कोई एक (बिच्छू या अज़दहा) ज़मीन पर फूंक मार दे तो कोई चीज़ पैदा न हो, वह बिच्छू और अज़दहे उसे डसते रहते हैं और ज़मीन को हुक्म दिया जाता है कि उस काफ़िर पर तंग हो जा, अतएव (ज़मीन उस पर इतनी तंग होती है कि) उसकी एक तरफ़ की पस्लियां दूसरी तरफ़ की पस्लियों में धंस जाती हैं।” इसे तबरानी ने रिवायत किया है।

स्पष्टीकरण : याद रहे कि जहन्नम में भी काफ़िरों को सांपों और बिच्छुओं के डसने का अज़ाब दिया जाएगा। जहन्नम के सांपों के बारे में रसूले अकरम (सल्ल0) का इरशादे मुबारक है कि वे ऊंटों के बराबर होंगे

और उनके एक बार डसने से जहन्नमी चालीस साल तक ज़हर का असर महसूस करता रहेगा और बिच्छू के बारे में फ़रमाया कि वह खच्चर के बराबर होगा और उसके एक बार डसने से जहन्नमी चालीस साल तक उसके ज़हर का असर महसूस करता रहेगा।

(अहमद) ___ मसला 127. क़ब्र में काफ़िर पर निन्नानवे अज़दहे मुसल्लत किए जाते हैं। हर अज़दहे के सत्तर मुंह होते हैं और हर मुंह पर सात सर होते हैं। ये अज़दहे क़यामत तक काफ़िर को डसते रहते हैं।

قال (( إن المؤمن في قبره فى عن أبي هريرة رضي الله عنه عن رسول الله روضة خضراء ورځ له قبره بؤ فيراغا ، و يؤژ له كالقمر ليلة البذر تذرون فيما أنزلت هذه الاية في قيئ له معيشة ضنگا و نخشره يوم القيمة أغنى ورطه : 124) قال أتدرون ما الميه الضنك؟ قالوا : الله و رشوله أغلم . قال : عذاب الكافر في بره ، والذي نفسي بيده يسلط عليه تسعة وتنعون بنينا، أتدرون ما التنين؟ عون تحية لكل خية سبعة رؤوس ينعونه ويخشونه إلى يوم القيمة » رواه أبو يغلی و ابن

( 1)

(1) 34 __ हज़रत अबू हुरैरह (रज़ि०) से रिवायत है कि रसूले अकरम (सल्ल०) ने फ़रमाया “मोमिन अपनी क़ब्र में एक हरे भरे बाग़ में होता है उसकी क़ब्र सत्तर हाथ (35 मीटर) तक खोल दी जाती है और चौधवीं के चांद की तरह रौशन कर दी जाती है (फिर आप सल्ल० ने सहाबा किराम रजि० से पूछा)

  1. अत्तीब वत्तींब, जिल्द 4, हदीस 5223,

क्या तुम्हें मालूम है कि इस आयत में अल्लाह तआला ने क्या बात इरशाद फ़रमाई “अर्थात उसके लिए कष्टदायक ज़िंदगी होगी और हम उसे क़यामत के दिन अंधा करके उठाएंगे।” (सूरह ताहा, आयत 124) आप (सल्ल0) ने फ़रमाया, जानते हो तकलीफ़देह ज़िंदगी क्या है? सहाबा-ए-किराम (रज़ि०) ने कहा, अल्लाह और उसका रसूल (सल्ल०) बेहतर जानते हैं। आप (सल्ल०) ने इरशाद फ़रमाया “उससे मुराद क़ब्र में काफ़िर को दिया गया अज़ाब है क़सम उस ज़ात की जिसके हाथ में मेरी जान है बेशक काफ़िर पर (क़ब्र में) निन्नानवे अज़दहे मुसल्लत किए जाएंगे। हर अज़दहे के सत्तर मुंह होते हैं और हर मुंह पर सात सर होते हैं ये अज़दहे काफ़िर को क़यामत तक डसते और घायल करते रहते हैं।” इसे अबू याला और इब्ने हिबान ने रिवायत किया है।’

  1. अत्तर्णीब वत्तीब, जिल्द 4, हदीस 5216,

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