Rozon Ke Bare Mein Zaeef Aur Mauzu Ahadees

Roze Ke bare me Zaieef

والموضوعة في الصومالأحاديث الضيق

रोज़ों के बारे में ज़ईफ़ और मौजूअ अहादीस

“रमज़ान की पहली रात आती है तो अल्लाह तआला जन्नत के निगरां फ़रिश्ता ‘‘रिज़वान’ को पुकारता है तो वह कहता (या अल्लाह) मैं हाज़िर हूं, अल्लाह तआला उसे जन्नत खोलने का हुक्म देते हैं जहन्नम के निगरां फ़रिश्ते “मालिक को जहन्नुम बन्द करने का हुक्म देते हैं।” | स्पष्टीकरण : यह हदीस मौजूअ (गढ़ी हुई) है।

“रमज़ान का चांद उदय होने पर नबी करीम सल्ल० ने फ़रमाया अगर बन्दे रमज़ान की श्रेष्ठता जान लें तो सारा साल रमज़ान जैसा रहने की इच्छा करने लगेंगे।” | स्पष्टीकरण : यह हदीस मौजूअ है।

“रमज़ान की पहली तीन रातों में अल्लाह तआला रोज़ेदार लोगों पर नज़र फ़रमाता है और जब अल्लाह किसी बन्दे पर नज़र फ़रमाता है तो उसे अज़ाब नहीं करता।”

स्पष्टीकरण : यह हदीस मौजूअ है।

अल्लाह तआला रमज़ान की पहली सुबह ही तमाम मुसलमानों को बख़्श देता है।

स्पष्टीकरण : इसकी सनद में एक रावी झूठा है।

रमज़ानुल मुबारक में अल्लाह तआला रोज़ाना इफ़्तार के समय दस लाख आदमियों को जहन्नम से आज़ाद करते हैं।

स्पष्टीकरण : यह हदीस मौजूअ है।

रोज़ा रखो स्वस्थ रहो।’ स्पष्टीकरण : यह हदीस मौजूअ (मन गढ़त) है।

हर चीज़ की ज़कात है और जिस्म की ज़कात रोज़ा है। स्पष्टीकरण : यह हदीस ज़ईफ़ है।

“तीन आदमियों से खाने पीने की नेमतों का सवाल नहीं होगा। 1. इफ़्तार करने वाला 2. सेहरी खाने वाला 3. मेज़बान, तीन आदमियों से बद अख़्लाकी का हिसाब नहीं लिया जाएगा। 1. मरीज़ 2. रोज़ेदार 3. न्याय करने वाले हाकिम।”

स्पष्टीकरण : इस हदीस की सनद में एक रावी हदीसे गढ़ कर रखता है।

“जिसने हलाल रोज़ी से रोज़ा इफ़्तार करवाया उसके लिए फ़रिश्ते रहमत की दुआएं करते हैं। | स्पष्टीकरण : यह हदीस निराधार है।

अल्लाह तआला किरामन कातिबीन को हुक्म देते हैं कि मेरे रोज़ेदार बन्दों के असर के बाद के गुनाह न लिखे जाएं।”

स्पष्टीकरण : इस हदीस की सनद में एक रावी नाक़ाबिले भरोसा है।

“जिसने हलाल रिज़्क़ की खजूर से रोज़ा इफ्तार किया उसकी नमाज़ों में चार सौ नमाज़ों की वृद्धि की जाएगी।

स्पष्टीकरण : इस हदीस की सनद में एक रावी हदीसे गढ़ा करता था।

“पांच चीजें रोज़ेदार की वूज़ तोड़ देती हैं :1. झूठ, 2. चुगली 3. गीबत 4. वासना की नज़र 5. झूठी क़सम ।”

स्पष्टीकरण : इस हदीस की सनद में एक रावी झूठा है।

। “जिसने रमज़ान का एक रोज़ा छोड़ा वह एक ऊंट की एक कुर्बानी दे,

जो कुर्बानी न दे सके वह तीस साअ (अर्थात 75 किलोग्राम) खजूरें मिसकीनों में तक़सीम करे।”

स्पष्टीकरण : इस हदीस में एक रावी झूठा है।

“जिसने रमज़ान का एक रोज़ा बिला शरओ कारण छोड़ा वह उसके बदले में तीस रोज़े रखे। जिसने दो रोज़े छोड़े वह साठ रोज़े रखे और जिसने तीन रोज़े छोड़े वह नव्वे दिन के रोज़े रखे।”स्पष्टीकरण : यह हदीस बे सबूत है।

अय्यामे बैज़ (चांद की 13, 14 15 तारीख़ के दिन) के रोज़े रखो पहले दिन के रोज़े का सवाब तीन हज़ार के साल के बराबर है। दूसरे दिन का सवाब दस हज़ार साल के बराबर है और तीसरे दिन का सवाब बीस हज़ार साल के बराबर है।”

स्पष्टीकरण : इस हदीस की सनद में एक रावी हदीसे गढ़ा करता था।

जब अल्लाह का महीना है, शाअबान मेरा महीना है और रमज़ान मेरी उम्मत का महीना है जिसने रजब के रोज़े रखे उसके लिए दुगना अज्र

है और एक गुना वज़न दुनिया के एक पहाड़ के बराबर है।

नोट : उपर्युक्त तमाम मौजूअ अहादीस इमाम शौकानी रह० की किताब अल फ़वाइद, अल मजमूआ, फ़िल अहादीस, अल मौजूअ से नकल की गई हैं। विस्तार के लिए यह किताब देखी जा सकती है।

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