Sadqatul fitr ke masail

Sadqa Fitr Ke Masail

صدقة الفطر

सदक़ा फ़ित्र के मसाइल मसला 149. सदक़ा फ़ित्र फ़र्ज़ है

मसला 150. सदक़ा फ़ित्र का मक़सद रोज़े की हालत में होने वाले गुनाहों से स्वयं को पाक करना है।

मसला 151. सदक़ा फ़ित्र नमाज़े ईद से पहले अदा करना चाहिए वरना आम सदक़ा शुमार होगा।

मसला 152. सदक़ा फ़ित्र के हक़दार वही लोग हैं जो ज़कात के हक़दार।

हज़रत इब्ने अब्बास रज़ि० से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्ल० ने सदक़ा फ़ित्र रोज़ेदार को बेहूदगी और गन्दी बातों से पाक करने के लिए और मोहताजों के खाने का इन्तिज़ाम करने के लिए फ़र्ज़ किया है। जिसने नमाज़े ईद से पहले अदा किया उसका सदक़ा फ़ित्र अदा हो गया और जिसने नमाज़े ईद के बाद अदा किया उसका सदक़ा फ़ित्र आम सदक़ा शुमार होगा। इसे अहमद और इब्ने माजा ने रिवायत किया है।’

मसला 153. सदक़ा फ़ित्र की मात्रा एक सा है, जो पौने तीन सैर या ढाई किलोग्राम के बराबर है।

मसला 154. सदक़ा फ़ित्र हर मुसलमान गुलाम हो या आज़ाद, मर्द हो या औरत, छोटा हो या बड़ा, रोज़ेदार हो या गैर रोज़ेदार, साहिबे निसाब हो या न हो सब पर फ़र्ज़ है।

  1. सहीह सुनन इब्ने माजा, लिल अलवानी, भाग 1, हदीस 1480।

हज़रत इब्ने उमर रज़ि० से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्ल० ने रमज़ान का सदक़ा एक साअ खजूर या एक सा जौ, गुलाम, आज़ाद, मर्द,

औरत, छोटे बड़े हर मुसलमान पर फ़र्ज़ किया है। इसे बुख़ारी और मुस्लिम ने रिवायत किया है।

स्पष्टीकरण : जिस व्यक्ति के पास एक दिन रात की खुराक मौजूद न हो वह सदक़ा अदा करने से अपवाद है।

मसला 155. सदक़ा फ़ित्र ग़ल्ले की सूरत में देना बेहतर है।

मसला 156. गेहूं, चावल, जौ, खजूर, मुनक्क़ा या पनीर में से जो चीज़ ज़्यादा इस्तेमाल हो, वही देनी चाहिए।

हज़रत अबू सईद रज़ि० फ़रमाते हैं कि हम सदक़ा फ़ित्र एक साअ गल्ला या एक साअ खजूर या एक साअ जौ या एक साअ मुनक्का या एक साअ पनीर दिया करते थे। इसे बुख़ारी और मुस्लिम ने रिवायत किया है।

सला 157. सदक़ा फ़ित्र अदा करने का समय आख़िरी रोज़ा इफ़्तार करने के बाद शुरू होता है, लेकिन ईद से एक या दो दिन पहले अदा किया जा सकता है।

सला 158. सदक़ा फ़ित्र घर के संरक्षक को घर के तमाम लोगों पत्नी, बच्चों और मुलाज़िमों की तरफ़ से अदा करना चाहिए।

  1. सहीह बुख़ारी किताबुञ्ज़कात अध्याय सदक़तुल फ़ित्र।।
  2. लुअलुउ वल मरजान, भाग 1, हदीस 572 ।

हज़रत नाफ़ेअ रज़ि० से रिवायत है कि इब्ने उमर रज़ि० घर के छोटे बड़े तमाम लोगों की तरफ से सदक़ा फित्र देते थे यहां तक कि मेरे बेटों की तरफ से भी देते थे और इब्ने उमर रज़ि० उन लोगों को देते थे जो कुबूल करते और ईदुल फ़ित्र से एक या दो दिन पहले देते थे। इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।”

  1. किताबुज़्ज़कात, अध्याय सदक़तुल फ़ित्र।

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